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Supreme Court Concerned Over Pending Bail Petitions

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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जमानत मामलों की जल्दी सुनवाई और फैसला करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी जरूरी है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इसके लिए पेंडिंग बेल याचिकाओं की ऑटोमैटिक लिस्टिंग का सिस्टम तैयार किया जाए और मामलों के निपटारे की तय समय सीमा भी होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करें, जिससे जमानत मामलों का समय पर फैसला हो सके। उसका मकसद किसी हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को और बेहतर बनाना है।

कोर्ट ने याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की गारंटी देता है। इस प्रक्रिया में पीड़ितों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख सुझाव:

  • ऑटोमैटिक लिस्टिंग: ऐसा सॉफ्टवेयर सिस्टम बनाएं, जिससे हर जमानत याचिका कम से कम 2 हफ्ते में एक बार अपने आप सुनवाई के लिए लिस्ट में आ जाए।
  • नोटिस प्रक्रिया खत्म हो: जमानत याचिकाओं में नोटिस जारी और स्वीकार करने की प्रक्रिया हटाई जाए। उन्हें सीधे सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए।
  • डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल: स्टेटस रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएं ताकि प्रक्रिया तेज हो सके।
  • सरकारी वकीलों की जिम्मेदारी: सरकारी वकील बिना कारण मामले की सुनवाई टालने से बचें।
  • जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पीड़ितों को सुनवाई में शामिल होने और कानूनी मदद लेने का पूरा मौका मिले।

सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंगज मानत याचिकाओं की जानकारी मांगी

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से पेंडिंग नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं की जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने पूछा था कि याचिका कब दाखिल हुई, उसकी सुनवाई कब हुई और फैसले की क्या स्थिति है।

कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर हाईकोर्ट ने जरूरी आंकड़े दे दिए हैं। कई जगहों पर पेंडिंग मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश भी शुरू कर दी गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग जमानत याचिकाओं की संख्या को बहुत ज्यादा बताया। कोर्ट ने कहा कि वहां के जज हर दिन सैकड़ों मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पेंडिंग मामलों का दबाव काफी अधिक बना हुआ है।

कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति को सुझाव दिया कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए पहले से तय तारीख देने की व्यवस्था बनाई जाए।

कोर्ट बोला- पीड़ितों को सुनवाई में शामिल करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नशीले पदार्थों (NDPS) के कानून से जुड़े मामलों में FSL रिपोर्ट समय पर मिलना बहुत जरूरी है। जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी भी अहम होती है, खासकर पीड़ितों से जुड़े मामलों में। जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पीड़ितों को सुनवाई में शामिल होने और कानूनी मदद लेने का पूरा मौका मिले।

यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। इससे पहले 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट सभी राज्यों को जमानत मामलों के जल्द निपटारे में हाईकोर्ट की मदद करने का निर्देश दे चुका है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जमानत मामलों की जल्दी सुनवाई और फैसला करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी जरूरी है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इसके लिए पेंडिंग बेल याचिकाओं की ऑटोमैटिक लिस्टिंग का सिस्टम तैयार किया जाए और मामलों के निपटारे की तय समय सीमा भी होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करें, जिससे जमानत मामलों का समय पर फैसला हो सके। उसका मकसद किसी हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को और बेहतर बनाना है।

कोर्ट ने याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की गारंटी देता है। इस प्रक्रिया में पीड़ितों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख सुझाव:

  • ऑटोमैटिक लिस्टिंग: ऐसा सॉफ्टवेयर सिस्टम बनाएं, जिससे हर जमानत याचिका कम से कम 2 हफ्ते में एक बार अपने आप सुनवाई के लिए लिस्ट में आ जाए।
  • नोटिस प्रक्रिया खत्म हो: जमानत याचिकाओं में नोटिस जारी और स्वीकार करने की प्रक्रिया हटाई जाए। उन्हें सीधे सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए।
  • डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल: स्टेटस रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएं ताकि प्रक्रिया तेज हो सके।
  • सरकारी वकीलों की जिम्मेदारी: सरकारी वकील बिना कारण मामले की सुनवाई टालने से बचें।
  • जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पीड़ितों को सुनवाई में शामिल होने और कानूनी मदद लेने का पूरा मौका मिले।

सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंगज मानत याचिकाओं की जानकारी मांगी

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से पेंडिंग नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं की जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने पूछा था कि याचिका कब दाखिल हुई, उसकी सुनवाई कब हुई और फैसले की क्या स्थिति है।

कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर हाईकोर्ट ने जरूरी आंकड़े दे दिए हैं। कई जगहों पर पेंडिंग मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश भी शुरू कर दी गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग जमानत याचिकाओं की संख्या को बहुत ज्यादा बताया। कोर्ट ने कहा कि वहां के जज हर दिन सैकड़ों मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पेंडिंग मामलों का दबाव काफी अधिक बना हुआ है।

कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति को सुझाव दिया कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए पहले से तय तारीख देने की व्यवस्था बनाई जाए।

कोर्ट बोला- पीड़ितों को सुनवाई में शामिल करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नशीले पदार्थों (NDPS) के कानून से जुड़े मामलों में FSL रिपोर्ट समय पर मिलना बहुत जरूरी है। जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी भी अहम होती है, खासकर पीड़ितों से जुड़े मामलों में। जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पीड़ितों को सुनवाई में शामिल होने और कानूनी मदद लेने का पूरा मौका मिले।

यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। इससे पहले 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट सभी राज्यों को जमानत मामलों के जल्द निपटारे में हाईकोर्ट की मदद करने का निर्देश दे चुका है।

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