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US H-1B & Green Card Rules Tightened

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18 मिनट पहले

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अमेरिका ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय IT इंजीनियरों, टेक कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है।

नई नीति के तहत अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सिर्फ बहुत खास परिस्थितियों में ही अमेरिका के अंदर से ग्रीन कार्ड आवेदन मंजूर करें।

अब ज्यादातर लोगों को अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलेट के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया को कांसुलर प्रोसेसिंग कहा जाता है।

अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूर किए गए कुल H-1B आवेदनों में करीब 71% भारतीय हैं।

ऐसे में नए नियमों का सीधा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। कई भारतीय पिछले 10 से 15 साल से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। अब अंतिम चरण में नियम बदलने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

कई लोग अमेरिका में घर खरीद चुके हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई भी वहीं चल रही है। ऐसे में भारत लौटकर वीजा प्रक्रिया पूरी करने की शर्त उनके लिए नई चिंता लेकर आई है।

H-1B अमेरिका का एक स्पेशल वर्क वीजा है, जिसके जरिए विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक सेक्टर के कर्मचारी करते हैं। बाद में इनमें से कई लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं ताकि वे अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकें।

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बांग्लादेश ने अमेरिका को दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों के इस्तेमाल की इजाजत देने का फैसला किया है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीक्रेट जानकारी शेयर करने को लेकर भी समझौता हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच कुल तीन बड़े समझौते हुए हैं। इन समझौतों के बाद बंगाल के खाड़ी रीजन में अमेरिका की मौजूदगी और प्रभाव काफी बढ़ सकता है।

अमेरिका को बांग्लादेश के चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज कर सकेंगे।

इससे अमेरिका को हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। चिटगांव बंदरगाह भारत के अंडमान-निकोबार क्षेत्र से सिर्फ 1100 किमी दूर है। पढ़ें पूरी खबर…

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नई नीति के तहत अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सिर्फ बहुत खास परिस्थितियों में ही अमेरिका के अंदर से ग्रीन कार्ड आवेदन मंजूर करें।

अब ज्यादातर लोगों को अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलेट के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया को कांसुलर प्रोसेसिंग कहा जाता है।

अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूर किए गए कुल H-1B आवेदनों में करीब 71% भारतीय हैं।

ऐसे में नए नियमों का सीधा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। कई भारतीय पिछले 10 से 15 साल से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। अब अंतिम चरण में नियम बदलने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

कई लोग अमेरिका में घर खरीद चुके हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई भी वहीं चल रही है। ऐसे में भारत लौटकर वीजा प्रक्रिया पूरी करने की शर्त उनके लिए नई चिंता लेकर आई है।

H-1B अमेरिका का एक स्पेशल वर्क वीजा है, जिसके जरिए विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक सेक्टर के कर्मचारी करते हैं। बाद में इनमें से कई लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं ताकि वे अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकें।

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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच कुल तीन बड़े समझौते हुए हैं। इन समझौतों के बाद बंगाल के खाड़ी रीजन में अमेरिका की मौजूदगी और प्रभाव काफी बढ़ सकता है।

अमेरिका को बांग्लादेश के चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज कर सकेंगे।

इससे अमेरिका को हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। चिटगांव बंदरगाह भारत के अंडमान-निकोबार क्षेत्र से सिर्फ 1100 किमी दूर है। पढ़ें पूरी खबर…

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