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Haryana Jaundice Hepatitis Death Reasons; Piliya WHO Health Tips

Haryana Jaundice Hepatitis Death Reasons; Piliya WHO Health Tips
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  • Haryana Jaundice Hepatitis Death Reasons; Piliya WHO Health Tips | Symptoms & Precautions

7 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में पिछले कुछ दिनों में पीलिया (जॉन्डिस) और हेपेटाइटिस से 12 लोगों की मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव में अभी हेपेटाइटिस के करीब 29 मरीज हैं। इसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग अभियान तेज कर दिया है।

पीलिया और हेपेटाइटिस दोनों लिवर से जुड़ी हेल्थ कंडीशंस हैं। इनमें लिवर डैमेज हो जाता है और उसके काम करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, हेपेटाइटिस से दुनियाभर में हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत होती है।

भारत जैसे विकासशील देश में दूषित भोजन-पानी एक बड़ी समस्या है। चूंकि हेपेटाइटिस संक्रामक भी है, इसलिए संक्रमण के अचानक इतने अधिक मामले बेहद चिंताजनक हैं।

आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में बात पीलिया और हेपेटाइटिस की। साथ ही जानेंगे कि-

  • पीलिया और हेपेटाइटिस में क्या कनेक्शन है?
  • इनसे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जी. एस. लांबा, डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- पीलिया (जॉन्डिस) क्या होता है?

जवाब- पीलिया एक हेल्थ कंडीशन है, जिसमें स्किन, आंखों का सफेद हिस्सा (स्कियरा) और नाखून पीले दिखने लगते हैं। यह शरीर में बिलीरुबिन नामक पिगमेंट (अपशिष्ट) के बढ़ने से होता है।

बिलीरुबिन रेड ब्लड सेल्स के टूटने (मरने) पर बनता है और आमतौर पर लिवर इसे फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो यह पिगमेंट ब्लड में जमा होने लगता है।

बिलीरुबिन पीले रंग का पिगमेंट है। यही वजह है कि इसके बढ़ने से शरीर में पीलापन दिखने लगता है। सरल शब्दों में कहें, तो पीलिया कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह लिवर में हो रही समस्या का संकेत है।

सवाल- पीलिया क्यों होता है?

जवाब- पीलिया तब होता है, जब खून में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इसके मुख्य कारण हैं-

  • रेड ब्लड सेल्स का सामान्य से अधिक टूटना (हेमोलिसिस)।
  • हेपेटाइटिस या अन्य लिवर इन्फेक्शन, जिसमें लिवर बिलीरुबिन को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता है।
  • पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) में रुकावट, जैसे पित्त की पथरी या ट्यूमर होने पर।
  • शराब का सेवन या कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से लिवर डैमेज होने पर।

लिवर सामान्य रूप से बिलीरुबिन को प्रोसेस करके स्टूल (मल) के साथ बाहर निकाल देता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो खून में बिलीरुबिन बढ़ जाता है और पीलिया के लक्षण दिखने लगते हैं।

सवाल- पीलिया कोई बीमारी है या ये किसी बीमारी का संकेत है?

जवाब- पीलिया अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। यह शरीर के भीतर चल रही किसी बीमारी का एक संकेत है। यह मुख्य रूप से इस बात का इशारा करता है कि लिवर में कोई समस्या है।

सवाल- बिलीरूबिन क्या होता है और हेल्दी बॉडी के लिए इसका संतुलित रहना क्यों जरूरी है?

जवाब- बिलीरुबिन एक पीले रंग का अपशिष्ट पदार्थ है। यह रेड ब्लड सेल्स के टूटने/मरने पर बनता है। दरअसल रेड ब्लड सेल्स का जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है, इसके बाद ये टूट (मर) जाती हैं। लिवर बिलीरुबिन को प्रोसेस करके स्टूल के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है।

अगर इसका स्तर संतुलित रहे तो शरीर सामान्य रूप से काम करता है। इसके कारण ही यूरिन और स्टूल का रंग येलो या ब्राउन होता है। लेकिन जब बिलीरुबिन बढ़ जाता है, तो पीलिया हो सकता है। यह लिवर या ब्लड से जुड़ी समस्या का संकेत देता है।

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस में क्या कनेक्शन और क्या फर्क है?

