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हंसी का मजेदार तड़का है ‘पति पत्नी और वो 2:रिश्तों में गलतफहमियों और ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ से मनोरंजन करती है फिल्म

हंसी का मजेदार तड़का है ‘पति पत्नी और वो 2:रिश्तों में गलतफहमियों और ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ से मनोरंजन करती है फिल्म

शादीशुदा जिंदगी में अगर दोस्ती, शक और पुराने रिश्तों की एंट्री हो जाए, तो जिंदगी कितनी उलझ सकती है, यही दिखाने की कोशिश करती है फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’। फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले फॉरेस्ट ऑफिसर प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने काम में माहिर हैं और विभाग में उनकी अच्छी साख है। उनकी पत्नी अपर्णा एक स्थानीय टीवी रिपोर्टर है, जबकि उनकी सहकर्मी और दोस्त नीलोफर उनके साथ वन विभाग में काम करती हैं। कहानी में मोड़ तब आता है, जब उनकी कॉलेज की पुरानी दोस्त चंचल अचानक उनकी जिंदगी में वापस लौटती है। चंचल अपने प्रेमी से शादी करना चाहती है और उसकी मदद करते-करते प्रजापति की अपनी शादीशुदा जिंदगी में उथल-पुथल मच जाती है। गलतफहमियों का ऐसा जाल बुनता है कि अपर्णा को प्रजापति और नीलोफर के बीच अफेयर का शक होने लगता है, वहीं चंचल के प्रेमी को लगता है कि प्रजापति और चंचल के बीच कुछ चल रहा है। इन रिश्तों के उलझे धागों के बीच कॉमेडी और कन्फ्यूजन का तड़का फिल्म को आगे बढ़ाता है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है?
अभिनय की बात करें, तो आयुष्मान खुराना ने प्रजापति पांडे के किरदार को बेहद सहज तरीके से निभाया है और उनका प्रदर्शन कहानी को मजबूती देता है। वामिका गब्बी अपने किरदार में ठीक लगती हैं, जबकि सारा अली खान का काम औसत कहा जा सकता है। हालांकि, रकुल प्रीत सिंह सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं; उन्होंने अपने अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से फिल्म में जान डालने का काम किया है। वहीं आयशा रजा, तिग्मांशु धूलिया और विजय राज ने अपनी शानदार कॉमिक मौजूदगी और स्थानीय बोली पर अपनी पकड़ से कई दृश्यों को बेहद मजेदार बना दिया है। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है?
निर्देशक मुदस्सर अजीज ने एक सामान्य सी कहानी को ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म में कई जगह अनीस बज्मी और प्रियदर्शन की फिल्मों जैसी हलचल और भ्रम वाली कॉमेडी की झलक मिलती है। कहानी में बहुत कुछ नया या खास नहीं है, लेकिन कुछ अच्छे मोड़, कलाकारों का सधा हुआ अभिनय और रिश्तों का उलझा खेल दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि, कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कई कॉमेडी पंच उतना असर नहीं छोड़ पाते, जितनी उनसे उम्मीद की गई थी। फिल्म का म्यूजिक कैसा है?
संगीत की बात करें, तो फिल्म में पंजाबी रंग थोड़ा ज्यादा महसूस होता है, जो उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि वाली कहानी में थोड़ा खटकता है। हालांकि, फिल्म ‘तेरे नाम’ का गाना ‘क्यों किसी को वफा के बदले’ और फिल्म ‘तेजाब’ के ‘कह दो कि तुम’ जैसे गानों का इस्तेमाल कहानी की परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर तरीके से किया गया है। लेकिन कई जगह गानों की अधिक लंबाई फिल्म की रफ्तार को धीमा कर देती है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं?
कुल मिलाकर ‘पति पत्नी और वो 2’ ऐसी फिल्म है, जो दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं डालती, लेकिन रिश्तों की गलतफहमी और हल्के-फुल्के हास्य के सहारे मनोरंजन करने में काफी हद तक सफल रहती है। अगर आपको उलझनों वाली पारिवारिक कॉमेडी फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।

