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Valentine’s Day| noida suicide case news| नोएडा लोकल न्यूज| नोएडा लोकल खबर

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Noida News: तारीख 14 फरवरी. पूरी दुनिया जब प्यार का जश्न मना रही थी, तब नोएडा के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र के सेक्टर 107 में एक सफेद एल्ट्रोज कार के भीतर खौफनाक सन्नाटा पसरा था. कार के शीशे बंद थे, लेकिन अंदर जो मंजर था उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए. कार के अंदर खून से लथपथ दो लाशें थीं… होनहार क्रिकेटर सुमित और उसकी प्रेमिका रेखा की. यह महज एक सुसाइड नहीं था, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत था जिसे ‘जाति’ के अहंकार और ‘समाज’ के डर ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. पुलिस की शुरुआती जांच और एक साल पुराने एक ‘माफीनामे’ ने इस पूरी घटना के पीछे छिपे दर्द और जातिगत नफरत की परतों को खोलकर रख दिया है.

बचपन का साथ और परवान चढ़ता प्यार
इस प्रेम कहानी की शुरुआत दिल्ली के त्रिलोकपुरी के एक पब्लिक स्कूल से हुई थी. सुमित और रेखा ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई साथ की. एक ही कैंपस, एक ही उम्र और साथ में बिताए गए वक्त ने कब दोस्ती को धीरे-धीरे प्यार में बदल दिया, उन्हें पता भी नहीं चला. दोनों के परिवार भी एक-दूसरे से परिचित थे. पढ़ाई के बहाने सुमित का रेखा के घर आना और रेखा का सुमित के घर जाना एक रूटीन बन गया था. सुमित एक बेहतरीन क्रिकेटर था.
दाएं हाथ का यह बल्लेबाज यूपी-राजस्थान से लेकर गुजरात और मध्य प्रदेश के मैदानों अपनी धाक जमाई थी. रेखा को भी क्रिकेट का जुनून था. जब सुमित मैदान पर होता, रेखा फोन पर उसकी हौसलाअफजाई करती. ग्रेजुएशन के बाद रेखा नोएडा के सेक्टर-62 में नौकरी करने लगी, वहीं सुमित ने अपने पिता (जो दिल्ली एमसीडी में हेल्थ इंस्पेक्टर हैं) की मदद से वॉटर प्लांट लगाया और कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने लगा. सुमित ने अपनी मेहनत से नोएडा में 1 करोड़ का फ्लैट भी खरीदा था, जिसे वह रेखा को तोहफे में देना चाहता था.

साल 2019 का वो हादसा और बदलती किस्मत
इस प्रेम कहानी में पहला काला अध्याय 2019 में आया. नोएडा के सेक्टर-107 में सुमित का एक भीषण रोड एक्सीडेंट हुआ. डॉक्टरों ने कह दिया कि वह अब कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएगा. इस हादसे के बाद सुमित करियर और सपने दोनों चकनाचूर हो गए, लेकिन रेखा की मोहब्बत नहीं डगमगाई. वह अस्पताल से लेकर घर तक साये की तरह सुमित के साथ रही. 7 महीनों की रिकवरी के दौरान ही दोनों परिवारों को उनके रिश्ते की गहराई का अहसास हुआ. यही वो दौर था जब दोनों के परिवारों को उनके रिश्ते की गहराई का पता चला.

सुमित के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रेखा का परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था. बाधा सिर्फ करियर की नहीं थी, बाधा थी ‘बिरादरी’ की. सुमित वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखता था और रेखा कायस्थ परिवार से. ऊंची जाति की लड़की पिछड़ी जाति के लड़के को कैसे दी जाए? इस एक सवाल ने सालों पुराने प्यार पर पहरा बिठा दिया. रेखा के परिवार ने उस पर दबाव बनाना शुरू किया. सुमित के भाई सचिन का आरोप है कि रेखा के परिजनों ने सुमित को धमकाना शुरू कर दिया था. उन्हें डर था कि ‘नीची जाति’ के लड़के से शादी करने पर समाज में उनकी प्रतिष्ठा धूल में मिल जाएगी.

पुलिस केस की धमकी और वो ‘एक साल पुराना नोट’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत में विवाद इतना बढ़ गया कि रेखा के चचेरे भाई ने सुमित को पकड़ लिया और उस पर छेड़खानी का केस दर्ज कराने की धमकी दी. पुलिस की छानबीन में सुमित की हैंडराइटिंग में लिखा एक साल पुराना नोट मिला है, जो इस कहानी के दर्द को बयां करता है. सुमित ने लिखा था,

रेखा से मेरा कोई संबंध नहीं है. अगर मैं उसके साथ किसी भी तरह की छेड़खानी करूं या उसे परेशान करूं, तो मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इसका जिम्मेदार मैं खुद होऊंगा.

