Saturday, 25 Apr 2026 | 10:08 PM

Trending :

EXCLUSIVE

ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च

ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च

ईरान के साथ 38 दिन चले युद्ध में अमेरिका ने अपनी कई अहम और महंगी मिसाइलें खर्च कर दीं। इनमें वो मिसाइलें भी शामिल हैं, जो चीन जैसे बड़े युद्ध के लिए संभालकर रखी गई थीं। अब अमेरिका का हथियार भंडार तेजी से कम हो रहा है। इस युद्ध में अमेरिका ने करीब 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) इस्तेमाल कीं। ये खास तौर पर चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाई गई थीं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा दूसरी स्ट्राइक मिसाइलें भी दागी गईं। इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर खर्च हुए। यानी हर दिन करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए) खर्च हुए। युद्ध रुके हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिका ने यह नहीं बताया कि कुल कितने हथियार इस्तेमाल हुए। मंत्रालय का कहना है कि 13,000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक एक ही टारगेट पर कई बार हमले हुए, इसलिए असल में इस्तेमाल हुए हथियारों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हुआ युद्ध के दौरान अमेरिका ने जिन हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया, उनमें लंबी दूरी की JASSM-ER मिसाइलें शामिल हैं। ये 600 मील से ज्यादा दूर तक मार कर सकती हैं और दुश्मन की एयर डिफेंस से बचकर हमला करने के लिए बनाई गई हैं। इसके अलावा टॉमहॉक मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। अमेरिका सालभर में जितनी मिसाइलें खरीदता है, उससे करीब 10 गुना ज्यादा इस युद्ध में खर्च हो गईं। एक स्टडी के मुताबिक, अब अमेरिका के पास करीब 3000 टॉमहॉक मिसाइलें ही बची हैं। पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी तेजी से खत्म हुई हैं। एक मिसाइल की कीमत करीब 4 मिलियन डॉलर है। 2025 में अमेरिका ने 600 मिसाइलें बनाई थीं, लेकिन युद्ध में 1200 से ज्यादा इस्तेमाल हो गईं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और ATACMS मिसाइलें भी खर्च हो चुकी हैं। पेंटागन के मुताबिक, कुछ जरूरी हथियार पहले से ही कम थे और अब उनकी कमी और बढ़ गई है। व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने का दावा खारिज किया व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने के दावों को गलत बताया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी किसी खास इलाके या हथियारों के स्टॉक की जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। युद्ध के पहले दो दिनों में ही 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हो गए थे। इसके अलावा कुछ ऑपरेशन में नुकसान भी हुआ। ईरान से पायलट को निकालने के मिशन में दो MC-130 विमान और तीन हेलीकॉप्टर नष्ट करने पड़े, जिनकी कीमत करीब 275 मिलियन डॉलर बताई गई। एशिया-यूरोप से भी हथियार मिडिल ईस्ट भेजे हथियारों की कमी के कारण अमेरिका को एशिया और यूरोप से भी अपने सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े। इससे वहां तैनात सेना की तैयारी पर असर पड़ा है। यूरोप में NATO की पूर्वी सीमा की सुरक्षा से जुड़े कुछ हथियार कम हो गए हैं। वहीं एशिया में भी असर ज्यादा दिखा है। साउथ चाइना सी से USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया। साथ ही दो मरीन यूनिट भी वहां तैनात की गईं। दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल सिस्टम के इंटरसेप्टर भी पहली बार वहां से हटाए गए हैं। ये सिस्टम उत्तर कोरिया के खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था। इससे पहले भी अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने जहाज और विमान भेजता रहा है। खासकर 2023 में इजराइल-गाजा युद्ध और यमन में हूती हमलों के बाद तैनाती बढ़ाई गई थी। पिछले साल हूती के खिलाफ ऑपरेशन में ही 1 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ था। हथियारों का स्टॉक भरना बड़ी चुनौती अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने की है। सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्य जैक रीड ने कहा कि मौजूदा रफ्तार से स्टॉक पहले जैसा करने में कई साल लग सकते हैं। पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों से 7 साल के समझौते किए हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंसियन का कहना है कि कुछ जरूरी मिसाइलें पहले से ही कम थीं, जो अब और घट गई हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
authorimg

April 3, 2026/
8:26 pm

Last Updated:April 03, 2026, 20:26 IST Barabanki News: पत्थरचट्टा का पौधा सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. पत्थरचट्टा का...

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: हैशटैग की जंग में बीजेपी बनाम टीएमसी का खुलासा- खुलासा, सोशल मीडिया पर 'डिजिटल महाभारत', नया चुनावी हथियार

March 19, 2026/
3:22 pm

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति का सबसे बड़ा क्षेत्र अब मैदान या मंच नहीं, बल्कि सोशल मीडिया...

RBSE 12th Result 2026 Date Live: Scorecards soon at rajeduboard.rajasthan.gov.in.

March 30, 2026/
10:30 am

आखरी अपडेट:30 मार्च, 2026, 10:30 IST बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का 20 साल का कार्यकाल आज...

