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Biocon Successor: Kiran Mazumdar Shaw Appoints Niece Clare

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मुंबई7 मिनट पहले

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बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने कंपनी के लिए उत्तराधिकार योजना यानी सक्सेशन प्लान का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी भांजी क्लेयर मजूमदार को उत्तराधिकारी चुना है।

फॉर्च्यून इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 37 साल की क्लेयर कंपनी के विकास के अगले फेज का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। किरण मजूमदार शॉ ने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

उनकी अपनी कोई संतान नहीं है, इसलिए वे कंपनी को सुरक्षित हाथों में सौंपना चाहती थीं। उन्होंने बताया कि क्लेयर ने खुद को साबित किया है कि वे एक कंपनी चला सकती हैं।

बिकारा थेरेप्यूटिक्स की फाउंडर और CEO भी हैं क्लेयर

क्लेयर मजूमदार फिलहाल ‘बिकारा थेरेप्यूटिक्स’ की फाउंडर और CEO हैं। यह कंपनी बायोकॉन द्वारा ही इंक्यूबेट की गई थी और 2024 में नैस्डैक पर लिस्ट हुई है।

बिकारा का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.6 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। क्लेयर के पास एमआईटी (MIT) और स्टैनफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी की डिग्री है और उन्होंने कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की है।

बायोकॉन फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ की भांजी क्लेयर मजूमदार।

बायोकॉन फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ की भांजी क्लेयर मजूमदार।

फैमिली इकोसिस्टम का सपोर्ट, एआई और ऑन्कोलॉजी एक्सपर्ट्स की टीम

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किरण मजूमदार ने एक मजबूत फैमिली इकोसिस्टम तैयार किया है। क्लेयर के भाई एरिक मजूमदार कैलटेक में प्रोफेसर और एआई (AI) एक्सपर्ट हैं।

वहीं उनके पति थॉमस रॉबर्ट्स मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। यह टीम बायोकॉन के भविष्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव, जेनेरिक्स और बायोलॉजिक्स बिजनेस का मर्जर

बायोकॉन अपने ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी ने अपने जेनेरिक्स और बायोलॉजिक्स व्यवसायों का मर्जर कर दिया है।

इसके अलावा कर्ज कम करने और स्ट्रक्चर को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में कंपनी का 60% रेवेन्यू ‘बायोसिमिलर्स’ से आता है। बाजार में इसके 12 प्रोडक्ट्स पहले से मौजूद हैं और करीब 20 पाइपलाइन में हैं।

बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ। उन्होंने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ। उन्होंने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

ग्रुप कंपनियों में नई लीडरशिप, जुलाई से कमान संभालेंगे नए CEO

सिर्फ मुख्य कंपनी ही नहीं, बल्कि ग्रुप की अन्य कंपनियों में भी लीडरशिप में बदलाव हो रहा है। श्रीहास तांबे ने बायोकॉन बायोलॉजिक्स के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।

वहीं, सिद्धार्थ मित्तल 1 जुलाई से सिनजीन इंटरनेशनल का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

फ्यूचर विजन, एआई और ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स पर रहेगा जोर

किरण मजूमदार शॉ के अनुसार, ग्रुप के भविष्य की ग्रोथ तीन स्तंभों पर टिकी होगी। इसमें डिफरेंशिएटेड बायोसिमिलर्स, ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) प्लेटफॉर्म्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शामिल है।

क्या होते हैं बायोसिमिलर्स?: बायोसिमिलर्स ऐसी दवाएं होती हैं जो किसी दूसरी कंपनी द्वारा पहले से बनाई गई ‘बायोलॉजिकल दवा’ (जो जीवित कोशिकाओं से बनी होती है) के लगभग समान होती हैं।

जब किसी बड़ी दवा का पेटेंट खत्म हो जाता है, तो बायोसिमिलर्स को कम कीमत पर बाजार में उतारा जाता है, जिससे मरीजों का इलाज सस्ता हो जाता है। बायोकॉन इसी सेक्टर की ग्लोबल लीडर है।

