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Married relationships are no longer trustworthy, they rely on surveillance.

Married relationships are no longer trustworthy, they rely on surveillance.
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  • Investigation: Married Relationships Are No Longer Trustworthy, They Rely On Surveillance.

मनप्रीत कौर. लुधियाना22 मिनट पहले

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पूरे पंजाब में एक महीने में करीब 300 तक केस एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के एजेंसियों के पास सॉल्व होने के लिए आ रहे हैं। – सिम्बॉलिक इमेज

शादीशुदा रिश्तों पर शक अब घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफे​यर की आशंका में कपल प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों तक भी पहुंच रहे हैं। एजेंसियों के मुताबिक, उनके पास आने वाले कुल केसों में करीब 40 प्रतिशत मामले एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से जुड़े होते हैं। एजेंसियों का दावा है कि 90 प्रतिशत केसों में शक सही निकलता है, जबकि कुछ मामलों में शक बेबुनियाद भी साबित होता है यानी हर दस में नौ शक सही निकल रहे हैं। हालांकि डिटेक्टिव एजेंसियों तक पहुंचना कोई तात्कालिक फैसला नहीं होता।

ज्यादातर कपल पहले अपने स्तर पर फोन, सोशल मीडिया, व्यवहार और दिनचर्या में आए बदलावों को समझने की कोशिश करते हैं। जब शक गहराता है और रिश्तों में टकराव बढ़ने लगता है, तब सबूत जुटाने के लिए एजेंसी हायर की जाती है। इस प्रक्रिया में वक्त भी लगता है और खर्च भी भारी होता है।

एक दिन की फिजिकल सर्विलांस का खर्च 6 से 7 हजार रुपए तक होता है, जबकि एक हफ्ते की जांच 40 से 50 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। डिटेक्टिव एजेंसियों के अनुसार, एनआरआई इनक्वायरी तेजी से बढ़ रही हैं। इसी वजह से दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों की एजेंसियां भी पंजाब में सक्रिय हो रही हैं। पूरे पंजाब में एक महीने में करीब 300 तक केस एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के एजेंसियों के पास सॉल्व होने के लिए आ रहे हैं।

चार केस स्टडी से निकला सच : शक ने बदली दिशा, सबूत ने तय किया अंजाम

केस -1: जांच के बाद भी पूरी तरह साफ नहीं हुई तस्वीर

यूके से रजिस्टर हुआ यह मामला दसूहा से जुड़ा था। पत्नी विदेश में रहती है और भारत 15 दिन के लिए आई थी। लगातार फोन बिजी, बातचीत में दूरी और बदला हुआ व्यवहार पति की शक की वजह था। एजेंसी ने मूवमेंट और कॉन्टैक्ट्स को ट्रैक किया, लेकिन कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। यह मामला इस बात का उदाहरण बना कि हर शक सच में नहीं बदलता और कई बार जांच रिश्तों को टूटने से बचा भी लेती है।

केस -2: आर्मी ऑफिसर की गैरमौजूदगी में टूटा रिश्ता

यह केस आर्मी ऑफिसर से जुड़ा था, जिसकी पोस्टिंग विदेश में थी, जबकि पत्नी जालंधर में रह रही थी। पत्नी का खुद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा था, लेकिन वह इसी बीच बच्चों को पिता के खिलाफ भड़काती रही। बच्चों के सामने पिता की छवि खराब की जा रही थी, जिससे वे पिता से बातचीत तक बंद कर चुके थे। पति ने डिटेक्टिव हायर किया। एजेंसी ने फिजिकल सर्विलांस शुरू किया और मूवमेंट के साथ मुलाकातों पर नजर रखी, तब मामले का खुलासा हुआ।