जवाब- पीलिया और हेपेटाइटिस दोनों लिवर से जुड़ी कंडीशंस हैं। इसके बावजूद दोनों में फर्क है।

  • पीलिया सिर्फ एक लक्षण है। इसमें शरीर पीला हो जाता है। ये कंडीशन शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने पर पैदा होती है।
  • वहीं हेपेटाइटिस लिवर में होने वाला इंफ्लेमेशन है, जो वायरस, टॉक्सिन्स या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण होता है। यह शराब के सेवन और दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी हो सकता है।
  • हेपेटाइटिस में लिवर कमजोर पड़ जाता है। इस कंडीशन में लिवर बिलीरुबिन को ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता है। इससे बिलीरुबिन खून में जमा होने लगता है, जिससे ‘पीलिया’ हो जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो हर हेपेटाइटिस से पीलिया हो सकता है। लेकिन ये जरूरी नहीं है कि पीलिया की वजह हर बार हेपेटाइटिस ही हो। पथरी, ट्यूमर या खून से जुड़ी बीमारी से भी पीलिया हो सकता है।

सवाल- हेपेटाइटिस कितने प्रकार का होता है और ये कैसे फैलता है?

जवाब- हेपेटाइटिस मुख्य रूप से 5 प्रकार का होता है। यह अलग-अलग कारणों से होता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या हेपेटाइटिस और पीलिया के लक्षण एक जैसे होते हैं?

जवाब- हेपेटाइटिस और पीलिया के कुछ लक्षण मिलते-जुलते हैं, लेकिन दोनों पूरी तरह से एक जैसे नहीं होते। नीचे दिए ग्राफिक से इसके लक्षणों काे जानिए-

सवाल- क्या हर पीलिया का कारण हेपेटाइटिस होता है?

जवाब- नहीं, हर पीलिया का कारण हेपेटाइटिस नहीं होता है। पीलिया तब होता है, जब शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है। बिलीरुबिन बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसेकि–

  • पित्त की नली में पथरी या ट्यूमर।
  • लिवर की अन्य बीमारियां।
  • खून की कुछ समस्याएं (जैसे हीमोलाइसिस, एनीमिया, ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर)।
  • कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स।
  • ज्यादा शराब का सेवन।

इसलिए हर पीलिया को हेपेटाइटिस मान लेना सही नहीं है।

सवाल- पीलिया या हेपेटाइटिस कब गंभीर रूप ले सकता है?

जवाब- अगर किसी को पहले से कोई लिवर प्रॉब्लम है या लिवर डैमेज है तो ये गंभीर रूप ले सकता है। हेपेटाइटिस B और C अपने आप में गंभीर हैं। इसमें समस्या की बात ये है कि इस कंडीशन की आखिरी स्टेज तक भी बहुत स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। इसके बावजूद लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर या कैंसर जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसलिए लिवर से जुड़ी कोई समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

इन स्थितियों में पीलिया भी गंभीर हो सकता है-

  • बिलीरुबिन लगातार बढ़ता रहे।
  • पेट में सूजन या तेज दर्द हो।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी/बेहोशी हो।
  • लंबे समय तक बुखार बना रहे।
  • यूरिन फ्रीक्वेंसी बहुत कम हो।

सवाल- हेपेटाइटिस और पीलिया का इलाज न होने से किन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है?

जवाब- इससे लिवर डैमेज हो सकता है। समस्या धीरे-धीरे बढ़कर जानलेवा भी बन सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस की जांच कैसे की जाती है?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर ये टेस्ट करवाते हैं-

  • बिलीरुबिन टेस्ट: खून में बिलीरुबिन का स्तर जानने के लिए।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT): लिवर सही काम कर रहा है या नहीं।
  • वायरल मार्कर टेस्ट: हेपेटाइटिस A, B, C आदि की पुष्टि के लिए।

इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पित्त नली या लिवर की स्थिति जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या गंभीर मामलों में बायोप्सी भी की जाती है। सही जांच से असली कारण पता चलता है और उसी अनुसार इलाज शुरू किया जाता है।

सवाल- हेपेटाइटिस का इलाज क्या है?

जवाब- हेपेटाइटिस का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। हर स्थिति में डॉक्टर की निगरानी जरूरी है।

हेपेटाइटिस A और E: ज्यादातर मामलों में आराम, हल्का भोजन और पर्याप्त लिक्विड से ठीक हो जाता है।

हेपेटाइटिस B और C: इसमें डॉक्टर की निगरानी जरूरी है। इलाज में एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं।

हेपेटाइटिस D: ये गंभीर कंडीशन है। इसका इलाज सीमित है। आमतौर पर ये हेपेटाइटिस उन लोगों को ही होता है, जो पहले से हेपेटाइटिस B से संक्रमित हैं।

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस से कैसे बचें?

जवाब- पीलिया और हेपेटाइटिस से बचाव के लिए लिवर को सुरक्षित रखना और संक्रमण से बचाव जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या हेपेटाइटिस की कोई वैक्सीन भी उपलब्ध है?

