Saturday, 29 Aug 2026 | 01:01 PM

Trending :

कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई अमेरिका ने वेनेजुएला का 65 अरब बैरल तेल कब्जाया:यह भारत की 40 साल की जरूरत के बराबर; ट्रम्प बोले- इतिहास की सबसे बड़ी डील अमेरिका का वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर कब्जा:प्राइवेट कंपनी के साथ करार, ट्रम्प बोले- यह इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील मर्दों की मर्दानगी नारी की रक्षा करने में है:रामायण एक्टर सुनील लहरी ने कृति के विवादित रक्षाबंधन एड के बहिष्कार का समर्थन किया, मर्दों की मर्दानगी नारी की रक्षा करने में है:रामायण एक्टर सुनील लहरी ने कृति के विवादित रक्षाबंधन एड के बहिष्कार का समर्थन किया,
EXCLUSIVE

Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot in Operation Sindoor

Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot in Operation Sindoor
  • Hindi News
  • Business
  • Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot In Operation Sindoor | Solar Industries

छत्रपति संभाजीनगर1 घंटे पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

  • कॉपी लिंक

सत्यनारायण नुवाल, स्वदेशी ड्रोन ‘नागास्त्र’ बनाने वाली कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के फॉउंडर और चेयरमैन हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस स्वदेशी वेपनाइज्ड ड्रोन ‘नागास्त्र’ ने दुश्मन की साजिश को नाकाम किया, उसे सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने बनाया है। अब यह कंपनी वेपनाइज्ड डॉग रोबोट और इंसानों जैसा दिखने वाला ‘ह्यूमनॉइड रोबोट’ भी बना रही है।

कंपनी के फॉउंडर और चेयरमैन पद्मश्री सत्यनारायण नुवाल ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि देश की सुरक्षा के लिए इन रोबोट्स को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी तैनात किया जा सकेगा। कंपनी माइक्रो मिसाइल पर आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: ऑपरेशन सिंदूर में आपके नागास्त्र और लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल हुआ, इस बारे में कुछ बताएंगे?

जवाब: 2020 में अजरबैजान और आर्मेनिया युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल ने पारंपरिक युद्ध का स्वरूप ही बदल दिया। दुनिया के सामने हथियारों का बिल्कुल नया रूप आया। हमने भी 2020 के बाद अनमैन्ड एरियल सिस्टम बनाने का फैसला किया। तीन साल की मेहनत के बाद हमने देश का पहला वेपनाइज्ड ड्रोन ‘नागास्त्र-1’ बनाया, जिसकी आपूर्ति हमारी सेना को की गई।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इसका सटीक इस्तेमाल होना मैं केवल दैवीय कृपा मानता हूं। नागास्त्र-1 की रेंज 15 किलोमीटर है। इसके बाद हमने नागास्त्र-1A, नागास्त्र-1B और नागास्त्र-2 सहित अन्य वेरिएंट्स तैयार किए हैं। इन्हें ‘कामिकेज ड्रोन’ या ‘सुसाइड ड्रोन’ भी कहा जाता है।

यह लक्ष्य के ऊपर काफी देर तक मंडरा सकता है, दुश्मनों का पता लगा सकता है और सटीक संकेत मिलते ही विस्फोटक वॉरहेड के साथ सीधे उससे टकराकर हमला कर सकता है। हमने सेना को इसकी सप्लाई भी शुरू कर दी है। इनकी रेंज 25 से 50 किलोमीटर है और इनमें 1 से 5 किलोग्राम तक का विस्फोटक लगाया जा सकता है।

सवाल: क्या इन ड्रोन्स में स्वार्म टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है?

