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New Online Gaming Rules Come into Effect Today; Gaming Certificates to Remain Valid for Up to 10 Years; Non-Money Games Now Exempt from Registration

New Online Gaming Rules Come into Effect Today; Gaming Certificates to Remain Valid for Up to 10 Years; Non-Money Games Now Exempt from Registration
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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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देश में ऑनलाइन गेमिंग की इंडस्ट्री में आज से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026 शुक्रवार, 1 मई 2026 से लागू कर दिए हैं।

इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन मनी गेमिंग से होने वाले वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकना और भारत को ग्लोबल गेमिंग हब बनाना है।

ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन, विज्ञापन भी नहीं कर पाएंगे

नए नियमों के तहत सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। इसमें किस्मत पर आधारित (चांस) और कौशल पर आधारित (स्किल) दोनों तरह के गेम्स शामिल हैं, जिनमें पैसे का दांव लगाया जाता है।

अब इन गेम्स का विज्ञापन या प्रमोशन करना भी गैरकानूनी होगा। बैंकों और पेमेंट गेटवे को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे प्लेटफॉर्म्स के ट्रांजैक्शन प्रोसेस न करें।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और 5 साल तक की जेल

  • सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है।
  • ऑनलाइन मनी गेम ऑफर करने पर 3 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
  • दोबारा अपराध करने पर जेल की अवधि 5 साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना 2 करोड़ रुपए तक लग सकता है।
  • इन गेम्स का विज्ञापन करने पर भी 2 साल की जेल या 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

45 करोड़ लोग प्रभावित, 20 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान

  • भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ा है और 2024 में यह 232 अरब रुपए यानी 23,200 करोड़ रुपए का था।
  • डेटा के मुताबिक, देश के लगभग 45 करोड़ लोग मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से प्रभावित हुए हैं, जिसमें लोगों को 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
  • इसी को देखते हुए सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स (मनोरंजन वाले खेल) को बढ़ावा देने और मनी गेम्स को खत्म करने का फैसला लिया है।

अब ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया रखेगी नजर

नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन किया गया है।

  • डिजिटल ऑफिस: ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का ऑफिस दिल्ली में होगा, यह एक डिजिटल-फर्स्ट रेगुलेटर है।
  • डिसिजन मेकिंग प्रोसेस: यह अथॉरिटी 90 दिनों के भीतर तय करेगी कि कोई गेम ‘मनी गेम’ की कैटेगरी में है या वह ‘ई-स्पोर्ट्स’ के रूप में सुरक्षित है।
  • रजिस्ट्रेशन: ई-स्पोर्ट्स के लिए अब 10 साल तक का डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। पहले सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 साल रहती थी।
  • शिकायत निवारण: यूजर्स की शिकायतों के लिए दो-स्तरीय सिस्टम होगा। अगर कंपनी समाधान नहीं करती, तो यूजर अथॉरिटी के पास अपील कर सकेंगे।

युवाओं की सुरक्षा के लिए एज गेटिंग और पेरेंटल कंट्रोल

डिजिटल माहौल को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों को अब कई सेफ्टी फीचर्स देने होंगे। इनमें उम्र का वेरिफिकेशन, समय की पाबंदी और माता-पिता के लिए कंट्रोल टूल्स (पेरेंटल कंट्रोल) शामिल हैं। इससे युवाओं को लत और मानसिक तनाव से बचाने में मदद मिलेगी।

गेम्स का क्लासिफिकेशन तीन तरीके से होगा

गेम्स को किस कैटेगरी में रखा जाए, इसके लिए अथॉरिटी ने तीन रास्ते तय किए हैं…

  • सुओ मोटो: अथॉरिटी खुद किसी गेम का रिव्यू कर उसे क्लासिफाई कर सकती है।
  • ई-स्पोर्ट्स बॉडीज: ई-स्पोर्ट्स से जुड़ी इंस्टीट्यूशंस खुद आवेदन कर सकती हैं।
  • केंद्र सरकार: सरकार स्पेसिफिक सोशल गेम्स को नोटिफाई कर सकती है।

किसी भी गेम के क्लासिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है। अब हर गेम के लिए मैंडेटरी डिटरमिनेशन की जरूरत नहीं होगी।

