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जब नहीं थे AC-कूलर…तब खुद को ऐसे ठंडा रखते थे राजा-महाराजा, गर्मी से बचने का शाही नुस्खा

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Khandwa News: डॉक्टर अनिल पटेल ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि इन तीनों चीजों का सेवन करने का पारंपरिक तरीका बहुत आसान है. रात में एक गिलास पानी में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री को भिगो दें. सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. इससे शरीर को ठंडक मिलेगी और दिनभर ऊर्जा बनी रहेगी.

खंडवा. गर्मियों का मौसम तेजी से बढ़ रहा है और तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसे में शरीर को ठंडक और ऊर्जा बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आज भले ही लोग एसी, कूलर और कोल्ड ड्रिंक का सहारा लेते हैं लेकिन पुराने समय में राजा-महाराजा प्राकृतिक और आयुर्वेदिक नुस्खों से ही खुद को ठंडा और स्वस्थ रखते थे. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपायों में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री का खास महत्व रहा है. ये नुस्खे सदियों से शरीर को ठंडक देने, हाइड्रेट रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं. आज भी ये देसी उपाय गर्मी से राहत देने में बेहद कारगर माने जाते हैं. गोंद कतिरा गर्मियों में एक प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है. यह पेड़ों से निकलने वाला गोंद होता है, जो पानी में भिगोने पर फूलकर जेली जैसा बन जाता है. इसका सेवन शरीर को अंदर से ठंडक देता है और लू, डिहाइड्रेशन और अधिक पसीने से होने वाली कमजोरी से बचाव में मदद करता है. साथ ही यह त्वचा को नमी प्रदान करता है, जिससे गर्मियों में होने वाली जलन, रूखापन और घमौरियों की समस्या कम हो सकती है.

वहीं बावची को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है. इसके बीजों में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ताकत देता है और गर्मी से होने वाली थकान को कम करता है. धागे वाली मिश्री भी इस पारंपरिक नुस्खे का अहम हिस्सा है. यह सामान्य चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने और हल्की ठंडक बनाए रखने में मदद करते हैं.

सेवन का आसान पारंपरिक तरीका
खंडवा निवासी डॉक्टर अनिल पटेल ने लोकल 18 से कहा कि इन तीनों चीजों का सेवन करने का पारंपरिक तरीका बेहद आसान है. रात में एक गिलास पानी में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री को भिगो दिया जाता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. इसे एक तरह का प्राकृतिक टॉनिक भी माना जाता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. गर्मियों में इस तरह के प्राकृतिक और संतुलित नुस्खे अपनाने से शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के राहत मिलती है. हालांकि किसी भी चीज का सेवन सीमित मात्रा में और सही सलाह के साथ ही करना चाहिए.

शाही और पारंपरिक नुस्खे आज भी उतने ही असरदार हैं, जितने सदियों पहले थे. अगर आप भी गर्मी से बचना चाहते हैं, तो इन प्राकृतिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं और बिना एसी के भी ठंडक का अहसास पा सकते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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खंडवा. गर्मियों का मौसम तेजी से बढ़ रहा है और तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसे में शरीर को ठंडक और ऊर्जा बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आज भले ही लोग एसी, कूलर और कोल्ड ड्रिंक का सहारा लेते हैं लेकिन पुराने समय में राजा-महाराजा प्राकृतिक और आयुर्वेदिक नुस्खों से ही खुद को ठंडा और स्वस्थ रखते थे. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपायों में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री का खास महत्व रहा है. ये नुस्खे सदियों से शरीर को ठंडक देने, हाइड्रेट रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं. आज भी ये देसी उपाय गर्मी से राहत देने में बेहद कारगर माने जाते हैं. गोंद कतिरा गर्मियों में एक प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है. यह पेड़ों से निकलने वाला गोंद होता है, जो पानी में भिगोने पर फूलकर जेली जैसा बन जाता है. इसका सेवन शरीर को अंदर से ठंडक देता है और लू, डिहाइड्रेशन और अधिक पसीने से होने वाली कमजोरी से बचाव में मदद करता है. साथ ही यह त्वचा को नमी प्रदान करता है, जिससे गर्मियों में होने वाली जलन, रूखापन और घमौरियों की समस्या कम हो सकती है.

वहीं बावची को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है. इसके बीजों में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ताकत देता है और गर्मी से होने वाली थकान को कम करता है. धागे वाली मिश्री भी इस पारंपरिक नुस्खे का अहम हिस्सा है. यह सामान्य चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने और हल्की ठंडक बनाए रखने में मदद करते हैं.

सेवन का आसान पारंपरिक तरीका
खंडवा निवासी डॉक्टर अनिल पटेल ने लोकल 18 से कहा कि इन तीनों चीजों का सेवन करने का पारंपरिक तरीका बेहद आसान है. रात में एक गिलास पानी में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री को भिगो दिया जाता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. इसे एक तरह का प्राकृतिक टॉनिक भी माना जाता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. गर्मियों में इस तरह के प्राकृतिक और संतुलित नुस्खे अपनाने से शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के राहत मिलती है. हालांकि किसी भी चीज का सेवन सीमित मात्रा में और सही सलाह के साथ ही करना चाहिए.

शाही और पारंपरिक नुस्खे आज भी उतने ही असरदार हैं, जितने सदियों पहले थे. अगर आप भी गर्मी से बचना चाहते हैं, तो इन प्राकृतिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं और बिना एसी के भी ठंडक का अहसास पा सकते हैं.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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