केस -3: ऑफिस अफेयर का शक, सड़क पर हुई हाथापाई

मोहाली में रियल एस्टेट से जुड़े एक व्यक्ति पर उसकी पत्नी को शक था कि उसका ऑफिस में ही किसी के साथ अफेयर है। ऑफिस के बाहर और रोड पर मुलाकातों के सबूत मिले। जब पत्नी को मौके पर बुलाया गया तो बात बहस से शुरू होकर हाथापाई तक पहुंच गई। सार्वजनिक जगह पर हुआ यह टकराव इस बात का संकेत बना कि जब शक और सच आमने-सामने आते हैं, तो रिश्तों की कड़वाहट खुलकर बाहर आ जाती है।

केस -4: विदेश से आई महिला पर पति का शक, सबूत मिले

खरड़ का केस एक वर्किंग महिला से जुड़ा था, जो विदेश से भारत आई हुई थी। पति को शक था कि नौकरी के दौरान बने रिश्ते अफेयर में बदल चुके हैं। डिटेक्टिव एजेंसी ने ऑफिस मूवमेंट, कॉल पैटर्न और मुलाकातों पर नजर रखी, जिसमें एक ही व्यक्ति से संपर्क और तयशुदा मुलाकातें सामने आईं। एजेंसी ने फोटो और कई एविडेंस के साथ रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद मामला परिवार और वकीलों तक पहुंच गया।

भास्कर एक्सपर्ट: बढ़ती दूरी और कम संवाद रिश्तों को कमजोर बना रहे

चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर विकास सोनकर का कहना है कि जो लोग डिटेक्टिव एजेंसी तक पहुंचते हैं, वे हल्के शक में नहीं आते। यह लंबा मानसिक प्रोसेस होता है। कई घर पहले ही अंदर से टूट चुके होते हैं। जांच का मकसद सिर्फ पकड़ना नहीं, बल्कि सबूतों के साथ सच सामने लाना होता है। हालांकि हर शक सही नहीं होता, लेकिन ज्यादातर मामलों में अफेयर की पुष्टि हो जाती है। बढ़ती दूरी, कम संवाद, लंबी पोस्टिंग, एनआरआई लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया की आसान पहुंच ने रिश्तों को ज्यादा कमजोर बना दिया है। इस वजह से ही आजकल रिश्ते कोर्ट और डिटेक्टिव एजेंसियों के बीच फंसते जा रहे हैं। सच जानना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि रिश्तों को वक्त रहते बातचीत से सुलझाया जाए।

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शादीशुदा रिश्तों पर शक अब घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफे​यर की आशंका में कपल प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों तक भी पहुंच रहे हैं। एजेंसियों के मुताबिक, उनके पास आने वाले कुल केसों में करीब 40 प्रतिशत मामले एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से जुड़े होते हैं। एजेंसियों का दावा है कि 90 प्रतिशत केसों में शक सही निकलता है, जबकि कुछ मामलों में शक बेबुनियाद भी साबित होता है यानी हर दस में नौ शक सही निकल रहे हैं। हालांकि डिटेक्टिव एजेंसियों तक पहुंचना कोई तात्कालिक फैसला नहीं होता।

ज्यादातर कपल पहले अपने स्तर पर फोन, सोशल मीडिया, व्यवहार और दिनचर्या में आए बदलावों को समझने की कोशिश करते हैं। जब शक गहराता है और रिश्तों में टकराव बढ़ने लगता है, तब सबूत जुटाने के लिए एजेंसी हायर की जाती है। इस प्रक्रिया में वक्त भी लगता है और खर्च भी भारी होता है।

एक दिन की फिजिकल सर्विलांस का खर्च 6 से 7 हजार रुपए तक होता है, जबकि एक हफ्ते की जांच 40 से 50 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। डिटेक्टिव एजेंसियों के अनुसार, एनआरआई इनक्वायरी तेजी से बढ़ रही हैं। इसी वजह से दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों की एजेंसियां भी पंजाब में सक्रिय हो रही हैं। पूरे पंजाब में एक महीने में करीब 300 तक केस एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के एजेंसियों के पास सॉल्व होने के लिए आ रहे हैं।

