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मोटापे की ये कैसी आहट, 14 में से 1 बच्चे का भी वजन कर रहा लिमिट क्रॉस, क्या होगा इसका परिणाम

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भारत में डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारियों को लेकर चिंता पहले से बनी हुई है, लेकिन अब एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है. मोटापा अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्कूल जाने वाले लगभग हर 14 में से 1 बच्चे का वजन सामान्य सीमा से ज्यादा है. यानी बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र में ही मोटापे की चपेट में आ रहे हैं. यह सिर्फ दिखने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है.

TOI में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जीवनशैली पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है. पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दौड़ते थे और ज्यादा एक्टिव रहते थे. अब उनका समय मोबाइल, टीवी, टैबलेट और वीडियो गेम में ज्यादा बीतता है. घंटों स्क्रीन के सामने बैठने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न नहीं होती और वजन बढ़ने लगता है.

खानपान भी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुका है. आजकल बच्चों को घर के ताजे खाने से ज्यादा पैकेट वाले स्नैक्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और मीठे ड्रिंक्स पसंद आने लगे हैं. इनमें कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन जरूरी पोषण कम मिलता है. बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, मीठी चीजें ज्यादा लेना और समय पर भोजन न करना भी वजन बढ़ाने का कारण बनता है. कम नींद और पढ़ाई का दबाव भी बच्चों की सेहत पर असर डाल रहा है. कई बच्चे देर रात तक जागते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं और पूरा आराम नहीं कर पाते. नींद पूरी न होने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख ज्यादा लग सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है. पढ़ाई और कोचिंग के कारण खेलकूद का समय भी कम हो गया है.

डॉक्टरों के अनुसार, बचपन का मोटापा आगे चलकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकता है. ज्यादा वजन वाले बच्चों में कम उम्र में ही ब्लड शुगर बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, सांस फूलना, घुटनों पर दबाव और हार्मोनल गड़बड़ी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. यही बच्चे बड़े होकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार हो सकते हैं. यह समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है. बाहर का खाना, कम खेलकूद और ज्यादा स्क्रीन टाइम हर जगह आम होता जा रहा है. इसलिए मोटापा अब देशभर में बढ़ती चुनौती बन गया है.

इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों की दिनचर्या सुधारी जाए. रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल या फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है. घर का ताजा खाना, फल, सब्जियां, दाल, दूध और प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा दें. मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और जंक फूड सीमित करें. साथ ही बच्चों की नींद पूरी हो, यह भी ध्यान रखें. माता-पिता की भूमिका भी बहुत अहम है. अगर घर में सभी हेल्दी खानपान अपनाएंगे और एक्टिव रहेंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे. उन्हें डांटने के बजाय प्यार से सही आदतें सिखाना जरूरी है.

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भारत में डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारियों को लेकर चिंता पहले से बनी हुई है, लेकिन अब एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है. मोटापा अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्कूल जाने वाले लगभग हर 14 में से 1 बच्चे का वजन सामान्य सीमा से ज्यादा है. यानी बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र में ही मोटापे की चपेट में आ रहे हैं. यह सिर्फ दिखने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है.

TOI में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जीवनशैली पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है. पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दौड़ते थे और ज्यादा एक्टिव रहते थे. अब उनका समय मोबाइल, टीवी, टैबलेट और वीडियो गेम में ज्यादा बीतता है. घंटों स्क्रीन के सामने बैठने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न नहीं होती और वजन बढ़ने लगता है.

खानपान भी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुका है. आजकल बच्चों को घर के ताजे खाने से ज्यादा पैकेट वाले स्नैक्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और मीठे ड्रिंक्स पसंद आने लगे हैं. इनमें कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन जरूरी पोषण कम मिलता है. बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, मीठी चीजें ज्यादा लेना और समय पर भोजन न करना भी वजन बढ़ाने का कारण बनता है. कम नींद और पढ़ाई का दबाव भी बच्चों की सेहत पर असर डाल रहा है. कई बच्चे देर रात तक जागते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं और पूरा आराम नहीं कर पाते. नींद पूरी न होने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख ज्यादा लग सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है. पढ़ाई और कोचिंग के कारण खेलकूद का समय भी कम हो गया है.

डॉक्टरों के अनुसार, बचपन का मोटापा आगे चलकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकता है. ज्यादा वजन वाले बच्चों में कम उम्र में ही ब्लड शुगर बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, सांस फूलना, घुटनों पर दबाव और हार्मोनल गड़बड़ी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. यही बच्चे बड़े होकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार हो सकते हैं. यह समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है. बाहर का खाना, कम खेलकूद और ज्यादा स्क्रीन टाइम हर जगह आम होता जा रहा है. इसलिए मोटापा अब देशभर में बढ़ती चुनौती बन गया है.

इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों की दिनचर्या सुधारी जाए. रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल या फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है. घर का ताजा खाना, फल, सब्जियां, दाल, दूध और प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा दें. मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और जंक फूड सीमित करें. साथ ही बच्चों की नींद पूरी हो, यह भी ध्यान रखें. माता-पिता की भूमिका भी बहुत अहम है. अगर घर में सभी हेल्दी खानपान अपनाएंगे और एक्टिव रहेंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे. उन्हें डांटने के बजाय प्यार से सही आदतें सिखाना जरूरी है.

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