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न्यूयॉर्क8 मिनट पहले

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अमेरिका में भारतीय आमों के प्रति दीवानगी देखी जा रही है। लोग आमों की खेप वाली फ्लाइट्स को ट्रैक कर रहे हैं। अप्रैल में पहली खेप आने से पहले ही सारे प्री-ऑर्डर बिक गए। लोग 10-12 आमों के एक बॉक्स के लिए 5,600 रुपए तक खर्च करने को तैयार हैं। यही बॉक्स पिछले साल करीब 3700- 4200 रु. में मिल जा रहे थे। 33% तक आम महंगे हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ईरान युद्ध के बाद तेल के दाम बढ़ना, शिपमेंट महंगा होना है।

एक साल में भारतीय आम के दाम 4,200 से 5,600 रु. प्रति बॉक्स हुए

फ्लाइट्स कम होने से कुछ शिपमेंट लेट या कैंसिल भी हुए, जिससे खर्च और बढ़ा। अमेरिका के ग्रोसरी स्टोर में सालभर मिलने वाले मेक्सिकन आम जहां करीब 945 में मिल जाते हैं, वहीं भारतीय आमों को लोग स्वाद में अलग और ज्यादा मीठा मानते हैं। महाराष्ट्र का अल्फांसो, गुजरात का केसर, उत्तर भारत का चौसा और लंगड़ा, दक्षिण भारत का बंगनपल्ली वहां सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।

दशकों तक लगा रहा बैन, 2007 में हटा प्रतिबंध, तब अमेरिका पहुंचा भारतीय स्वाद

दुनिया की आधी मैंगो सप्लाई भारत करता है, फिर भी दशकों तक यह अमेरिका में बैन रहा। इसका कारण ‘हॉट-वॉटर ट्रीटमेंट’ (गर्म पानी से कीड़े मारना) था, जिससे भारतीय आम खराब हो जाते थे। साथ ही दक्षिण अमेरिकी लॉबी का भी दबाव था। बाद में ‘गामा रेडिएशन’ (किरणों के जरिए कीटाणु मुक्त करना) तकनीक समाधान बनी। साल 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पीएम मनमोहन सिंह के बीच समझौते के बाद, 2007 में भारतीय आम आधिकारिक तौर पर अमेरिका पहुंचे।

अमेरिकी ग्राहक वफादार, मैंगो पास भी बिक रहा

भारतीय आमों के सबसे वफादार ग्राहक अब खुद अमेरिकी नागरिक बन रहे हैं, जबकि भारतीय प्रवासी अक्सर इसकी कीमतों पर नाराजगी जताते हैं। भारी मांग को देखते हुए ‘जीजी मैंगो’ जैसी कंपनियां 1000 डॉलर (करीब 94 हजार रुपए) में पूरे सीजन का ‘मैंगो पास’ ऑफर कर रही हैं। अब वॉलमार्ट और कोस्टको जैसे बड़े रिटेलर्स के जरिए भी इसे बेचने की तैयारी है।

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