यह नोट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं था, बल्कि उस दबाव का सबूत था जो सुमित पर बनाया गया था. सुमित ने सोशल मीडिया चैट पर भी रेखा के परिवार से माफी मांगी थी, जिसमें वह गिड़गिड़ा रहा था कि प्लीज शिकायत मत करना, मैं अब नहीं मिलूंगा. इसके बाद रेखा ने भी सुमित के फोन उठाने कम कर दिए थे, लेकिन अंदर ही अंदर दोनों इस अलगाव से टूट रहे थे. सुमित ने रेखा के लिए नोएडा में 1 करोड़ का फ्लैट खरीदा था, वह उसे खुश रखने के लिए महंगे गिफ्ट देता था, लेकिन समाज की बेड़ियां इन सबसे कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुईं.

13 फरवरी की वो आखिरी शाम
भले ही दुनिया के सामने उन्होंने मिलना बंद कर दिया था, लेकिन उनके दिल की डोर अभी भी जुड़ी थी. 13 फरवरी की दोपहर 3 बजे सुमित अपनी सफेद कार लेकर निकला. 3:39 पर उसने रेखा को मैसेज किया, ‘मैं मरने जा रहा हूं.’ घबराकर रेखा ने उसे कॉल किया और ऑफिस के बाहर मिलने बुलाया. वह सुमित को समझाने के लिए कार में बैठी, लेकिन शायद सुमित ने फैसला कर लिया था. शाम 6 बजे जब रेखा घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने तलाश शुरू की. सुमित का फोन बंद था, जबकि रेखा का फोन 14 फरवरी की सुबह तक ऑन था लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था. सेक्टर-58 पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.

लावारिस कार…अंदर दो लाशें
14 फरवरी की दोपहर सेक्टर-39 पुलिस को सूचना मिली कि एक सफेद कार सुनसान जगह पर लावारिस हालत में खड़ी है. पुलिस मौके पर पहुंची और जब पुलिस ने शीशा तोड़ा, तो अंदर का मंजर भयानक था. सुमित के हाथ में पिस्टल थी और दोनों के सिर में गोलियां लगी थीं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक सबूत इशारा करते हैं कि सुमित ने पहले रेखा को गोली मारी और फिर खुद को खत्म कर लिया. कार के अंदर से दो खोखे बरामद हुए हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सेक्टर-107 में कभी सुमित का एक्सीडेंट हुआ था, उसी के पास उनकी लाशें मिलीं.

अधूरे सपने और खाली पड़ा फ्लैट
सुमित का अंतिम संस्कार दिल्ली में हुआ, जबकि रेखा का नोएडा के सेक्टर-94 में. जिस प्यार को सात जन्मों का साथ निभाना था, वह जातिवादी सोच और ईगो की भेंट चढ़ गया. सुमित ने रेखा को गिफ्ट देने के लिए जो एक करोड़ का फ्लैट लिया था, वह आज खाली पड़ा है और वह हाथ जिसने कभी मैदान पर बल्ला थामा था, वह पिस्टल थामकर मौत का सौदागर बन गया.

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बचपन का साथ और परवान चढ़ता प्यार
इस प्रेम कहानी की शुरुआत दिल्ली के त्रिलोकपुरी के एक पब्लिक स्कूल से हुई थी. सुमित और रेखा ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई साथ की. एक ही कैंपस, एक ही उम्र और साथ में बिताए गए वक्त ने कब दोस्ती को धीरे-धीरे प्यार में बदल दिया, उन्हें पता भी नहीं चला. दोनों के परिवार भी एक-दूसरे से परिचित थे. पढ़ाई के बहाने सुमित का रेखा के घर आना और रेखा का सुमित के घर जाना एक रूटीन बन गया था. सुमित एक बेहतरीन क्रिकेटर था.
दाएं हाथ का यह बल्लेबाज यूपी-राजस्थान से लेकर गुजरात और मध्य प्रदेश के मैदानों अपनी धाक जमाई थी. रेखा को भी क्रिकेट का जुनून था. जब सुमित मैदान पर होता, रेखा फोन पर उसकी हौसलाअफजाई करती. ग्रेजुएशन के बाद रेखा नोएडा के सेक्टर-62 में नौकरी करने लगी, वहीं सुमित ने अपने पिता (जो दिल्ली एमसीडी में हेल्थ इंस्पेक्टर हैं) की मदद से वॉटर प्लांट लगाया और कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने लगा. सुमित ने अपनी मेहनत से नोएडा में 1 करोड़ का फ्लैट भी खरीदा था, जिसे वह रेखा को तोहफे में देना चाहता था.

साल 2019 का वो हादसा और बदलती किस्मत
इस प्रेम कहानी में पहला काला अध्याय 2019 में आया. नोएडा के सेक्टर-107 में सुमित का एक भीषण रोड एक्सीडेंट हुआ. डॉक्टरों ने कह दिया कि वह अब कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएगा. इस हादसे के बाद सुमित करियर और सपने दोनों चकनाचूर हो गए, लेकिन रेखा की मोहब्बत नहीं डगमगाई. वह अस्पताल से लेकर घर तक साये की तरह सुमित के साथ रही. 7 महीनों की रिकवरी के दौरान ही दोनों परिवारों को उनके रिश्ते की गहराई का अहसास हुआ. यही वो दौर था जब दोनों के परिवारों को उनके रिश्ते की गहराई का पता चला.

