राजगढ़ जिले में हत्या और लूट के मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार शर्मा की अदालत ने कमल, दिनेश और ख्वाजू को दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों आरोपियों को लूट के मामले में 7 वर्ष और साक्ष्य मिटाने के लिए 3 वर्ष का कारावास दिया गया। वहीं ख्वाजू को आर्म्स एक्ट के तहत अतिरिक्त 2 वर्ष की सजा सुनाई गई। सभी पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। 2022 में खंती में मिला था महिला का शव यह मामला 25 फरवरी 2022 का है, जब भोजपुर थाना क्षेत्र के मल्हारपुरा–माचलपुर मार्ग पर एक खंती में शैतानबाई उर्फ शांतिबाई का शव मिला था। मृतका के पैर कटे थे और गले पर धारदार हथियार से वार के निशान थे। मृतका के पुत्र ने पहचान की और बताया कि उसकी मां के पैरों में पहने चांदी के कड़े गायब थे। इससे लूट की पुष्टि हुई। पुलिस ने घटनास्थल से खून सनी मिट्टी, चप्पल और अन्य साक्ष्य जब्त किए। पूछताछ के बाद आरोपियों की निशानदेही पर पिकअप वाहन से चांदी का कड़ा, धारदार छुरा और अन्य सामान बरामद किया गया, जिसने केस को मजबूत आधार दिया। डीएनए रिपोर्ट और ‘लास्ट सीन’ बने अहम कड़ी मृतका के शरीर से मिले बालों का डीएनए आरोपियों से मैच हुआ। साथ ही मृतका को आखिरी बार आरोपियों के साथ देखे जाने की कड़ी ने मामले को और मजबूत किया। इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला पेश की। कोर्ट में 11 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। कोर्ट बोली- साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह साबित अदालत ने माना कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हैं और कोई कड़ी टूटी नहीं है। इसी आधार पर तीनों को दोषी ठहराया गया। जिले में इस तरह के जघन्य अपराध में यह पहली बार है जब आरोपियों को इतनी सख्त सजा मिली है। फैसले को न्याय व्यवस्था की मजबूत मिसाल माना जा रहा है।















