ये खबर भी पढ़ें…

BHEL का मुनाफा 156% बढ़कर ₹1,290 करोड़ हुआ: रेवेन्यू में 37% की ग्रोथ, निवेशकों को हर शेयर पर ₹1.40 का डिविडेंड देने का ऐलान

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BHEL का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 156% बढ़कर 1,290.47 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 504.45 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ें…

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मुंबई7 मिनट पहले

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बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने कंपनी के लिए उत्तराधिकार योजना यानी सक्सेशन प्लान का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी भांजी क्लेयर मजूमदार को उत्तराधिकारी चुना है।

फॉर्च्यून इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 37 साल की क्लेयर कंपनी के विकास के अगले फेज का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। किरण मजूमदार शॉ ने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

उनकी अपनी कोई संतान नहीं है, इसलिए वे कंपनी को सुरक्षित हाथों में सौंपना चाहती थीं। उन्होंने बताया कि क्लेयर ने खुद को साबित किया है कि वे एक कंपनी चला सकती हैं।

बिकारा थेरेप्यूटिक्स की फाउंडर और CEO भी हैं क्लेयर

क्लेयर मजूमदार फिलहाल ‘बिकारा थेरेप्यूटिक्स’ की फाउंडर और CEO हैं। यह कंपनी बायोकॉन द्वारा ही इंक्यूबेट की गई थी और 2024 में नैस्डैक पर लिस्ट हुई है।

बिकारा का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.6 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। क्लेयर के पास एमआईटी (MIT) और स्टैनफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी की डिग्री है और उन्होंने कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की है।

बायोकॉन फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ की भांजी क्लेयर मजूमदार।

बायोकॉन फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ की भांजी क्लेयर मजूमदार।

फैमिली इकोसिस्टम का सपोर्ट, एआई और ऑन्कोलॉजी एक्सपर्ट्स की टीम

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किरण मजूमदार ने एक मजबूत फैमिली इकोसिस्टम तैयार किया है। क्लेयर के भाई एरिक मजूमदार कैलटेक में प्रोफेसर और एआई (AI) एक्सपर्ट हैं।

वहीं उनके पति थॉमस रॉबर्ट्स मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। यह टीम बायोकॉन के भविष्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

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इसके अलावा कर्ज कम करने और स्ट्रक्चर को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में कंपनी का 60% रेवेन्यू ‘बायोसिमिलर्स’ से आता है। बाजार में इसके 12 प्रोडक्ट्स पहले से मौजूद हैं और करीब 20 पाइपलाइन में हैं।

बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ। उन्होंने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ। उन्होंने चार दशक पहले बायोकॉन की नींव रखी थी।

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सिर्फ मुख्य कंपनी ही नहीं, बल्कि ग्रुप की अन्य कंपनियों में भी लीडरशिप में बदलाव हो रहा है। श्रीहास तांबे ने बायोकॉन बायोलॉजिक्स के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।

वहीं, सिद्धार्थ मित्तल 1 जुलाई से सिनजीन इंटरनेशनल का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

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किरण मजूमदार शॉ के अनुसार, ग्रुप के भविष्य की ग्रोथ तीन स्तंभों पर टिकी होगी। इसमें डिफरेंशिएटेड बायोसिमिलर्स, ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) प्लेटफॉर्म्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शामिल है।

क्या होते हैं बायोसिमिलर्स?: बायोसिमिलर्स ऐसी दवाएं होती हैं जो किसी दूसरी कंपनी द्वारा पहले से बनाई गई ‘बायोलॉजिकल दवा’ (जो जीवित कोशिकाओं से बनी होती है) के लगभग समान होती हैं।

जब किसी बड़ी दवा का पेटेंट खत्म हो जाता है, तो बायोसिमिलर्स को कम कीमत पर बाजार में उतारा जाता है, जिससे मरीजों का इलाज सस्ता हो जाता है। बायोकॉन इसी सेक्टर की ग्लोबल लीडर है।

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