यूजर सेफ्टी के लिए टू-टियर सिस्टम

  • सरकार ने गेम खेलने वालों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के निपटारे के लिए टू-टियर ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।
  • इसके अलावा गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को डेटा रिटेंशन (डेटा संभाल कर रखना) और समय-समय पर कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • गृह मंत्रालय को भी इस अथॉरिटी का हिस्सा बनाया गया है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले गेम्स को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई की जा सके।

प्रमोशन और रिफंड के नियमों में बदलाव

नई गाइडलाइंस से गेम प्रमोशन से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं के हिसाब से प्रमोशन स्कीम डिजाइन कर सकेंगे। मटेरियल चेंज के कॉन्सेप्ट को भी हटा दिया है, ताकि कंपनियों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति न बने। रिफंड से जुड़े नियमों को भी हटाया गया है, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस समस्या का समाधान पहले ही हो चुका है।

भविष्य की राह, डिजिटल इकोनॉमी और नए रोजगार

सरकार का मानना है कि इन नियमों से भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। ई-स्पोर्ट्स और सुरक्षित सोशल गेम्स के बढ़ने से डिजाइन, टेक्नोलॉजी और कंटेंट क्रिएशन के सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 2027 तक इस सेक्टर के 316 अरब रुपए यानी 31,600 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

2,500 स्टेकहोल्डर्स से ली गई राय

इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने इंडस्ट्री बॉडीज, कानून की जानकारी रखने वाली फर्म्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स सहित करीब 2,500 लोगों से सुझाव लिए थे।

स्टेकहोल्डर्स ने गेमिंग की परिभाषा को स्पष्ट करने और अथॉरिटी के स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की सलाह दी थी, जिन्हें नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है।

क्या है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया?

ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) एक छह सदस्यीय टीम होगी। इसमें आईटी मंत्रालय के अलावा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

इसका मुख्य काम भारत में चल रहे गेम्स की निगरानी करना, उनके क्लासिफिकेशन को तय करना और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ई-स्पोर्ट्स क्या है?

यह एक कॉम्पिटिटिव डिजिटल स्पोर्ट्स है जिसमें टीम वर्क और स्किल की जरूरत होती है। इसे अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत पहचान मिल सकती है।

क्या करें अगर कोई प्लेटफॉर्म पैसा मांगे?

ऐसे प्लेटफॉर्म्स की शिकायत तुरंत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी’ या साइबर सेल में करें, क्योंकि भारत में ऑनलाइन मनी ट्रांजैक्शन वाले गेम्स अब बैन हैं।

ये खबर भी पढ़ें…

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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देश में ऑनलाइन गेमिंग की इंडस्ट्री में आज से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026 शुक्रवार, 1 मई 2026 से लागू कर दिए हैं।

इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन मनी गेमिंग से होने वाले वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकना और भारत को ग्लोबल गेमिंग हब बनाना है।

ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन, विज्ञापन भी नहीं कर पाएंगे

नए नियमों के तहत सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। इसमें किस्मत पर आधारित (चांस) और कौशल पर आधारित (स्किल) दोनों तरह के गेम्स शामिल हैं, जिनमें पैसे का दांव लगाया जाता है।

अब इन गेम्स का विज्ञापन या प्रमोशन करना भी गैरकानूनी होगा। बैंकों और पेमेंट गेटवे को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे प्लेटफॉर्म्स के ट्रांजैक्शन प्रोसेस न करें।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और 5 साल तक की जेल

  • सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है।
  • ऑनलाइन मनी गेम ऑफर करने पर 3 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
  • दोबारा अपराध करने पर जेल की अवधि 5 साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना 2 करोड़ रुपए तक लग सकता है।
  • इन गेम्स का विज्ञापन करने पर भी 2 साल की जेल या 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

45 करोड़ लोग प्रभावित, 20 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान

  • भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ा है और 2024 में यह 232 अरब रुपए यानी 23,200 करोड़ रुपए का था।
  • डेटा के मुताबिक, देश के लगभग 45 करोड़ लोग मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से प्रभावित हुए हैं, जिसमें लोगों को 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
  • इसी को देखते हुए सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स (मनोरंजन वाले खेल) को बढ़ावा देने और मनी गेम्स को खत्म करने का फैसला लिया है।

