Wednesday, 28 Oct 2026 | 03:26 AM

Trending :

EXCLUSIVE

What is difference between Avimukteshwaranand and Asaram Bapu Case: avimukteshwaranand pocso case | up police | क्या अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे जेल, यौन शोषण के आरोप कितने गंभीर, आसाराम बापू से कितना अलग है मामला?

google-color.svg

नई दिल्ली. क्या ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यौन शोषण के आरोप में बहुत जल्द गिरफ्तार होने वाले हैं? पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के सामने अब क्या-क्या कानूनी विकल्प बच गए हैं? अविमुक्तेश्वरानंद का मामला आसाराम बापू वाले मामले से कितना अलग है? क्या पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय न्याय संहिता 2023 अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि को जेल की सलाखों तक पहुंचा देगा? अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में दर्ज एफआईआर को लेकर अब धार्मिक और कानूनी गलियारों में हलचल मच गई है. प्रयागराज में माघ मेला 2025-26 के दौरान दो नाबालिग बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं.

21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आरोपों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 साथ ही POCSO एक्ट की धारा 3, 5, 9 और 17 शामिल हैं, जो यौन हमला, गैंग असॉल्ट और नाबालिगों के शोषण से संबंधित हैं.

क्या अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी होगी?

कानूनी रूप से देखा जाए तो पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामले बेहद गंभीर और गैर-जमानती होते हैं. एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. खासकर जब मामला नाबालिगों से जुड़ा हो. हालांकि, गिरफ्तारी केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा जुटाए गए शुरुआती साक्ष्यों और पीड़ितों के बयानों जो धारा 164 के तहत की गंभीरता पर निर्भर करेगी. यदि जांच एजेंसी को लगता है कि आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है, तो गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो जाती है.

अविमुक्तेश्वरानंद के पास अब क्या विकल्प बचे हैं?

एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास मुख्य रूप से तीन कानूनी विकल्प मौजूद हैं:

1. अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर सकते हैं.
2. 2. FIR को चुनौती (Quashing of FIR): वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग कर सकते हैं, यदि वे यह साबित कर सकें कि यह मामला पूरी तरह फर्जी या दुर्भावनापूर्ण है.
3. जांच में सहयोग: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अब खुद पुलिस के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख सकते हैं और अपनी बेगुनाही के सबूत पेश कर सकते हैं.

आशाराम बापू और अविमुक्तेश्वरानंद: क्या मामला एक जैसा है?

अक्सर लोग इसकी तुलना आशाराम बापू मामले से कर रहे हैं, लेकिन दोनों में कुछ बुनियादी समानताएं और अंतर हैं. दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा की आड़ में यौन शोषण का आरोप लगाया है. दोनों पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगी हैं. लेकिन आशाराम के खिलाफ पुलिस ने सीधे एफआईआर दर्ज की थी, जबकि अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, क्योंकि पुलिस ने शुरुआत में केस दर्ज नहीं किया था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक साजिश करार दिया है और शिकायतकर्ता के हिस्ट्रीशीटर होने का दावा किया है.

पॉक्सो एक्ट में सजा के क्या प्रावधान हैं?

अविमुक्तेश्वरानंद पर अब पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता 2023 के मामला चलेगा. पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में गंभीर मर्मभेदी यौन हमला के लिए न्यूनतम 20 साल की कैद, जिसे आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है. बीएनएस 2023 की धारा 64/65 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है. यदि पीड़िता 12 साल से कम है तो मौत की सजा तक का प्रावधान है.

कानून के जानकारों का मानना है कि अदालत ने केवल एफआईआर का आदेश दिया है. इसका मतलब यह नहीं कि दोष सिद्ध हो गया है. चूंकि शिकायतकर्ता का पिछला रिकॉर्ड विवादित बताया जा रहा है, इसलिए पुलिस को साक्ष्यों विशेषकर शिकायतकर्ता द्वारा सौंपी गई सीडी की फॉरेंसिक जांच बहुत बारीकी से करनी होगी. पॉक्सो के मामलों में अदालतें अक्सर बहुत सख्त रुख अपनाती हैं, इसलिए आरोपी के लिए कानूनी लड़ाई चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Passenger Opens Emergency Gate on Air Arabia Flight

May 3, 2026/
1:58 pm

चेन्नई7 मिनट पहले कॉपी लिंक चेन्नई एयरपोर्ट पर घटना रविवार सुबह करीब 3:25 बजे हुई। – फाइल फोटो चेन्नई इंटरनेशनल...

सीहोर में 9 साल की बेटी की हत्या:मां और उसका प्रेमी गिरफ्तार; प्रेम प्रसंग में रोड़ा बन रही थी, इसलिए रची थी साजिश

February 21, 2026/
6:32 pm

सीहोर जिले के रेहटी थाना क्षेत्र के ग्राम बाबरी में 9 वर्षीय बालिका राधिका की गला घोंटकर हत्या करने के...

भोपाल में मृत बछड़ा फेंकने वाला गिरफ्तार:आरोपी को पकड़ने पुलिस ने 400 सीसीटीवी खंगाले; चमड़े के पर्स-बटुए बनाता है

March 29, 2026/
9:42 pm

भोपाल के तलैया थाना क्षेत्र में काली मंदिर के पास सड़क किनारे मृत बछड़ा फेंककर धार्मिक भावनाएं भड़काने की घटना...