Bangladesh T20 WC 2026 Controversy; Mohammad Salahuddin Vs Asif Nazrul

February 21, 2026/
11:55 am

स्पोर्ट्स डेस्क6 मिनट पहले कॉपी लिंक मोहम्मद सलाहुद्दीन नवंबर, 2024 से बांग्लादेश मेंस टीम के सीनियर असिस्टेंट कोच हैं। बांग्लादेश...

हिमाचल में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति पर विवाद:विप्लव बोलीं- जल्दबाजी में शिमला बैठकर फैसला, 71 प्रेसिडेंट में एक भी महिला नहीं

April 18, 2026/
6:06 am

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, कांग्रेस ने...

वेदांता का डीमर्जर 1-मई से प्रभावी होगा:निवेशकों को 1 के बदले 4 कंपनियों के शेयर मिलेंगे; मिड-मई तक कंपनियों की लिस्टिंग होगी

April 20, 2026/
7:31 pm

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी कंपनियों के डीमर्जर की तारीख का ऐलान कर दिया है। सोमवार, 20...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च

ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च

ईरान के साथ 38 दिन चले युद्ध में अमेरिका ने अपनी कई अहम और महंगी मिसाइलें खर्च कर दीं। इनमें वो मिसाइलें भी शामिल हैं, जो चीन जैसे बड़े युद्ध के लिए संभालकर रखी गई थीं। अब अमेरिका का हथियार भंडार तेजी से कम हो रहा है। इस युद्ध में अमेरिका ने करीब 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) इस्तेमाल कीं। ये खास तौर पर चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाई गई थीं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा दूसरी स्ट्राइक मिसाइलें भी दागी गईं। इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर खर्च हुए। यानी हर दिन करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए) खर्च हुए। युद्ध रुके हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिका ने यह नहीं बताया कि कुल कितने हथियार इस्तेमाल हुए। मंत्रालय का कहना है कि 13,000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक एक ही टारगेट पर कई बार हमले हुए, इसलिए असल में इस्तेमाल हुए हथियारों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हुआ युद्ध के दौरान अमेरिका ने जिन हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया, उनमें लंबी दूरी की JASSM-ER मिसाइलें शामिल हैं। ये 600 मील से ज्यादा दूर तक मार कर सकती हैं और दुश्मन की एयर डिफेंस से बचकर हमला करने के लिए बनाई गई हैं। इसके अलावा टॉमहॉक मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। अमेरिका सालभर में जितनी मिसाइलें खरीदता है, उससे करीब 10 गुना ज्यादा इस युद्ध में खर्च हो गईं। एक स्टडी के मुताबिक, अब अमेरिका के पास करीब 3000 टॉमहॉक मिसाइलें ही बची हैं। पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी तेजी से खत्म हुई हैं। एक मिसाइल की कीमत करीब 4 मिलियन डॉलर है। 2025 में अमेरिका ने 600 मिसाइलें बनाई थीं, लेकिन युद्ध में 1200 से ज्यादा इस्तेमाल हो गईं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और ATACMS मिसाइलें भी खर्च हो चुकी हैं। पेंटागन के मुताबिक, कुछ जरूरी हथियार पहले से ही कम थे और अब उनकी कमी और बढ़ गई है। व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने का दावा खारिज किया व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने के दावों को गलत बताया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी किसी खास इलाके या हथियारों के स्टॉक की जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। युद्ध के पहले दो दिनों में ही 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हो गए थे। इसके अलावा कुछ ऑपरेशन में नुकसान भी हुआ। ईरान से पायलट को निकालने के मिशन में दो MC-130 विमान और तीन हेलीकॉप्टर नष्ट करने पड़े, जिनकी कीमत करीब 275 मिलियन डॉलर बताई गई। एशिया-यूरोप से भी हथियार मिडिल ईस्ट भेजे हथियारों की कमी के कारण अमेरिका को एशिया और यूरोप से भी अपने सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े। इससे वहां तैनात सेना की तैयारी पर असर पड़ा है। यूरोप में NATO की पूर्वी सीमा की सुरक्षा से जुड़े कुछ हथियार कम हो गए हैं। वहीं एशिया में भी असर ज्यादा दिखा है। साउथ चाइना सी से USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया। साथ ही दो मरीन यूनिट भी वहां तैनात की गईं। दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल सिस्टम के इंटरसेप्टर भी पहली बार वहां से हटाए गए हैं। ये सिस्टम उत्तर कोरिया के खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था। इससे पहले भी अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने जहाज और विमान भेजता रहा है। खासकर 2023 में इजराइल-गाजा युद्ध और यमन में हूती हमलों के बाद तैनाती बढ़ाई गई थी। पिछले साल हूती के खिलाफ ऑपरेशन में ही 1 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ था। हथियारों का स्टॉक भरना बड़ी चुनौती अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने की है। सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्य जैक रीड ने कहा कि मौजूदा रफ्तार से स्टॉक पहले जैसा करने में कई साल लग सकते हैं। पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों से 7 साल के समझौते किए हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंसियन का कहना है कि कुछ जरूरी मिसाइलें पहले से ही कम थीं, जो अब और घट गई हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.