ग्वालियर में महापौर निधि पर रोक को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश करते हुए इस रोक को पूरी तरह वैध बताया है। मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 2 मार्च को जारी आदेश में केवल महापौर निधि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि नगर निगम अधिनियम में महापौर निधि का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसलिए इस पर रोक लगाना पूरी तरह कानूनी है। महापौर की ओर से दायर याचिका में इस आदेश को भेदभावपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया गया है। इसमें सवाल उठाया गया है कि जब सभापति और पार्षद निधि जारी रखी गई हैं, तो केवल महापौर निधि पर ही रोक क्यों लगाई गई। महापौर ने 2 मार्च के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की है। अब 6 मई को होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद में अहम मानी जा रही है, जहां कोर्ट का रुख आगे की दिशा तय करेगा। याचिका में तीन मुख्य आपत्तियां रखी गई हैं














































