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Uttarakhands First Woman Bodybuilder Pratibha Thapliyals Inspiring Journey

Uttarakhands First Woman Bodybuilder Pratibha Thapliyals Inspiring Journey

8 फरवरी को नेशनल वुमन बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर उत्तराखंड की बेटी प्रतिभा थपलियाल ने साबित कर दिया कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। कभी थायरॉइड, लो बीपी और 88 किलो वजन से जूझ रही प्रतिभा आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनि

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दैनिक भास्कर एप से बातचीत में प्रतिभा ने बताया कि 2018 में बीमारी के बाद डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने फिटनेस पर ध्यान देना शुरू किया। पति ने मजाक में कहा- “तुम बॉडीबिल्डिंग क्यों नहीं करती?” और वही बात उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई।

दो बेटों की मां प्रतिभा रोज करीब 9 घंटे मेहनत करती हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड की बेटियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही संसाधनों और सरकारी सहयोग की है, ताकि वे भी देश का नाम रोशन कर सकें।

जीते हुए मेडलों के साथ खड़ीं प्रतिभा।

सवाल जवाब में पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: पहाड़ की बेटी से बॉडीबिल्डर बनने तक का सफर आसान नहीं रहा होगा, कैसे शुरुआत हुई? जवाब: सच कहूं तो शुरुआत में मुझे बॉडी बिल्डिंग के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी। बचपन से ही खेलों में रुचि थी। वॉलीबॉल और क्रिकेट खेला करती थी। लेकिन शादी के बाद जीवन में बदलाव आया और मैं गृहिणी के रूप में परिवार संभालने लगी। 2016 में दूसरे बेटे के जन्म के बाद शरीर में लगातार थकान, लो बीपी जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। 2018 तक मेरा वजन 46 किलो से बढ़कर 88 किलोग्राम हो गया। इसके बाद चिंता बढ़ी और जांच में थायरॉइड की बीमारी सामने आई। डॉक्टर ने साफ कहा कि अगर स्वस्थ रहना है तो वर्कआउट को प्राथमिकता देनी होगी। इसके बाद मैंने जिम ज्वाइन किया। धीरे-धीरे रुचि बढ़ती गई और वेट लिफ्टिंग पर फोकस होने लगा। मजाक-मजाक में पति ने कहा कि तुम बॉडी बिल्डिंग शुरू करो और मैंने उसे सच में स्वीकार कर लिया। यहीं से मेरी नई शुरुआत हुई।

सवाल: बॉडी बिल्डिंग जैसे क्षेत्र में महिलाओं को आज भी कई सामाजिक धारणाओं का सामना करना पड़ता है। आपने आलोचनाओं और मानसिक दबाव को कैसे बदला? जवाब: आमतौर पर बॉडी बिल्डिंग को पुरुष प्रधान खेल माना जाता है। लोगों की सोच होती है कि यह सिर्फ लड़कों के लिए है। मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। कई बार लोगों ने कहा कि पुरुषों जैसा बनकर क्या करोगी, इतना वजन उठाकर क्या हासिल होगा। तरह-तरह की बातें सुननी पड़ीं।

सवाल: 43 की उम्र में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। फिटनेस और अनुशासन का मूल मंत्र क्या है? जवाब: जहां चाह, वहां राह। अगर आपने ठान लिया कि कुछ करना है, तो बस उस लक्ष्य को पाने की रणनीति बनाइए और लगातार काम कीजिए। उत्तराखंड की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। वे मेहनती और अनुशासित होती हैं। मेरा उद्देश्य था कि ऐसा उदाहरण पेश करूं जिससे साबित हो कि लड़कियां भी हर वह काम कर सकती हैं, जो आमतौर पर लड़कों से जोड़ा जाता है। मूल मंत्र यही है कि अपने लक्ष्य को स्पष्ट समझें और हर दिन उसी दिशा में समर्पित होकर काम करें।

