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सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की एंट्री और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों वाली बेंच ने 16 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे कई अहम संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में एंट्री का विवाद है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में एंट्री पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजा गया। केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है। सबरीमाला मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। मामले की सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में CJI जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता का विषय है। केंद्र के मुताबिक, यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।

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सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

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