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Prateek Yadav Death Reason; Pulmonary Embolism Symptoms

Prateek Yadav Death Reason; Pulmonary Embolism Symptoms
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  • Prateek Yadav Death Reason; Pulmonary Embolism Symptoms | Lung Blood Clot Causes

10 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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हाल ही में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह दिवंगत नेता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। डॉक्टर्स ने उनकी मौत की वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ बताई है। इस कंडीशन में फेफड़ों की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हार्ट फेल हो जाता है।

‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ की गाइडलाइन 2026 के मुताबिक, पल्मोनरी एम्बॉलिज्म वस्कुलर (नसों से जुड़ी बीमारी) डेथ का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।

साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक ऑटोप्सी बेस्ड भारतीय स्टडी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीजों में करीब 16% मौतों की मुख्य वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ पाई गई। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि-

  • पल्मोनरी एम्बॉलिज्म क्या है?
  • किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म क्या है? जवाब- यह एक गंभीर हेल्थ कंडीशन है, जिसमें फेफड़ों की आर्टरीज में अचानक ब्लॉकेज हो जाता है और ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है।

इसमें शरीर के किसी हिस्से (ज्यादातर पैर की नसों) में बना ब्लड क्लॉट टूटकर खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। यह पल्मोनरी आर्टरी को ब्लॉक कर देता है।

ज्यादतर मामलों में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के कारण पैर की नसों में बने ब्लड क्लॉट ही फेफड़ों में जाकर ब्लॉकेज की वजह बनते हैं।

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) में क्या संबंध है?

जवाब- डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) और पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का सीधा कनेक्शन है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • DVT एक हेल्थ कंडीशन है, जिसके कारण शरीर की नसों (अक्सर पैरों) में ब्लड क्लॉट बनते हैं।
  • अगर ये क्लॉट वहीं बना रहे तो DVT रहता है, लेकिन जब यही क्लॉट टूटकर ब्लड के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां की नस को ब्लॉक कर देता है, तो इसे पल्मोनरी एम्बॉलिज्म कहते हैं।

यानी ज्यादातर मामलों में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म की शुरुआत DVT से ही होती है। इसलिए DVT को समय पर पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी होता है।

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म होने पर क्या संकेत दिखते हैं?

जवाब- ज्यादातर मामलों में इसके संकेत अचानक नजर आते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। ग्राफिक में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के सभी संकेत देखिए-

सवाल- डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के संकेत क्या हैं?

जवाब- इसके शुरुआती संकेत कई बार हल्के होते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। पॉइंटर्स में देखिए-

  • पैर में सूजन (अक्सर एक पैर में)।
  • पैर में दर्द या ऐंठन, खासकर पिंडली (काल्फ) में।
  • नसें को उभरना।
  • स्किन या उभरी नसों का लाल या नीला पड़ना।
  • स्किन सामान्य से ज्यादा गर्म रहना।
  • नसों के आसपास मसल्स टाइट होना।
  • भारीपन महसूस होना।
  • चलने या खड़े होने पर दर्द बढ़ना।

सवाल- अगर DVT के संकेत दिखें तो क्या तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

जवाब- हां। इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है या रुक सकता है।

सवाल- यह ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक कैसे पहुंच जाता है?

जवाब- नसों में बने क्लॉट कभी-कभी टूट जाते हैं। ये ब्लड के साथ बहते हुए नसों के जरिए हार्ट तक पहुंचते हैं। हार्ट जब ब्लड को पंप करता है तो ये क्लॉट्स फेफड़ों की आर्टरीज में भी पहुंच जाते हैं।

सवाल- शरीर में ब्लड क्लॉट बनता कैसे है?

जवाब- शरीर में ब्लड क्लॉट बनना एक सामान्य और नेचुरल प्रोसेस है।

  • यह बॉडी का खुद को प्रोटेक्ट करने का एक मैकेनिज्म है। शरीर में कहीं चोट या कट लगने पर ब्लड रोकने के लिए बॉडी क्लॉट्स बनाती है।
  • समस्या तब होती है, जब चोट के बिना ही नसों के अंदर ब्लड क्लॉट बनने लगते हैं।
  • ज्यादातर मामलों में यह DVT जैसी कंडीशन के कारण होता है।

सवाल- ब्लड क्लॉटिंग कहां-कहां हो सकती है?

