भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।
















