कांग्रेस कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन:छतरपुर में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदर्शन, पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई

February 21, 2026/
10:52 pm

छतरपुर में शनिवार शाम भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। एआई...

रावण की लंका और अशोक वाटिका अब कैसी दिखती है:एक्टर प्रदीप काबरा ने श्रीलंका से शेयर कीं रामायण से जुड़े स्थलों की झलकियां

June 28, 2026/
3:02 pm

एक्टर प्रदीप काबरा हाल ही में श्रीलंका यात्रा पर गए, जहां उन्होंने ‘रामायण’ से जुड़े बताए जाने वाले स्थलों की...

West Bengal poll will be held in two phases on April 23 and April 29.

April 11, 2026/
8:35 am

आखरी अपडेट:11 अप्रैल, 2026, 08:35 IST वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने गठबंधन तनाव, खड़गे की टिप्पणियों और असम के सीएम की...

PM Modi Meets President Herzog, Defense Deal Likely

February 26, 2026/
7:50 am

तेल अवीव20 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी बुधवार को इजराइल के दौरे पर पहुंचे थे। आज यात्रा का दूसरा...

राजनीति

What is difference between Avimukteshwaranand and Asaram Bapu Case: avimukteshwaranand pocso case | up police | क्या अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे जेल, यौन शोषण के आरोप कितने गंभीर, आसाराम बापू से कितना अलग है मामला?

google-color.svg

नई दिल्ली. क्या ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यौन शोषण के आरोप में बहुत जल्द गिरफ्तार होने वाले हैं? पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के सामने अब क्या-क्या कानूनी विकल्प बच गए हैं? अविमुक्तेश्वरानंद का मामला आसाराम बापू वाले मामले से कितना अलग है? क्या पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय न्याय संहिता 2023 अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि को जेल की सलाखों तक पहुंचा देगा? अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में दर्ज एफआईआर को लेकर अब धार्मिक और कानूनी गलियारों में हलचल मच गई है. प्रयागराज में माघ मेला 2025-26 के दौरान दो नाबालिग बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं.

21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आरोपों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 साथ ही POCSO एक्ट की धारा 3, 5, 9 और 17 शामिल हैं, जो यौन हमला, गैंग असॉल्ट और नाबालिगों के शोषण से संबंधित हैं.

क्या अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी होगी?

कानूनी रूप से देखा जाए तो पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामले बेहद गंभीर और गैर-जमानती होते हैं. एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. खासकर जब मामला नाबालिगों से जुड़ा हो. हालांकि, गिरफ्तारी केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा जुटाए गए शुरुआती साक्ष्यों और पीड़ितों के बयानों जो धारा 164 के तहत की गंभीरता पर निर्भर करेगी. यदि जांच एजेंसी को लगता है कि आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है, तो गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो जाती है.

अविमुक्तेश्वरानंद के पास अब क्या विकल्प बचे हैं?

एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास मुख्य रूप से तीन कानूनी विकल्प मौजूद हैं:

1. अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर सकते हैं.
2. 2. FIR को चुनौती (Quashing of FIR): वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग कर सकते हैं, यदि वे यह साबित कर सकें कि यह मामला पूरी तरह फर्जी या दुर्भावनापूर्ण है.
3. जांच में सहयोग: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अब खुद पुलिस के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख सकते हैं और अपनी बेगुनाही के सबूत पेश कर सकते हैं.

आशाराम बापू और अविमुक्तेश्वरानंद: क्या मामला एक जैसा है?

अक्सर लोग इसकी तुलना आशाराम बापू मामले से कर रहे हैं, लेकिन दोनों में कुछ बुनियादी समानताएं और अंतर हैं. दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा की आड़ में यौन शोषण का आरोप लगाया है. दोनों पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगी हैं. लेकिन आशाराम के खिलाफ पुलिस ने सीधे एफआईआर दर्ज की थी, जबकि अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, क्योंकि पुलिस ने शुरुआत में केस दर्ज नहीं किया था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक साजिश करार दिया है और शिकायतकर्ता के हिस्ट्रीशीटर होने का दावा किया है.

पॉक्सो एक्ट में सजा के क्या प्रावधान हैं?

अविमुक्तेश्वरानंद पर अब पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता 2023 के मामला चलेगा. पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में गंभीर मर्मभेदी यौन हमला के लिए न्यूनतम 20 साल की कैद, जिसे आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है. बीएनएस 2023 की धारा 64/65 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है. यदि पीड़िता 12 साल से कम है तो मौत की सजा तक का प्रावधान है.

कानून के जानकारों का मानना है कि अदालत ने केवल एफआईआर का आदेश दिया है. इसका मतलब यह नहीं कि दोष सिद्ध हो गया है. चूंकि शिकायतकर्ता का पिछला रिकॉर्ड विवादित बताया जा रहा है, इसलिए पुलिस को साक्ष्यों विशेषकर शिकायतकर्ता द्वारा सौंपी गई सीडी की फॉरेंसिक जांच बहुत बारीकी से करनी होगी. पॉक्सो के मामलों में अदालतें अक्सर बहुत सख्त रुख अपनाती हैं, इसलिए आरोपी के लिए कानूनी लड़ाई चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.