जवाब: स्वार्म ड्रोन अभी अंडर-डेवलपमेंट है। ऑपरेशन सिंदूर के समय उधर से आए छोटे-छोटे ड्रोन्स का जवाब देने के लिए हमारे बड़े ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद हमने काउंटर ड्रोन सिस्टम के रूप में माइक्रो मिसाइल पर आधारित ‘भार्गवास्त्र’ डेवलप किया है।

यह 10 किलोमीटर तक देख सकता है और 2.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले किसी भी बाहरी ड्रोन या यूएवी को मार गिराने की क्षमता रखता है। अलग-अलग रेंज में इसका ट्रायल टेस्टिंग हो चुका है। स्वार्म ड्रोन छोटे और ऑटोनोमस (स्वायत्त) ड्रोन्स का नेटवर्क होता है, जो एआई और एडवांस सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम की मदद से एक साथ मिलकर काम करते हैं।

झुंड में होने के कारण, ये एक ही समय में सैकड़ों की संख्या में दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, राडार या ठिकानों को निशाना बनाते हैं। इस झुंड के अलग-अलग ड्रोन्स को अलग-अलग काम सौंपे जा सकते हैं; जैसे कि कुछ जासूसी करते हैं, कुछ इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग करते हैं, तो कुछ सीधे हमला करते हैं।

सवाल: क्या आप अब ‘ब्रह्मोस’ भी देश में ही बना रहे, इसमें क्या डेवलपमेंट हुआ है?

जवाब: एक साल पहले तक ब्रह्मोस का बूस्टर और रॉकेट सिस्टम रूस से इम्पोर्ट किया जा रहा था। हमने डीआरडीओ के सहयोग से इसे अपने यहां डेवलप किया है। रूस के वैज्ञानिक भी यहाँ आए थे।

उन्हें पांच दिन यहां रहकर व्यवस्था देखनी थी। लेकिन, पहले ही दिन शाम को उन्होंने हमारे सिस्टम को मंजूरी दी है। अब हमने 100 रॉकेट्स तैयार किए हैं; इसके अलावा इसका वॉरहेड भी बनाया है। फिलहाल उनकी टेस्टिंग चल रही है।

सवाल: दुनिया भर में एआई और रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ा, क्या हम तैयार हैं?

जवाब: अजरबैजान और आर्मेनिया के 2020 के युद्ध के बाद रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल युद्ध में अनमैन्ड एरियल सिस्टम और लॉन्ग रेंज मिसाइलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। आने वाले समय में एआई और रोबोट्स का महत्व और बढ़ेगा।

इसमें एक्युरेसी और किफायती कीमत सबसे महत्वपूर्ण है। रक्षा खरीद नीति 2026 में इस दिशा में काफी कदम उठाए गए हैं। मैं इतना ही कह सकता हूं कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सवाल: एआई और रोबोट्स को लेकर आपके यहां क्या काम हो रहा है?

जवाब: हमने काफी कुछ काम किया है और कर भी रहे हैं। नागपुर के मिहान सेज में हमें पजेशन लेटर मिल गया है। हमें कुछ मंजूरियों का इंतजार है, जो दो-तीन महीनों में मिल जाएंगी। तीन-चार महीनों में हम अपना काम शुरू कर देंगे। आज हमारे जवानों को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस (−40∘C) तापमान में तैनात रहना पड़ता है।

सर्विलांस और सिक्योरिटी को और बेहतर बनाने के लिए हम एक साल के भीतर देश का पहला वेपनाइज्ड रोबोट बनाएंगे। हम डॉग रोबोट का प्रोटोटाइप बना रहे हैं। इसके बाद दो-तीन महीनों में हम ह्यूमनॉइड (इंसानों जैसा दिखने वाला रोबोट) तैयार कर लेंगे।

सवाल: क्या आप पिनाका के अलावा भी रॉकेट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं?

जवाब: यह बताना संभव नहीं है। हमारे पास जो पिनाका रॉकेट बन रहा है, वह फिलहाल 75 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है। हमने सेना को इसकी रेंज बढ़ाकर 300 किलोमीटर करने का एक प्रस्ताव दिया है। हमें पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इसमें भी सफलता हासिल करेंगे। हमारी भारतीय सेना और केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।

सवाल: गोला-बारूद के मामले में हमारी आत्मनिर्भरता का स्तर अभी क्या है?