सुमित के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रेखा का परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था. बाधा सिर्फ करियर की नहीं थी, बाधा थी ‘बिरादरी’ की. सुमित वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखता था और रेखा कायस्थ परिवार से. ऊंची जाति की लड़की पिछड़ी जाति के लड़के को कैसे दी जाए? इस एक सवाल ने सालों पुराने प्यार पर पहरा बिठा दिया. रेखा के परिवार ने उस पर दबाव बनाना शुरू किया. सुमित के भाई सचिन का आरोप है कि रेखा के परिजनों ने सुमित को धमकाना शुरू कर दिया था. उन्हें डर था कि ‘नीची जाति’ के लड़के से शादी करने पर समाज में उनकी प्रतिष्ठा धूल में मिल जाएगी.

पुलिस केस की धमकी और वो ‘एक साल पुराना नोट’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत में विवाद इतना बढ़ गया कि रेखा के चचेरे भाई ने सुमित को पकड़ लिया और उस पर छेड़खानी का केस दर्ज कराने की धमकी दी. पुलिस की छानबीन में सुमित की हैंडराइटिंग में लिखा एक साल पुराना नोट मिला है, जो इस कहानी के दर्द को बयां करता है. सुमित ने लिखा था,

रेखा से मेरा कोई संबंध नहीं है. अगर मैं उसके साथ किसी भी तरह की छेड़खानी करूं या उसे परेशान करूं, तो मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इसका जिम्मेदार मैं खुद होऊंगा.

यह नोट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं था, बल्कि उस दबाव का सबूत था जो सुमित पर बनाया गया था. सुमित ने सोशल मीडिया चैट पर भी रेखा के परिवार से माफी मांगी थी, जिसमें वह गिड़गिड़ा रहा था कि प्लीज शिकायत मत करना, मैं अब नहीं मिलूंगा. इसके बाद रेखा ने भी सुमित के फोन उठाने कम कर दिए थे, लेकिन अंदर ही अंदर दोनों इस अलगाव से टूट रहे थे. सुमित ने रेखा के लिए नोएडा में 1 करोड़ का फ्लैट खरीदा था, वह उसे खुश रखने के लिए महंगे गिफ्ट देता था, लेकिन समाज की बेड़ियां इन सबसे कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुईं.

13 फरवरी की वो आखिरी शाम
भले ही दुनिया के सामने उन्होंने मिलना बंद कर दिया था, लेकिन उनके दिल की डोर अभी भी जुड़ी थी. 13 फरवरी की दोपहर 3 बजे सुमित अपनी सफेद कार लेकर निकला. 3:39 पर उसने रेखा को मैसेज किया, ‘मैं मरने जा रहा हूं.’ घबराकर रेखा ने उसे कॉल किया और ऑफिस के बाहर मिलने बुलाया. वह सुमित को समझाने के लिए कार में बैठी, लेकिन शायद सुमित ने फैसला कर लिया था. शाम 6 बजे जब रेखा घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने तलाश शुरू की. सुमित का फोन बंद था, जबकि रेखा का फोन 14 फरवरी की सुबह तक ऑन था लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था. सेक्टर-58 पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.

लावारिस कार…अंदर दो लाशें
14 फरवरी की दोपहर सेक्टर-39 पुलिस को सूचना मिली कि एक सफेद कार सुनसान जगह पर लावारिस हालत में खड़ी है. पुलिस मौके पर पहुंची और जब पुलिस ने शीशा तोड़ा, तो अंदर का मंजर भयानक था. सुमित के हाथ में पिस्टल थी और दोनों के सिर में गोलियां लगी थीं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक सबूत इशारा करते हैं कि सुमित ने पहले रेखा को गोली मारी और फिर खुद को खत्म कर लिया. कार के अंदर से दो खोखे बरामद हुए हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सेक्टर-107 में कभी सुमित का एक्सीडेंट हुआ था, उसी के पास उनकी लाशें मिलीं.

अधूरे सपने और खाली पड़ा फ्लैट
सुमित का अंतिम संस्कार दिल्ली में हुआ, जबकि रेखा का नोएडा के सेक्टर-94 में. जिस प्यार को सात जन्मों का साथ निभाना था, वह जातिवादी सोच और ईगो की भेंट चढ़ गया. सुमित ने रेखा को गिफ्ट देने के लिए जो एक करोड़ का फ्लैट लिया था, वह आज खाली पड़ा है और वह हाथ जिसने कभी मैदान पर बल्ला थामा था, वह पिस्टल थामकर मौत का सौदागर बन गया.

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