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भाजपा नेता अक्षय बम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत:हत्या के प्रयास का आरोप हटा, पिता को भी राहत; दो साल पहले जुड़ी थी धारा

भाजपा नेता अक्षय बम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत:हत्या के प्रयास का आरोप हटा, पिता को भी राहत; दो साल पहले जुड़ी थी धारा

इंदौर के भाजपा नेता अक्षय बम और उनके पिता कांतिलाल बम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने बहुचर्चित इस केस में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) को हटाने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दोनों इस गंभीर आरोप से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए धारा 307 हटाने का महत्वपूर्ण निर्णय दिया। साथ ही पिता-पुत्र के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप समाप्त हो गया। यह प्रकरण 4 अक्टूबर 2007 की एक घटना से संबंधित है। उस समय दर्ज मामले में हत्या के प्रयास की धारा शामिल नहीं थी। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस मामले में धारा 307 और धारा 149 जोड़ने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे सेशन कोर्ट और बाद में हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। राजनीतिक साजिश के आरोप अक्षय बम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश के तहत सामने लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन पर दबाव बनाकर मामला आगे बढ़ाया गया, जिससे उन्हें चुनावी प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ा। हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने पहले बम की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में बंदूक के उपयोग और गोली चलाने के आरोपों के आधार पर धारा 307 और 149 के तहत ट्रायल उचित है। शपथपत्र बना विवाद का केंद्र मामले में उस समय नया मोड़ आया जब अक्षय बम द्वारा दायर एक शपथपत्र में राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए गए। बाद में यह शपथपत्र विवाद का कारण बना और बम ने अपनी पुरानी याचिका वापस लेकर नए सिरे से संशोधित याचिका दायर की। दो साल बाद मिली राहत करीब दो वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस बहुचर्चित मामले को नया मोड़ दिया है। धारा 307 हटने के साथ ही बम परिवार को बड़ी राहत मिली है और लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लग गया है।

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