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विदिशा में सिंचाई नहर पर कब्जा, 11 को नोटिस:उद्वहन योजना पर अतिक्रमण, बन गए मकान और कॉलोनियां; कांग्रेस ने उठाए सवाल

विदिशा में सिंचाई नहर पर कब्जा, 11 को नोटिस:उद्वहन योजना पर अतिक्रमण, बन गए मकान और कॉलोनियां; कांग्रेस ने उठाए सवाल

विदिशा जिले में दशकों पुरानी उद्वहन सिंचाई योजना की नहर पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। किसानों के लिए बनाई गई यह नहर अब जमीन से लगभग गायब हो चुकी है। जहां कभी पानी बहता था, वहां अब पक्के निर्माण और कॉलोनियां बन गई हैं। मामले में राजस्व विभाग ने 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, दौलतपुरा और मदनखेड़ा क्षेत्र में वर्षों पहले बनाई गई इस नहर का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना था। वर्तमान में नहर का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है और मौके पर केवल जर्जर संरचनाएं ही बची हैं। जहां पहले पानी बहता था, वहां अब कंक्रीट निर्माण हो चुके हैं। कई स्थानों पर कॉलोनियां विकसित हो गई हैं, जिससे योजना का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। मशीनरी जर्जर, उपकरण भी गायब बेतवा घाट के पास लगी सिंचाई मशीनरी खराब हालत में है। कई उपकरण अनुपयोगी हो चुके हैं, जबकि कुछ के चोरी होने की आशंका भी जताई जा रही है। मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है और नहर की जमीन पर कब्जा होना गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार यह योजना 40-50 साल पुरानी है, जिसके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच के आधार पर आगे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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विदिशा में सिंचाई नहर पर कब्जा, 11 को नोटिस:उद्वहन योजना पर अतिक्रमण, बन गए मकान और कॉलोनियां; कांग्रेस ने उठाए सवाल

विदिशा जिले में दशकों पुरानी उद्वहन सिंचाई योजना की नहर पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। किसानों के लिए बनाई गई यह नहर अब जमीन से लगभग गायब हो चुकी है। जहां कभी पानी बहता था, वहां अब पक्के निर्माण और कॉलोनियां बन गई हैं। मामले में राजस्व विभाग ने 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, दौलतपुरा और मदनखेड़ा क्षेत्र में वर्षों पहले बनाई गई इस नहर का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना था। वर्तमान में नहर का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है और मौके पर केवल जर्जर संरचनाएं ही बची हैं। जहां पहले पानी बहता था, वहां अब कंक्रीट निर्माण हो चुके हैं। कई स्थानों पर कॉलोनियां विकसित हो गई हैं, जिससे योजना का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। मशीनरी जर्जर, उपकरण भी गायब बेतवा घाट के पास लगी सिंचाई मशीनरी खराब हालत में है। कई उपकरण अनुपयोगी हो चुके हैं, जबकि कुछ के चोरी होने की आशंका भी जताई जा रही है। मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है और नहर की जमीन पर कब्जा होना गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार यह योजना 40-50 साल पुरानी है, जिसके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच के आधार पर आगे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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