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knee pain at 30| knee problems in youth|30 की उम्र में युवाओं को म‍िल रहा दर्द और धोखा, अपने नहीं घुटने हैं धोखेबाज, क्या है वजह? टॉप सर्जन ने बता दी

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आखिर क्यों कमजोर हो रहे हैं युवाओं के घुटने?
घुटना शरीर के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा दबाव सहने वाले जोड़ों में से एक है. चलना, बैठना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना, वजन उठाना. लगभग हर गतिविधि में घुटनों की भूमिका होती है. लेकिन जब शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलता और आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तो घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे यह दबाव कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने लगता है और दर्द की शुरुआत हो जाती है.

आज का शहरी जीवन इस समस्या को और बढ़ा रहा है. सुबह से रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना, घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना और दिनभर बहुत कम चलना-फिरना शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है. लगातार बैठने से क्वाड्रिसेप्स और हिप मसल्स कमजोर होने लगती हैं, जो घुटनों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब ये मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो पूरा दबाव सीधे घुटनों के कार्टिलेज पर पड़ता है और घिसाव तेजी से बढ़ने लगता है.

कम उम्र में घुटनों के दर्द के पीछे छिपे बड़े कारण

1. लंबे समय तक बैठकर काम करना
डेस्क जॉब आज घुटनों की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है. लगातार कई घंटों तक बैठने से घुटनों की मूवमेंट कम हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है. यही कारण है कि कई युवा मीटिंग के बाद उठते समय जकड़न महसूस करते हैं या लंबे समय तक ड्राइव करने के बाद घुटनों में दर्द महसूस करते हैं.

शुरुआती संकेतों में शामिल हैं-

2. तेजी से बढ़ता वजन और मोटापा
मोटापा घुटनों के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटनों पर दबाव बढ़ाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, चलने के दौरान शरीर का हर अतिरिक्त किलो वजन घुटनों पर कई गुना अधिक दबाव डालता है.
रिसर्च के मुताबिक, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा लगभग 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि पुरुषों में यह खतरा लगभग 5 गुना तक हो सकता है. यही कारण है कि कम उम्र में बढ़ता वजन अब घुटनों की बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा है.

3. “वीकेंड वॉरियर” फिटनेस कल्चर
आजकल कई लोग पूरे सप्ताह शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं और फिर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट, रनिंग, ट्रेकिंग या खेलकूद शुरू कर देते हैं. बिना सही तैयारी, बिना स्ट्रेचिंग और गलत तकनीक के साथ किया गया हाई-इम्पैक्ट वर्कआउट घुटनों पर अचानक अत्यधिक दबाव डालता है.
कंक्रीट सतह पर दौड़ना, गलत फुटवियर पहनना और जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना भी सूजन और माइक्रो-इंजरी का कारण बन सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर घुटनों की संरचना प्रभावित होने लगती है.

4. कार्टिलेज का शुरुआती घिसाव
घुटनों में होने वाला नुकसान हमेशा तुरंत दर्द के रूप में सामने नहीं आता. कई बार कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसना शुरू हो जाता है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसका एहसास तक नहीं होता. डॉक्टरों के मुताबिक, 30 की उम्र तक कई लोगों में शुरुआती कार्टिलेज डैमेज और बोन स्पर्स बनने लगते हैं.
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही शुरुआती बदलाव आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में बदल सकते हैं.

5. पोषण की कमी और लगातार तनाव
घुटनों की मजबूती केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है. विटामिन D, कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन की कमी हड्डियों और मांसपेशियों को कमजोर बनाती है. इसके अलावा, लगातार तनाव और खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है.
फास्ट फूड, प्रोसेस्ड डाइट और अनियमित खानपान भी जोड़ों की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं.

किन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

अगर कम उम्र में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए:

क्या कम उम्र में घुटनों की समस्या को रोका जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में घुटनों की अधिकांश समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में स्थिति को सुधारा भी जा सकता है. इसके लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी बदलाव अपनाने की जरूरत है.

घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
30 की उम्र में घुटनों का दर्द अब दुर्लभ नहीं रहा, लेकिन इसे सामान्य समझना बड़ी गलती हो सकती है. शरीर समय रहते संकेत देना शुरू कर देता है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर क्रॉनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस, लगातार दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मजबूत मांसपेशियां और सही जीवनशैली लंबे समय तक जोड़ों को स्वस्थ रखने की सबसे प्रभावी रणनीति हैं. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके कम उम्र में होने वाले घुटनों के दर्द से काफी हद तक बचा जा सकता है.शरीर हमेशा समय रहते चेतावनी देता है. जरूरत सिर्फ उसे समझने और सही समय पर कदम उठाने की है.

