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Supreme Court accidents lack of lane driving on roads vehicle location tracking devices

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7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए।

कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1% वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी।

बिना डिवाइस फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें VLTD और पैनिक बटन नहीं लगे होंगे।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को गाड़ी निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि प्रोडक्शन के समय ही ये डिवाइस लगाए जाएं।

बेंच ने कहा कि ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन (Vahan) डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा।

स्पीड कंट्रोल डिवाइस भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है।

कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक डिटेल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें Vahan/Parivahan पोर्टल के आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कितने वाहनों में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए।

लेन ड्राइविंग के बारे में जानें…

सड़क पर बनी सफेद या पीली लाइनों के बीच गाड़ी चलाना ही लेन ड्राइविंग है। हर वाहन को अपनी तय लेन में चलना चाहिए। बिना जरूरत लेन बदलना खतरनाक माना जाता है।

लेन ड्राइविंग में गाड़ी चलाने का फायदा…

  • अचानक कट मारने की घटनाएं कम होती हैं।
  • ओवरटेक सुरक्षित तरीके से होता है।
  • ट्रैफिक जाम कम लगता है।
  • हाईवे पर गाड़ी पर कंट्रोल बेहतर रहता है।
  • सड़क हादसों का खतरा कम होता है।

सड़क पर लेन पहचानें…

  • सफेद टूटी लाइन → लेन बदल सकते हैं।
  • लगातार सफेद लाइन → लेन बदलना मना।
  • पीली लाइन → दो तरफ के ट्रैफिक को अलग करती है।
  • जेब्रा क्रॉसिंग → पैदल यात्रियों के लिए रास्ता।

————————————–

ये खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए, इन सड़कों पर भारी वाहन पार्किंग न हो

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए पूरे देश में कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

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कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1% वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी।

बिना डिवाइस फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें VLTD और पैनिक बटन नहीं लगे होंगे।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को गाड़ी निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि प्रोडक्शन के समय ही ये डिवाइस लगाए जाएं।

बेंच ने कहा कि ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन (Vahan) डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा।

स्पीड कंट्रोल डिवाइस भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है।

कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक डिटेल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें Vahan/Parivahan पोर्टल के आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कितने वाहनों में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए।

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सड़क पर बनी सफेद या पीली लाइनों के बीच गाड़ी चलाना ही लेन ड्राइविंग है। हर वाहन को अपनी तय लेन में चलना चाहिए। बिना जरूरत लेन बदलना खतरनाक माना जाता है।

लेन ड्राइविंग में गाड़ी चलाने का फायदा…

  • अचानक कट मारने की घटनाएं कम होती हैं।
  • ओवरटेक सुरक्षित तरीके से होता है।
  • ट्रैफिक जाम कम लगता है।
  • हाईवे पर गाड़ी पर कंट्रोल बेहतर रहता है।
  • सड़क हादसों का खतरा कम होता है।

सड़क पर लेन पहचानें…

  • सफेद टूटी लाइन → लेन बदल सकते हैं।
  • लगातार सफेद लाइन → लेन बदलना मना।
  • पीली लाइन → दो तरफ के ट्रैफिक को अलग करती है।
  • जेब्रा क्रॉसिंग → पैदल यात्रियों के लिए रास्ता।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए, इन सड़कों पर भारी वाहन पार्किंग न हो

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए पूरे देश में कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

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