जवाब- हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस B का टीका लिवर कैंसर से भी बचाता है। हालांकि, हेपेटाइटिस C के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

………………..

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हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में पिछले कुछ दिनों में पीलिया (जॉन्डिस) और हेपेटाइटिस से 12 लोगों की मौत हो गई।

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पीलिया और हेपेटाइटिस दोनों लिवर से जुड़ी हेल्थ कंडीशंस हैं। इनमें लिवर डैमेज हो जाता है और उसके काम करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, हेपेटाइटिस से दुनियाभर में हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत होती है।

भारत जैसे विकासशील देश में दूषित भोजन-पानी एक बड़ी समस्या है। चूंकि हेपेटाइटिस संक्रामक भी है, इसलिए संक्रमण के अचानक इतने अधिक मामले बेहद चिंताजनक हैं।

आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में बात पीलिया और हेपेटाइटिस की। साथ ही जानेंगे कि-

  • पीलिया और हेपेटाइटिस में क्या कनेक्शन है?
  • इनसे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जी. एस. लांबा, डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- पीलिया (जॉन्डिस) क्या होता है?

जवाब- पीलिया एक हेल्थ कंडीशन है, जिसमें स्किन, आंखों का सफेद हिस्सा (स्कियरा) और नाखून पीले दिखने लगते हैं। यह शरीर में बिलीरुबिन नामक पिगमेंट (अपशिष्ट) के बढ़ने से होता है।

बिलीरुबिन रेड ब्लड सेल्स के टूटने (मरने) पर बनता है और आमतौर पर लिवर इसे फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो यह पिगमेंट ब्लड में जमा होने लगता है।

बिलीरुबिन पीले रंग का पिगमेंट है। यही वजह है कि इसके बढ़ने से शरीर में पीलापन दिखने लगता है। सरल शब्दों में कहें, तो पीलिया कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह लिवर में हो रही समस्या का संकेत है।

सवाल- पीलिया क्यों होता है?

जवाब- पीलिया तब होता है, जब खून में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इसके मुख्य कारण हैं-

  • रेड ब्लड सेल्स का सामान्य से अधिक टूटना (हेमोलिसिस)।
  • हेपेटाइटिस या अन्य लिवर इन्फेक्शन, जिसमें लिवर बिलीरुबिन को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता है।
  • पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) में रुकावट, जैसे पित्त की पथरी या ट्यूमर होने पर।
  • शराब का सेवन या कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से लिवर डैमेज होने पर।

लिवर सामान्य रूप से बिलीरुबिन को प्रोसेस करके स्टूल (मल) के साथ बाहर निकाल देता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो खून में बिलीरुबिन बढ़ जाता है और पीलिया के लक्षण दिखने लगते हैं।

सवाल- पीलिया कोई बीमारी है या ये किसी बीमारी का संकेत है?

जवाब- पीलिया अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। यह शरीर के भीतर चल रही किसी बीमारी का एक संकेत है। यह मुख्य रूप से इस बात का इशारा करता है कि लिवर में कोई समस्या है।

सवाल- बिलीरूबिन क्या होता है और हेल्दी बॉडी के लिए इसका संतुलित रहना क्यों जरूरी है?

जवाब- बिलीरुबिन एक पीले रंग का अपशिष्ट पदार्थ है। यह रेड ब्लड सेल्स के टूटने/मरने पर बनता है। दरअसल रेड ब्लड सेल्स का जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है, इसके बाद ये टूट (मर) जाती हैं। लिवर बिलीरुबिन को प्रोसेस करके स्टूल के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है।

अगर इसका स्तर संतुलित रहे तो शरीर सामान्य रूप से काम करता है। इसके कारण ही यूरिन और स्टूल का रंग येलो या ब्राउन होता है। लेकिन जब बिलीरुबिन बढ़ जाता है, तो पीलिया हो सकता है। यह लिवर या ब्लड से जुड़ी समस्या का संकेत देता है।

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस में क्या कनेक्शन और क्या फर्क है?

