Friday, 19 Jun 2026 | 05:03 AM

Trending :

EXCLUSIVE

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
टीकमगढ़ में तेज आंधी-बारिश के साथ गिरे ओले:एसपी दफ्तर-कलेक्ट्रेट में पेड़ गिरे; विवाह घर की दीवार क्षतिग्रस्त

April 30, 2026/
5:57 pm

टीकमगढ़ में गुरुवार शाम करीब 4 बजे मौसम में अचानक बदलाव आया। तेज आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो...

उज्जैन में नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म:75 वर्षीय बुजुर्ग ने घर में दी जगह, घर के बाहर देता रहा पहरा; युवक ने वीडियो बनाया

March 30, 2026/
12:06 pm

​उज्जैन से 75 किमी दूर झारड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव में 11 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दो नाबालिग...

इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:पीडब्ल्यूडी के दो अधिकारी 90 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार; भुगतान के बदले मांगे थे कमीशन

April 7, 2026/
11:32 pm

भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण...

मंदसौर में अंधविश्वास का जाल बिछाकर महिला से मंगलसूत्र लूटा:81 कदम चलो, बालाजी के दर्शन होंगे” कहकर झांसे में लिया, ढाई तोले का मंगलसूत्र ले गए

March 27, 2026/
5:36 pm

मंदसौर शहर में अंधविश्वास के सहारे ठगी और लूट की चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। अफीम गोदाम रोड स्थित...

बार्सिलोना ने ला लीगा में सभी घरेलू मैच जीते:38 मैचों के सीजन में सभी 19 होम मुकाबले जीतने वाली पहली टीम बनी

May 18, 2026/
9:56 am

स्पैनिश चैंपियन बार्सिलोना ला लीगा में अपने सभी होम मैच जीतने वाली 11वीं टीम बनी है। 38 मैचों वाले सीजन...

राजनीति

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.