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हंसी का मजेदार तड़का है ‘पति पत्नी और वो 2:रिश्तों में गलतफहमियों और ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ से मनोरंजन करती है फिल्म

हंसी का मजेदार तड़का है ‘पति पत्नी और वो 2:रिश्तों में गलतफहमियों और ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ से मनोरंजन करती है फिल्म

शादीशुदा जिंदगी में अगर दोस्ती, शक और पुराने रिश्तों की एंट्री हो जाए, तो जिंदगी कितनी उलझ सकती है, यही दिखाने की कोशिश करती है फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’। फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले फॉरेस्ट ऑफिसर प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने काम में माहिर हैं और विभाग में उनकी अच्छी साख है। उनकी पत्नी अपर्णा एक स्थानीय टीवी रिपोर्टर है, जबकि उनकी सहकर्मी और दोस्त नीलोफर उनके साथ वन विभाग में काम करती हैं। कहानी में मोड़ तब आता है, जब उनकी कॉलेज की पुरानी दोस्त चंचल अचानक उनकी जिंदगी में वापस लौटती है। चंचल अपने प्रेमी से शादी करना चाहती है और उसकी मदद करते-करते प्रजापति की अपनी शादीशुदा जिंदगी में उथल-पुथल मच जाती है। गलतफहमियों का ऐसा जाल बुनता है कि अपर्णा को प्रजापति और नीलोफर के बीच अफेयर का शक होने लगता है, वहीं चंचल के प्रेमी को लगता है कि प्रजापति और चंचल के बीच कुछ चल रहा है। इन रिश्तों के उलझे धागों के बीच कॉमेडी और कन्फ्यूजन का तड़का फिल्म को आगे बढ़ाता है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है?
अभिनय की बात करें, तो आयुष्मान खुराना ने प्रजापति पांडे के किरदार को बेहद सहज तरीके से निभाया है और उनका प्रदर्शन कहानी को मजबूती देता है। वामिका गब्बी अपने किरदार में ठीक लगती हैं, जबकि सारा अली खान का काम औसत कहा जा सकता है। हालांकि, रकुल प्रीत सिंह सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं; उन्होंने अपने अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से फिल्म में जान डालने का काम किया है। वहीं आयशा रजा, तिग्मांशु धूलिया और विजय राज ने अपनी शानदार कॉमिक मौजूदगी और स्थानीय बोली पर अपनी पकड़ से कई दृश्यों को बेहद मजेदार बना दिया है। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है?
निर्देशक मुदस्सर अजीज ने एक सामान्य सी कहानी को ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म में कई जगह अनीस बज्मी और प्रियदर्शन की फिल्मों जैसी हलचल और भ्रम वाली कॉमेडी की झलक मिलती है। कहानी में बहुत कुछ नया या खास नहीं है, लेकिन कुछ अच्छे मोड़, कलाकारों का सधा हुआ अभिनय और रिश्तों का उलझा खेल दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि, कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कई कॉमेडी पंच उतना असर नहीं छोड़ पाते, जितनी उनसे उम्मीद की गई थी। फिल्म का म्यूजिक कैसा है?
संगीत की बात करें, तो फिल्म में पंजाबी रंग थोड़ा ज्यादा महसूस होता है, जो उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि वाली कहानी में थोड़ा खटकता है। हालांकि, फिल्म ‘तेरे नाम’ का गाना ‘क्यों किसी को वफा के बदले’ और फिल्म ‘तेजाब’ के ‘कह दो कि तुम’ जैसे गानों का इस्तेमाल कहानी की परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर तरीके से किया गया है। लेकिन कई जगह गानों की अधिक लंबाई फिल्म की रफ्तार को धीमा कर देती है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं?
कुल मिलाकर ‘पति पत्नी और वो 2’ ऐसी फिल्म है, जो दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं डालती, लेकिन रिश्तों की गलतफहमी और हल्के-फुल्के हास्य के सहारे मनोरंजन करने में काफी हद तक सफल रहती है। अगर आपको उलझनों वाली पारिवारिक कॉमेडी फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।

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