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BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा।

भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था।

TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं।

भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा

भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली।

एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता।

हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है।

देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज

गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे।

बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है।

……………………

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पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा।

भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था।

TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं।

भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

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एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता।

हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है।

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