देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें शिशु स्वास्थ्य, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बैठक कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में हुई। बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति पर विस्तार से समीक्षा की और कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि एंटीनेटल केयर (एएनसी) पंजीयन का शत-प्रतिशत लक्ष्य पहली तिमाही में ही अभियान चलाकर पूरा किया जाए। उन्होंने इसकी नियमित समीक्षा करने और मातृ मृत्यु दर में सुधार के लिए लगातार प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि पिछले वर्ष की उपलब्धि को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टर ने सोनकच्छ विकासखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि वहां पांच साल से अधिक समय से कार्यरत सभी स्टाफ को हटाया जाए, ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके। शहरी क्षेत्रों में कमजोर स्थिति पर सख्ती बैठक में सामने आया कि देवास और सोनकच्छ के शहरी क्षेत्रों में एएनसी पंजीयन की स्थिति कमजोर है। इस पर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जहां स्टाफ की कमी है, वहां अतिरिक्त प्रभार देकर घर-घर सर्वे कराया जाए और कार्य की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने मॉडरेट एनीमिक गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में सुधार लाने के भी निर्देश दिए। डॉक्टरों के प्रदर्शन पर भी सवाल कलेक्टर सिंह ने डॉ. लक्ष्मी जायसवाल के अधिक रेफरल मामलों पर चिंता जताते हुए उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पाटीदार को बागली में पूर्ण समय निवास करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्पष्ट कहा गया कि यदि वे निर्देशों का पालन नहीं करते हैं तो बीएमओ इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी और खंड चिकित्सा अधिकारी 108 एंबुलेंस सेवा का समय पर ऑडिट कर भोपाल को रिपोर्ट भेजना सुनिश्चित करें।













