चार केस स्टडी से निकला सच : शक ने बदली दिशा, सबूत ने तय किया अंजाम

केस -1: जांच के बाद भी पूरी तरह साफ नहीं हुई तस्वीर

यूके से रजिस्टर हुआ यह मामला दसूहा से जुड़ा था। पत्नी विदेश में रहती है और भारत 15 दिन के लिए आई थी। लगातार फोन बिजी, बातचीत में दूरी और बदला हुआ व्यवहार पति की शक की वजह था। एजेंसी ने मूवमेंट और कॉन्टैक्ट्स को ट्रैक किया, लेकिन कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। यह मामला इस बात का उदाहरण बना कि हर शक सच में नहीं बदलता और कई बार जांच रिश्तों को टूटने से बचा भी लेती है।

केस -2: आर्मी ऑफिसर की गैरमौजूदगी में टूटा रिश्ता

यह केस आर्मी ऑफिसर से जुड़ा था, जिसकी पोस्टिंग विदेश में थी, जबकि पत्नी जालंधर में रह रही थी। पत्नी का खुद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा था, लेकिन वह इसी बीच बच्चों को पिता के खिलाफ भड़काती रही। बच्चों के सामने पिता की छवि खराब की जा रही थी, जिससे वे पिता से बातचीत तक बंद कर चुके थे। पति ने डिटेक्टिव हायर किया। एजेंसी ने फिजिकल सर्विलांस शुरू किया और मूवमेंट के साथ मुलाकातों पर नजर रखी, तब मामले का खुलासा हुआ।

केस -3: ऑफिस अफेयर का शक, सड़क पर हुई हाथापाई

मोहाली में रियल एस्टेट से जुड़े एक व्यक्ति पर उसकी पत्नी को शक था कि उसका ऑफिस में ही किसी के साथ अफेयर है। ऑफिस के बाहर और रोड पर मुलाकातों के सबूत मिले। जब पत्नी को मौके पर बुलाया गया तो बात बहस से शुरू होकर हाथापाई तक पहुंच गई। सार्वजनिक जगह पर हुआ यह टकराव इस बात का संकेत बना कि जब शक और सच आमने-सामने आते हैं, तो रिश्तों की कड़वाहट खुलकर बाहर आ जाती है।

केस -4: विदेश से आई महिला पर पति का शक, सबूत मिले

खरड़ का केस एक वर्किंग महिला से जुड़ा था, जो विदेश से भारत आई हुई थी। पति को शक था कि नौकरी के दौरान बने रिश्ते अफेयर में बदल चुके हैं। डिटेक्टिव एजेंसी ने ऑफिस मूवमेंट, कॉल पैटर्न और मुलाकातों पर नजर रखी, जिसमें एक ही व्यक्ति से संपर्क और तयशुदा मुलाकातें सामने आईं। एजेंसी ने फोटो और कई एविडेंस के साथ रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद मामला परिवार और वकीलों तक पहुंच गया।

भास्कर एक्सपर्ट: बढ़ती दूरी और कम संवाद रिश्तों को कमजोर बना रहे

चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर विकास सोनकर का कहना है कि जो लोग डिटेक्टिव एजेंसी तक पहुंचते हैं, वे हल्के शक में नहीं आते। यह लंबा मानसिक प्रोसेस होता है। कई घर पहले ही अंदर से टूट चुके होते हैं। जांच का मकसद सिर्फ पकड़ना नहीं, बल्कि सबूतों के साथ सच सामने लाना होता है। हालांकि हर शक सही नहीं होता, लेकिन ज्यादातर मामलों में अफेयर की पुष्टि हो जाती है। बढ़ती दूरी, कम संवाद, लंबी पोस्टिंग, एनआरआई लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया की आसान पहुंच ने रिश्तों को ज्यादा कमजोर बना दिया है। इस वजह से ही आजकल रिश्ते कोर्ट और डिटेक्टिव एजेंसियों के बीच फंसते जा रहे हैं। सच जानना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि रिश्तों को वक्त रहते बातचीत से सुलझाया जाए।

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