जवाब- बॉडी में ब्लड वेसल्स का करीब 60,000 मील लंबा नेटवर्क होता है। इसमें कहीं भी ब्लड क्लॉट बन सकता है। इसके लक्षण क्लॉट के प्रकार और ऑर्गन्स के मुताबिक बदल सकते हैं।

पैर (DVT)- यह सबसे कॉमन है। इसमें पैरों की गहरी नसों में क्लॉट बनता है।

फेफड़े- फेफड़ों में ब्लड क्लॉट फंस जाता है। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है। जिस कारण पल्मोनरी एम्बॉलिज्म हो सकता है।

हार्ट- हार्ट आर्टरीज में क्लॉट बनता है। इससे हार्ट अटैक हो सकता है।

ब्रेन- ब्रेन की नस में क्लॉट बनने पर स्ट्रोक हो सकता है।

आंत/किडनी (रेयर)- ब्लड की सप्लाई रुकने से ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं।

सवाल- क्या यह अचानक होने वाली बीमारी है?

जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत पहले से शरीर में बने ब्लड क्लॉट (अक्सर पैरों की नसों में) से होती है, जो बाद में टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है।

सवाल- क्या यह हमेशा जानलेवा होती है?

जवाब- इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि क्लॉट कितना बड़ा है।

  • आमतौर पर छोटे क्लॉट दवाओं से ठीक हो जाते हैं। इनके रहते हुए भी ब्लड फ्लो होता रहता है।
  • अगर क्लॉट बड़ा है तो यह नस के बड़े हिस्से को ब्लॉक कर सकता है। फेफड़ों में पहुंचा तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का खतरा कुछ खास स्थितियों और लाइफस्टाइल फैक्टर्स में ज्यादा बढ़ जाता है। ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ के मुताबिक, इन रिस्क फैक्टर्स की पहचान समय पर करना बेहद जरूरी है। ग्राफिक में सभी रिस्क फैक्टर्स देखिए-

सवाल- इसका इलाज कैसे होता है?

जवाब- इसके ट्रीटमेंट का मकसद लंग्स के ब्लड क्लॉट को खत्म करना और नए क्लॉट बनने से रोकना होता है। इसके लिए दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

एंटीकोआगुलेंट्स (Anticoagulants)

  • ये दवाएं ब्लड को पतला रखती हैं।
  • इससे क्लॉटिंग बढ़ती नहीं है।
  • क्लॉटिंग को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं।

थ्रोम्बोलाइसिस (Thrombolysis)

  • इसमें दवाएं नस या कैथेटर(एक पतली ट्यूब है जिससे दवा सीधे नस में दी जाती है) के जरिए दी जाती हैं।
  • ये ब्लड क्लॉट को घोल देती हैं।
  • आमतौर पर जब ब्लड थिनर्स पर्याप्त न हों या स्थिति गंभीर हो तब इस्तेमाल होता है।

एम्बोलेक्टॉमी (Embolectomy)

  • इस प्रोसेस में ऑपरेशन करके लंग्स से क्लॉट निकाल दिया जाता है।

इन्फीरियर वेना कावा फिल्टर:

  • इसमें पेट की नस में एक छोटा डिवाइस लगाया जाता है।
  • यह क्लॉट को लंग्स तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लेता है।

सवाल- लाइफस्टाइल की कौन सी आदतें या गलतियां ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क बढ़ाती हैं?

जवाब- रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें ब्लड फ्लो धीमा कर देती हैं और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं। जैसे-

  • स्मोकिंग
  • कम पानी पीना
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल
  • लो फिजिकल एक्टिविटी
  • अनहेल्दी डाइट लेना (ज्यादा फैट और प्रोसेस्ड फूड)
  • शराब पीना
  • रोज 7-8 घंटे की नींद पूरी न करना
  • बिना डॉक्टर सलाह के हॉर्मोनल दवाएं लेना

सवाल- हेल्दी ब्लड फ्लो के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- ब्लड का सही फ्लो बॉडी के हर अंग तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने के लिए जरूरी है। खराब लाइफस्टाइल से ब्लड क्लॉट और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है। ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल टिप्स-

सवाल- कौन-से फूड ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क कम करते हैं?