अब ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया रखेगी नजर

नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन किया गया है।

  • डिजिटल ऑफिस: ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का ऑफिस दिल्ली में होगा, यह एक डिजिटल-फर्स्ट रेगुलेटर है।
  • डिसिजन मेकिंग प्रोसेस: यह अथॉरिटी 90 दिनों के भीतर तय करेगी कि कोई गेम ‘मनी गेम’ की कैटेगरी में है या वह ‘ई-स्पोर्ट्स’ के रूप में सुरक्षित है।
  • रजिस्ट्रेशन: ई-स्पोर्ट्स के लिए अब 10 साल तक का डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। पहले सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 साल रहती थी।
  • शिकायत निवारण: यूजर्स की शिकायतों के लिए दो-स्तरीय सिस्टम होगा। अगर कंपनी समाधान नहीं करती, तो यूजर अथॉरिटी के पास अपील कर सकेंगे।

युवाओं की सुरक्षा के लिए एज गेटिंग और पेरेंटल कंट्रोल

डिजिटल माहौल को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों को अब कई सेफ्टी फीचर्स देने होंगे। इनमें उम्र का वेरिफिकेशन, समय की पाबंदी और माता-पिता के लिए कंट्रोल टूल्स (पेरेंटल कंट्रोल) शामिल हैं। इससे युवाओं को लत और मानसिक तनाव से बचाने में मदद मिलेगी।

गेम्स का क्लासिफिकेशन तीन तरीके से होगा

गेम्स को किस कैटेगरी में रखा जाए, इसके लिए अथॉरिटी ने तीन रास्ते तय किए हैं…

  • सुओ मोटो: अथॉरिटी खुद किसी गेम का रिव्यू कर उसे क्लासिफाई कर सकती है।
  • ई-स्पोर्ट्स बॉडीज: ई-स्पोर्ट्स से जुड़ी इंस्टीट्यूशंस खुद आवेदन कर सकती हैं।
  • केंद्र सरकार: सरकार स्पेसिफिक सोशल गेम्स को नोटिफाई कर सकती है।

किसी भी गेम के क्लासिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है। अब हर गेम के लिए मैंडेटरी डिटरमिनेशन की जरूरत नहीं होगी।

यूजर सेफ्टी के लिए टू-टियर सिस्टम

  • सरकार ने गेम खेलने वालों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के निपटारे के लिए टू-टियर ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।
  • इसके अलावा गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को डेटा रिटेंशन (डेटा संभाल कर रखना) और समय-समय पर कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • गृह मंत्रालय को भी इस अथॉरिटी का हिस्सा बनाया गया है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले गेम्स को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई की जा सके।

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नई गाइडलाइंस से गेम प्रमोशन से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं के हिसाब से प्रमोशन स्कीम डिजाइन कर सकेंगे। मटेरियल चेंज के कॉन्सेप्ट को भी हटा दिया है, ताकि कंपनियों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति न बने। रिफंड से जुड़े नियमों को भी हटाया गया है, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस समस्या का समाधान पहले ही हो चुका है।

भविष्य की राह, डिजिटल इकोनॉमी और नए रोजगार

सरकार का मानना है कि इन नियमों से भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। ई-स्पोर्ट्स और सुरक्षित सोशल गेम्स के बढ़ने से डिजाइन, टेक्नोलॉजी और कंटेंट क्रिएशन के सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 2027 तक इस सेक्टर के 316 अरब रुपए यानी 31,600 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

2,500 स्टेकहोल्डर्स से ली गई राय

इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने इंडस्ट्री बॉडीज, कानून की जानकारी रखने वाली फर्म्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स सहित करीब 2,500 लोगों से सुझाव लिए थे।

स्टेकहोल्डर्स ने गेमिंग की परिभाषा को स्पष्ट करने और अथॉरिटी के स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की सलाह दी थी, जिन्हें नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है।

क्या है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया?

ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) एक छह सदस्यीय टीम होगी। इसमें आईटी मंत्रालय के अलावा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

इसका मुख्य काम भारत में चल रहे गेम्स की निगरानी करना, उनके क्लासिफिकेशन को तय करना और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ई-स्पोर्ट्स क्या है?

यह एक कॉम्पिटिटिव डिजिटल स्पोर्ट्स है जिसमें टीम वर्क और स्किल की जरूरत होती है। इसे अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत पहचान मिल सकती है।

क्या करें अगर कोई प्लेटफॉर्म पैसा मांगे?

ऐसे प्लेटफॉर्म्स की शिकायत तुरंत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी’ या साइबर सेल में करें, क्योंकि भारत में ऑनलाइन मनी ट्रांजैक्शन वाले गेम्स अब बैन हैं।

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