राजगढ़ जिले में बाल विवाह का मामला सामने आया है। प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही दूल्हा-दुल्हन और परिजन मौके से फरार हो गए, जिससे शादी का मंडप खाली मिला। यह मामला गुरुवार को तब उजागर हुआ जब बाल विवाह कंट्रोल रूम और चाइल्डलाइन से सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, वन स्टॉप सेंटर और कोतवाली थाना की संयुक्त टीम गांव पहुंची। टीम को मौके पर सन्नाटा मिला, लेकिन ग्रामीणों से पूछताछ में दो नाबालिग लड़कियों के विवाह की पुष्टि हुई। जांच के दौरान परिजनों की ओर से कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार किया और शादी का कार्ड जब्त किया। शिक्षा विभाग से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों लड़कियों की उम्र क्रमशः 12 और 14 वर्ष पाई गई, जो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 का स्पष्ट उल्लंघन है। 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाल विवाह कराने और उसमें सहयोग करने वाले कुल 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा कि जिले में बाल विवाह के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि विवाह सीजन के दौरान जहां भी ऐसी सूचना मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल विवाह जैसी घटनाओं की सूचना तुरंत दें, ताकि समय रहते रोकथाम की जा सके। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी जारी बाल विवाह की चुनौती को उजागर करती है, जिसमें समाज और प्रशासन दोनों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।















