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आखिर क्यों कमजोर हो रहे हैं युवाओं के घुटने?
घुटना शरीर के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा दबाव सहने वाले जोड़ों में से एक है. चलना, बैठना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना, वजन उठाना. लगभग हर गतिविधि में घुटनों की भूमिका होती है. लेकिन जब शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलता और आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तो घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे यह दबाव कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने लगता है और दर्द की शुरुआत हो जाती है.

आज का शहरी जीवन इस समस्या को और बढ़ा रहा है. सुबह से रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना, घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना और दिनभर बहुत कम चलना-फिरना शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है. लगातार बैठने से क्वाड्रिसेप्स और हिप मसल्स कमजोर होने लगती हैं, जो घुटनों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब ये मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो पूरा दबाव सीधे घुटनों के कार्टिलेज पर पड़ता है और घिसाव तेजी से बढ़ने लगता है.

कम उम्र में घुटनों के दर्द के पीछे छिपे बड़े कारण

1. लंबे समय तक बैठकर काम करना
डेस्क जॉब आज घुटनों की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है. लगातार कई घंटों तक बैठने से घुटनों की मूवमेंट कम हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है. यही कारण है कि कई युवा मीटिंग के बाद उठते समय जकड़न महसूस करते हैं या लंबे समय तक ड्राइव करने के बाद घुटनों में दर्द महसूस करते हैं.

शुरुआती संकेतों में शामिल हैं-

2. तेजी से बढ़ता वजन और मोटापा
मोटापा घुटनों के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटनों पर दबाव बढ़ाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, चलने के दौरान शरीर का हर अतिरिक्त किलो वजन घुटनों पर कई गुना अधिक दबाव डालता है.
रिसर्च के मुताबिक, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा लगभग 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि पुरुषों में यह खतरा लगभग 5 गुना तक हो सकता है. यही कारण है कि कम उम्र में बढ़ता वजन अब घुटनों की बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा है.

3. “वीकेंड वॉरियर” फिटनेस कल्चर
आजकल कई लोग पूरे सप्ताह शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं और फिर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट, रनिंग, ट्रेकिंग या खेलकूद शुरू कर देते हैं. बिना सही तैयारी, बिना स्ट्रेचिंग और गलत तकनीक के साथ किया गया हाई-इम्पैक्ट वर्कआउट घुटनों पर अचानक अत्यधिक दबाव डालता है.
कंक्रीट सतह पर दौड़ना, गलत फुटवियर पहनना और जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना भी सूजन और माइक्रो-इंजरी का कारण बन सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर घुटनों की संरचना प्रभावित होने लगती है.

4. कार्टिलेज का शुरुआती घिसाव
घुटनों में होने वाला नुकसान हमेशा तुरंत दर्द के रूप में सामने नहीं आता. कई बार कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसना शुरू हो जाता है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसका एहसास तक नहीं होता. डॉक्टरों के मुताबिक, 30 की उम्र तक कई लोगों में शुरुआती कार्टिलेज डैमेज और बोन स्पर्स बनने लगते हैं.
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही शुरुआती बदलाव आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में बदल सकते हैं.

5. पोषण की कमी और लगातार तनाव
घुटनों की मजबूती केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है. विटामिन D, कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन की कमी हड्डियों और मांसपेशियों को कमजोर बनाती है. इसके अलावा, लगातार तनाव और खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है.
फास्ट फूड, प्रोसेस्ड डाइट और अनियमित खानपान भी जोड़ों की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं.

किन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

अगर कम उम्र में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए:

क्या कम उम्र में घुटनों की समस्या को रोका जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में घुटनों की अधिकांश समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में स्थिति को सुधारा भी जा सकता है. इसके लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी बदलाव अपनाने की जरूरत है.

घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
30 की उम्र में घुटनों का दर्द अब दुर्लभ नहीं रहा, लेकिन इसे सामान्य समझना बड़ी गलती हो सकती है. शरीर समय रहते संकेत देना शुरू कर देता है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर क्रॉनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस, लगातार दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मजबूत मांसपेशियां और सही जीवनशैली लंबे समय तक जोड़ों को स्वस्थ रखने की सबसे प्रभावी रणनीति हैं. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके कम उम्र में होने वाले घुटनों के दर्द से काफी हद तक बचा जा सकता है.शरीर हमेशा समय रहते चेतावनी देता है. जरूरत सिर्फ उसे समझने और सही समय पर कदम उठाने की है.

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