जवाब- कुछ फूड्स ब्लड थिनर का काम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे ब्लड क्लॉट बनने का खतरा कम हो सकता है। ग्राफिक में देखिए-

याद रखें, छोटी लगने वाली समस्या जैसे पैरों में सूजन या दर्द कभी-कभी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। इसलिए समय पर जांच और इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।

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10 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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हाल ही में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह दिवंगत नेता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। डॉक्टर्स ने उनकी मौत की वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ बताई है। इस कंडीशन में फेफड़ों की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हार्ट फेल हो जाता है।

‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ की गाइडलाइन 2026 के मुताबिक, पल्मोनरी एम्बॉलिज्म वस्कुलर (नसों से जुड़ी बीमारी) डेथ का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।

साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक ऑटोप्सी बेस्ड भारतीय स्टडी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीजों में करीब 16% मौतों की मुख्य वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ पाई गई। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि-

  • पल्मोनरी एम्बॉलिज्म क्या है?
  • किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म क्या है? जवाब- यह एक गंभीर हेल्थ कंडीशन है, जिसमें फेफड़ों की आर्टरीज में अचानक ब्लॉकेज हो जाता है और ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है।

इसमें शरीर के किसी हिस्से (ज्यादातर पैर की नसों) में बना ब्लड क्लॉट टूटकर खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। यह पल्मोनरी आर्टरी को ब्लॉक कर देता है।

ज्यादतर मामलों में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के कारण पैर की नसों में बने ब्लड क्लॉट ही फेफड़ों में जाकर ब्लॉकेज की वजह बनते हैं।

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  • DVT एक हेल्थ कंडीशन है, जिसके कारण शरीर की नसों (अक्सर पैरों) में ब्लड क्लॉट बनते हैं।
  • अगर ये क्लॉट वहीं बना रहे तो DVT रहता है, लेकिन जब यही क्लॉट टूटकर ब्लड के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां की नस को ब्लॉक कर देता है, तो इसे पल्मोनरी एम्बॉलिज्म कहते हैं।

यानी ज्यादातर मामलों में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म की शुरुआत DVT से ही होती है। इसलिए DVT को समय पर पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी होता है।

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म होने पर क्या संकेत दिखते हैं?

जवाब- ज्यादातर मामलों में इसके संकेत अचानक नजर आते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। ग्राफिक में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के सभी संकेत देखिए-

सवाल- डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के संकेत क्या हैं?

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  • पैर में सूजन (अक्सर एक पैर में)।
  • पैर में दर्द या ऐंठन, खासकर पिंडली (काल्फ) में।
  • नसें को उभरना।
  • स्किन या उभरी नसों का लाल या नीला पड़ना।
  • स्किन सामान्य से ज्यादा गर्म रहना।
  • नसों के आसपास मसल्स टाइट होना।
  • भारीपन महसूस होना।
  • चलने या खड़े होने पर दर्द बढ़ना।

सवाल- अगर DVT के संकेत दिखें तो क्या तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

जवाब- हां। इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है या रुक सकता है।

सवाल- यह ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक कैसे पहुंच जाता है?

जवाब- नसों में बने क्लॉट कभी-कभी टूट जाते हैं। ये ब्लड के साथ बहते हुए नसों के जरिए हार्ट तक पहुंचते हैं। हार्ट जब ब्लड को पंप करता है तो ये क्लॉट्स फेफड़ों की आर्टरीज में भी पहुंच जाते हैं।

सवाल- शरीर में ब्लड क्लॉट बनता कैसे है?

जवाब- शरीर में ब्लड क्लॉट बनना एक सामान्य और नेचुरल प्रोसेस है।

  • यह बॉडी का खुद को प्रोटेक्ट करने का एक मैकेनिज्म है। शरीर में कहीं चोट या कट लगने पर ब्लड रोकने के लिए बॉडी क्लॉट्स बनाती है।
  • समस्या तब होती है, जब चोट के बिना ही नसों के अंदर ब्लड क्लॉट बनने लगते हैं।
  • ज्यादातर मामलों में यह DVT जैसी कंडीशन के कारण होता है।

सवाल- ब्लड क्लॉटिंग कहां-कहां हो सकती है?