जवाब- पीलिया और हेपेटाइटिस दोनों लिवर से जुड़ी कंडीशंस हैं। इसके बावजूद दोनों में फर्क है।

  • पीलिया सिर्फ एक लक्षण है। इसमें शरीर पीला हो जाता है। ये कंडीशन शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने पर पैदा होती है।
  • वहीं हेपेटाइटिस लिवर में होने वाला इंफ्लेमेशन है, जो वायरस, टॉक्सिन्स या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण होता है। यह शराब के सेवन और दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी हो सकता है।
  • हेपेटाइटिस में लिवर कमजोर पड़ जाता है। इस कंडीशन में लिवर बिलीरुबिन को ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता है। इससे बिलीरुबिन खून में जमा होने लगता है, जिससे ‘पीलिया’ हो जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो हर हेपेटाइटिस से पीलिया हो सकता है। लेकिन ये जरूरी नहीं है कि पीलिया की वजह हर बार हेपेटाइटिस ही हो। पथरी, ट्यूमर या खून से जुड़ी बीमारी से भी पीलिया हो सकता है।

सवाल- हेपेटाइटिस कितने प्रकार का होता है और ये कैसे फैलता है?

जवाब- हेपेटाइटिस मुख्य रूप से 5 प्रकार का होता है। यह अलग-अलग कारणों से होता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या हेपेटाइटिस और पीलिया के लक्षण एक जैसे होते हैं?

जवाब- हेपेटाइटिस और पीलिया के कुछ लक्षण मिलते-जुलते हैं, लेकिन दोनों पूरी तरह से एक जैसे नहीं होते। नीचे दिए ग्राफिक से इसके लक्षणों काे जानिए-

सवाल- क्या हर पीलिया का कारण हेपेटाइटिस होता है?

जवाब- नहीं, हर पीलिया का कारण हेपेटाइटिस नहीं होता है। पीलिया तब होता है, जब शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है। बिलीरुबिन बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसेकि–

  • पित्त की नली में पथरी या ट्यूमर।
  • लिवर की अन्य बीमारियां।
  • खून की कुछ समस्याएं (जैसे हीमोलाइसिस, एनीमिया, ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर)।
  • कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स।
  • ज्यादा शराब का सेवन।

इसलिए हर पीलिया को हेपेटाइटिस मान लेना सही नहीं है।

सवाल- पीलिया या हेपेटाइटिस कब गंभीर रूप ले सकता है?

जवाब- अगर किसी को पहले से कोई लिवर प्रॉब्लम है या लिवर डैमेज है तो ये गंभीर रूप ले सकता है। हेपेटाइटिस B और C अपने आप में गंभीर हैं। इसमें समस्या की बात ये है कि इस कंडीशन की आखिरी स्टेज तक भी बहुत स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। इसके बावजूद लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर या कैंसर जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसलिए लिवर से जुड़ी कोई समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

इन स्थितियों में पीलिया भी गंभीर हो सकता है-

  • बिलीरुबिन लगातार बढ़ता रहे।
  • पेट में सूजन या तेज दर्द हो।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी/बेहोशी हो।
  • लंबे समय तक बुखार बना रहे।
  • यूरिन फ्रीक्वेंसी बहुत कम हो।

सवाल- हेपेटाइटिस और पीलिया का इलाज न होने से किन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है?

जवाब- इससे लिवर डैमेज हो सकता है। समस्या धीरे-धीरे बढ़कर जानलेवा भी बन सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस की जांच कैसे की जाती है?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर ये टेस्ट करवाते हैं-

  • बिलीरुबिन टेस्ट: खून में बिलीरुबिन का स्तर जानने के लिए।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT): लिवर सही काम कर रहा है या नहीं।
  • वायरल मार्कर टेस्ट: हेपेटाइटिस A, B, C आदि की पुष्टि के लिए।

इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पित्त नली या लिवर की स्थिति जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या गंभीर मामलों में बायोप्सी भी की जाती है। सही जांच से असली कारण पता चलता है और उसी अनुसार इलाज शुरू किया जाता है।

सवाल- हेपेटाइटिस का इलाज क्या है?

जवाब- हेपेटाइटिस का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। हर स्थिति में डॉक्टर की निगरानी जरूरी है।

हेपेटाइटिस A और E: ज्यादातर मामलों में आराम, हल्का भोजन और पर्याप्त लिक्विड से ठीक हो जाता है।

हेपेटाइटिस B और C: इसमें डॉक्टर की निगरानी जरूरी है। इलाज में एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं।

हेपेटाइटिस D: ये गंभीर कंडीशन है। इसका इलाज सीमित है। आमतौर पर ये हेपेटाइटिस उन लोगों को ही होता है, जो पहले से हेपेटाइटिस B से संक्रमित हैं।

सवाल- पीलिया और हेपेटाइटिस से कैसे बचें?

जवाब- पीलिया और हेपेटाइटिस से बचाव के लिए लिवर को सुरक्षित रखना और संक्रमण से बचाव जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या हेपेटाइटिस की कोई वैक्सीन भी उपलब्ध है?

जवाब- हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस B का टीका लिवर कैंसर से भी बचाता है। हालांकि, हेपेटाइटिस C के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

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