सवाल: आज पहाड़ की बेटियां आपको रोल मॉडल के रूप में देख रही हैं। आप उन लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी, जो संसाधनों की कमी से डरती हैं? जवाब: इसमें कोई संदेह नहीं है कि बॉडी बिल्डिंग महंगा खेल है। उत्तराखंड में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन कई बार संसाधनों और आर्थिक स्थिति की कमी रास्ता रोक देती है। मैं चाहती हूं कि सरकार पहाड़ की बेटियों को हर संभव सहयोग दे, ताकि वे राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।

सवाल: आगे आपकी क्या बड़ी तैयारी है? क्या विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े लक्ष्य पर नजर है? और सरकार से किस तरह के सहयोग की उम्मीद है? जवाब: अभी मैंने नेशनल प्रतियोगिता खेली है। आगे मेरा लक्ष्य एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है। लेकिन बात फिर आर्थिक स्थिति पर आकर रुक जाती है। मेरी सरकार से विनती है कि खिलाड़ियों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए। मेहनत करने में हम पीछे नहीं हैं। खिलाड़ी तभी रुकता है जब आर्थिक रूप से कमजोर पड़ जाता है। अगर यह बाधा दूर हो जाए तो कोई भी खिलाड़ी कुछ भी हासिल कर सकता है।

सवाल: आपको देखकर लोग डाइट प्लान के बारे में जानना चाहते हैं। खानपान पर आपका क्या संदेश है? जवाब: किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए लगभग चार महीने का समय लगता है। उस दौरान सुबह और शाम चार-चार घंटे का वर्कआउट होता है। डाइट में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का संतुलित चार्ट तैयार किया जाता है, जिसे समय पर फॉलो करना जरूरी होता है। जो लोग सिर्फ फिटनेस के लिए सोचते हैं, उन्हें फास्ट फूड से दूरी बनाकर घर के बने संतुलित भोजन पर ध्यान देना चाहिए। नियमितता और सही खानपान ही अच्छी सेहत की कुंजी है।

——— ये खबर भी पढ़ें….

43 साल की उम्र में भी मजबूत इरादे:CM धामी ने बॉडी बिल्डर प्रतिभा थपलियाल को किया सम्मानित, उत्तराखंड की बेटी ने मसल्स से रचा इतिहास

पहाड़ की बेटियां अब सिर्फ परंपराओं की नहीं, बल्कि ताकत, आत्मविश्वास और विश्व मंच पर पहचान की मिसाल बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी हैं उत्तराखंड की बेटी प्रतिभा थपलियाल, जिन्हें बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया। (पढ़ें पूरी खबर)

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सवाल: पहाड़ की बेटी से बॉडीबिल्डर बनने तक का सफर आसान नहीं रहा होगा, कैसे शुरुआत हुई? जवाब: सच कहूं तो शुरुआत में मुझे बॉडी बिल्डिंग के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी। बचपन से ही खेलों में रुचि थी। वॉलीबॉल और क्रिकेट खेला करती थी। लेकिन शादी के बाद जीवन में बदलाव आया और मैं गृहिणी के रूप में परिवार संभालने लगी। 2016 में दूसरे बेटे के जन्म के बाद शरीर में लगातार थकान, लो बीपी जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। 2018 तक मेरा वजन 46 किलो से बढ़कर 88 किलोग्राम हो गया। इसके बाद चिंता बढ़ी और जांच में थायरॉइड की बीमारी सामने आई। डॉक्टर ने साफ कहा कि अगर स्वस्थ रहना है तो वर्कआउट को प्राथमिकता देनी होगी। इसके बाद मैंने जिम ज्वाइन किया। धीरे-धीरे रुचि बढ़ती गई और वेट लिफ्टिंग पर फोकस होने लगा। मजाक-मजाक में पति ने कहा कि तुम बॉडी बिल्डिंग शुरू करो और मैंने उसे सच में स्वीकार कर लिया। यहीं से मेरी नई शुरुआत हुई।