जवाब- बॉडी में ब्लड वेसल्स का करीब 60,000 मील लंबा नेटवर्क होता है। इसमें कहीं भी ब्लड क्लॉट बन सकता है। इसके लक्षण क्लॉट के प्रकार और ऑर्गन्स के मुताबिक बदल सकते हैं।

पैर (DVT)- यह सबसे कॉमन है। इसमें पैरों की गहरी नसों में क्लॉट बनता है।

फेफड़े- फेफड़ों में ब्लड क्लॉट फंस जाता है। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है। जिस कारण पल्मोनरी एम्बॉलिज्म हो सकता है।

हार्ट- हार्ट आर्टरीज में क्लॉट बनता है। इससे हार्ट अटैक हो सकता है।

ब्रेन- ब्रेन की नस में क्लॉट बनने पर स्ट्रोक हो सकता है।

आंत/किडनी (रेयर)- ब्लड की सप्लाई रुकने से ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं।

सवाल- क्या यह अचानक होने वाली बीमारी है?

जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत पहले से शरीर में बने ब्लड क्लॉट (अक्सर पैरों की नसों में) से होती है, जो बाद में टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है।

सवाल- क्या यह हमेशा जानलेवा होती है?

जवाब- इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि क्लॉट कितना बड़ा है।

  • आमतौर पर छोटे क्लॉट दवाओं से ठीक हो जाते हैं। इनके रहते हुए भी ब्लड फ्लो होता रहता है।
  • अगर क्लॉट बड़ा है तो यह नस के बड़े हिस्से को ब्लॉक कर सकता है। फेफड़ों में पहुंचा तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का खतरा कुछ खास स्थितियों और लाइफस्टाइल फैक्टर्स में ज्यादा बढ़ जाता है। ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ के मुताबिक, इन रिस्क फैक्टर्स की पहचान समय पर करना बेहद जरूरी है। ग्राफिक में सभी रिस्क फैक्टर्स देखिए-

सवाल- इसका इलाज कैसे होता है?

जवाब- इसके ट्रीटमेंट का मकसद लंग्स के ब्लड क्लॉट को खत्म करना और नए क्लॉट बनने से रोकना होता है। इसके लिए दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

एंटीकोआगुलेंट्स (Anticoagulants)

  • ये दवाएं ब्लड को पतला रखती हैं।
  • इससे क्लॉटिंग बढ़ती नहीं है।
  • क्लॉटिंग को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं।

थ्रोम्बोलाइसिस (Thrombolysis)

  • इसमें दवाएं नस या कैथेटर(एक पतली ट्यूब है जिससे दवा सीधे नस में दी जाती है) के जरिए दी जाती हैं।
  • ये ब्लड क्लॉट को घोल देती हैं।
  • आमतौर पर जब ब्लड थिनर्स पर्याप्त न हों या स्थिति गंभीर हो तब इस्तेमाल होता है।

एम्बोलेक्टॉमी (Embolectomy)

  • इस प्रोसेस में ऑपरेशन करके लंग्स से क्लॉट निकाल दिया जाता है।

इन्फीरियर वेना कावा फिल्टर:

  • इसमें पेट की नस में एक छोटा डिवाइस लगाया जाता है।
  • यह क्लॉट को लंग्स तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लेता है।

सवाल- लाइफस्टाइल की कौन सी आदतें या गलतियां ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क बढ़ाती हैं?

जवाब- रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें ब्लड फ्लो धीमा कर देती हैं और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं। जैसे-

  • स्मोकिंग
  • कम पानी पीना
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल
  • लो फिजिकल एक्टिविटी
  • अनहेल्दी डाइट लेना (ज्यादा फैट और प्रोसेस्ड फूड)
  • शराब पीना
  • रोज 7-8 घंटे की नींद पूरी न करना
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जवाब- ब्लड का सही फ्लो बॉडी के हर अंग तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने के लिए जरूरी है। खराब लाइफस्टाइल से ब्लड क्लॉट और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है। ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल टिप्स-

सवाल- कौन-से फूड ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क कम करते हैं?

जवाब- कुछ फूड्स ब्लड थिनर का काम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे ब्लड क्लॉट बनने का खतरा कम हो सकता है। ग्राफिक में देखिए-

याद रखें, छोटी लगने वाली समस्या जैसे पैरों में सूजन या दर्द कभी-कभी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। इसलिए समय पर जांच और इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।

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