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Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case

Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case
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  • Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case | Supreme Court ED Debate, Arrest Question

नई दिल्ली6 मिनट पहले

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अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 40,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पूछा कि जब सेबी (SEBI) खुद अनिल अंबानी को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बता चुकी है, तो फिर उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

इस सवाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच एजेंसियां इस बात का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं कि उन्होंने किसी ‘X’ या ‘Y’ व्यक्ति को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया।

एजेंसियों ने दर्ज कीं दो नई FIR

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि जांच के दौरान कुछ नए सबूत मिलने के बाद एजेंसियों ने 2 नई FIR दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और वे व्यक्तिगत गिरफ्तारी के सवालों पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।

इससे पहले प्रशांत भूषण ने तर्क दिया था कि ED ने इस मामले में कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अनिल अंबानी पर अब तक वैसी कार्रवाई नहीं हुई है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

40,000 करोड़ के फ्रॉड की जांच, 8 मई को अगली सुनवाई

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अब इस मामले को 8 मई के लिए टाल दिया है। उस दिन ED और CBI द्वारा दाखिल की गई नई ‘स्टेटस रिपोर्ट’ पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आगे कोई भी निर्देश जारी करने से पहले इन जांच एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्ट देखना चाहता है।

2,983 करोड़ का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ में सेटल हुआ

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ED की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए हैरानी जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों का 2,983 करोड़ रुपए का कर्ज इन्सॉल्वेंसी (दिवाला) प्रक्रिया के दौरान महज 26 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया गया था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि इन अधिग्रहणों को 8 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने “प्रोजेक्ट हेल्प” के जरिए सुगम बनाया था।

IBC प्रक्रिया के दुरुपयोग पर CJI की चिंता

सीजेआई सूर्यकांत ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) प्रक्रिया के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं जहां दिवालिया कंपनियां अपनी संपत्तियों को अपने ही परिवार के सदस्यों या दोस्तों को बहुत कम कीमतों पर नीलाम कर देती हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए एजेंसियों को तेजी से जांच करने के निर्देश दिए।

₹584 करोड़ का कर्ज ₹85 करोड़ में निपटाया

सुनवाई के दौरान एक लेनदार के वकील ने एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि एक पूरी तरह सक्षम कंपनी जो हर महीने 8.5 करोड़ रुपए का टोल वसूल रही थी, उसने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया।

बाद में उस कंपनी का 584 करोड़ रुपए का कर्ज महज 85 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया। इस तरह कंपनी कर्जमुक्त होकर बाहर आ गई और कर्ज देने वालों को भारी नुकसान हुआ। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच से जुड़ा कोई भी ऐसा सबूत है, तो एजेंसियां उसे संज्ञान में लें।

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अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 40,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पूछा कि जब सेबी (SEBI) खुद अनिल अंबानी को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बता चुकी है, तो फिर उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

इस सवाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच एजेंसियां इस बात का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं कि उन्होंने किसी ‘X’ या ‘Y’ व्यक्ति को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया।

एजेंसियों ने दर्ज कीं दो नई FIR

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि जांच के दौरान कुछ नए सबूत मिलने के बाद एजेंसियों ने 2 नई FIR दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और वे व्यक्तिगत गिरफ्तारी के सवालों पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।

इससे पहले प्रशांत भूषण ने तर्क दिया था कि ED ने इस मामले में कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अनिल अंबानी पर अब तक वैसी कार्रवाई नहीं हुई है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

40,000 करोड़ के फ्रॉड की जांच, 8 मई को अगली सुनवाई

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अब इस मामले को 8 मई के लिए टाल दिया है। उस दिन ED और CBI द्वारा दाखिल की गई नई ‘स्टेटस रिपोर्ट’ पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आगे कोई भी निर्देश जारी करने से पहले इन जांच एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्ट देखना चाहता है।

2,983 करोड़ का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ में सेटल हुआ

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ED की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए हैरानी जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों का 2,983 करोड़ रुपए का कर्ज इन्सॉल्वेंसी (दिवाला) प्रक्रिया के दौरान महज 26 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया गया था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि इन अधिग्रहणों को 8 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने “प्रोजेक्ट हेल्प” के जरिए सुगम बनाया था।

IBC प्रक्रिया के दुरुपयोग पर CJI की चिंता

सीजेआई सूर्यकांत ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) प्रक्रिया के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं जहां दिवालिया कंपनियां अपनी संपत्तियों को अपने ही परिवार के सदस्यों या दोस्तों को बहुत कम कीमतों पर नीलाम कर देती हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए एजेंसियों को तेजी से जांच करने के निर्देश दिए।

₹584 करोड़ का कर्ज ₹85 करोड़ में निपटाया

सुनवाई के दौरान एक लेनदार के वकील ने एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि एक पूरी तरह सक्षम कंपनी जो हर महीने 8.5 करोड़ रुपए का टोल वसूल रही थी, उसने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया।

बाद में उस कंपनी का 584 करोड़ रुपए का कर्ज महज 85 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया। इस तरह कंपनी कर्जमुक्त होकर बाहर आ गई और कर्ज देने वालों को भारी नुकसान हुआ। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच से जुड़ा कोई भी ऐसा सबूत है, तो एजेंसियां उसे संज्ञान में लें।

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