सवाल: बॉडी बिल्डिंग जैसे क्षेत्र में महिलाओं को आज भी कई सामाजिक धारणाओं का सामना करना पड़ता है। आपने आलोचनाओं और मानसिक दबाव को कैसे बदला? जवाब: आमतौर पर बॉडी बिल्डिंग को पुरुष प्रधान खेल माना जाता है। लोगों की सोच होती है कि यह सिर्फ लड़कों के लिए है। मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। कई बार लोगों ने कहा कि पुरुषों जैसा बनकर क्या करोगी, इतना वजन उठाकर क्या हासिल होगा। तरह-तरह की बातें सुननी पड़ीं।

सवाल: 43 की उम्र में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। फिटनेस और अनुशासन का मूल मंत्र क्या है? जवाब: जहां चाह, वहां राह। अगर आपने ठान लिया कि कुछ करना है, तो बस उस लक्ष्य को पाने की रणनीति बनाइए और लगातार काम कीजिए। उत्तराखंड की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। वे मेहनती और अनुशासित होती हैं। मेरा उद्देश्य था कि ऐसा उदाहरण पेश करूं जिससे साबित हो कि लड़कियां भी हर वह काम कर सकती हैं, जो आमतौर पर लड़कों से जोड़ा जाता है। मूल मंत्र यही है कि अपने लक्ष्य को स्पष्ट समझें और हर दिन उसी दिशा में समर्पित होकर काम करें।

सवाल: आज पहाड़ की बेटियां आपको रोल मॉडल के रूप में देख रही हैं। आप उन लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी, जो संसाधनों की कमी से डरती हैं? जवाब: इसमें कोई संदेह नहीं है कि बॉडी बिल्डिंग महंगा खेल है। उत्तराखंड में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन कई बार संसाधनों और आर्थिक स्थिति की कमी रास्ता रोक देती है। मैं चाहती हूं कि सरकार पहाड़ की बेटियों को हर संभव सहयोग दे, ताकि वे राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।

सवाल: आगे आपकी क्या बड़ी तैयारी है? क्या विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े लक्ष्य पर नजर है? और सरकार से किस तरह के सहयोग की उम्मीद है? जवाब: अभी मैंने नेशनल प्रतियोगिता खेली है। आगे मेरा लक्ष्य एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है। लेकिन बात फिर आर्थिक स्थिति पर आकर रुक जाती है। मेरी सरकार से विनती है कि खिलाड़ियों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए। मेहनत करने में हम पीछे नहीं हैं। खिलाड़ी तभी रुकता है जब आर्थिक रूप से कमजोर पड़ जाता है। अगर यह बाधा दूर हो जाए तो कोई भी खिलाड़ी कुछ भी हासिल कर सकता है।

सवाल: आपको देखकर लोग डाइट प्लान के बारे में जानना चाहते हैं। खानपान पर आपका क्या संदेश है? जवाब: किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए लगभग चार महीने का समय लगता है। उस दौरान सुबह और शाम चार-चार घंटे का वर्कआउट होता है। डाइट में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का संतुलित चार्ट तैयार किया जाता है, जिसे समय पर फॉलो करना जरूरी होता है। जो लोग सिर्फ फिटनेस के लिए सोचते हैं, उन्हें फास्ट फूड से दूरी बनाकर घर के बने संतुलित भोजन पर ध्यान देना चाहिए। नियमितता और सही खानपान ही अच्छी सेहत की कुंजी है।

——— ये खबर भी पढ़ें….

43 साल की उम्र में भी मजबूत इरादे:CM धामी ने बॉडी बिल्डर प्रतिभा थपलियाल को किया सम्मानित, उत्तराखंड की बेटी ने मसल्स से रचा इतिहास

पहाड़ की बेटियां अब सिर्फ परंपराओं की नहीं, बल्कि ताकत, आत्मविश्वास और विश्व मंच पर पहचान की मिसाल बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी हैं उत्तराखंड की बेटी प्रतिभा थपलियाल, जिन्हें बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया। (पढ़ें पूरी खबर)

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