जवाब: हाई एनर्जी मटेरियल और प्रोपेलेंट के मामले में हम ग्लोबल लेवल के बराबर हैं। जो मटेरियल पहले हमारे यहाँ 100% इम्पोर्ट होता था, आज हम उसका 70% से ज्यादा मटेरियल यूएस, इजरायल, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को एक्सपोर्ट कर रहे हैं।

सवाल: महाराष्ट्र में अहिल्यानगर-संभाजीनगर डिफेंस कॉरिडोर पर तेजी से काम हो रहा, इस पर आपकी क्या राय है?

जवाब: डिफेंस कॉरिडोर को लेकर अगर कोई सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल और एग्रेसिव है, तो वह महाराष्ट्र सरकार ही है। जिस तरह से सिस्टेमैटिक ढंग से डिफेंस कॉरिडोर का काम चल रहा है, उससे मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यहां का डिफेंस कॉरिडोर सबसे ज्यादा सफल होगा। महाराष्ट्र को अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा मिलता है, जो डिफेंस सेक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

दूसरी बात, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विजनरी पॉलिसी इसे तेजी से आगे ले जा रही है। निश्चित रूप से मुझे ऐसा लगता है कि जितने भी डिफेंस कॉरिडोर पांच-सात साल पहले आए या जो अब आ रहे हैं, उन सबमें महाराष्ट्र का डिफेंस कॉरिडोर बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा।

सवाल: क्या भारत में ‘स्वदेशी बनाम इम्पोर्टेड’ की मानसिकता में बदलाव आया है?

जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के कारण पिछले कुछ वर्षों में सरकार की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पॉलिसी बहुत अच्छी बनाई गई है। लेकिन, पॉलिसी को लागू करने वाले सिस्टम में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। सिर्फ नीतियां अच्छी होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अकाउंटेबिलिटी और मॉनिटरिंग सिस्टम का मजबूत होना आवश्यक है।

टेक्नोलॉजी के मामले में पोलैंड, स्वीडन, डेनमार्क और फ्रांस जैसे छोटे देश हमसे आगे हैं। वहाँ काम करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय ही हैं। हमारे यहाँ जो अवसर मिलने चाहिए थे, वे कुछ कारणों से नहीं मिल पाए।

सवाल: चंद्रपुर में एक्सप्लोसिव लाइसेंस लेने से लेकर पद्मश्री तक का सफर कैसा रहा?

जवाब: मैंने 17 साल की उम्र से ही अपना बिजनेस शुरू कर दिया था। राजस्थान के भीलवाड़ा में मेरा जन्म हुआ, वहां से मैं बल्लारशाह आया। वहां भी दो साल संघर्ष किया। जब कुछ बात नहीं बनी, तो मैं चंद्रपुर आ गया। चंद्रपुर में अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई नाम के एक सज्जन थे, जिनके पास एक्सप्लोसिव की मैगजीन (लाइसेंस) थी। मैंने उनसे वह मैगजीन किराए पर लेकर अपने करियर की शुरुआत की।

1984 में दुनिया की सबसे बड़ी ‘आईसीआई’ कंपनी ने हमें डिस्ट्रीब्यूटर बनाया और 1994 तक आते-आते हम देश के सबसे बड़े ट्रेडिंग हाउस बन गए। 1995-96 में हमने स्मॉल स्केल पर एक्सप्लोसिव मैन्युफैक्चरिंग शुरू किया और 2004 तक हम देश के सबसे बड़े प्रोड्यूसर और एक्सपोर्टर बन गए।

2010 में हमने तय किया कि हमें डिफेंस सेक्टर में आना चाहिए। 2014 में बीजेपी सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में कम्प्लीट एमुनिशन का लाइसेंस देने का प्रावधान किया। 2015 में हमें यह लाइसेंस मिला। हमारे देश में 100 साल से सिर्फ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां थीं या फिर हम इम्पोर्ट करते थे, इसमें आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसी सोच के साथ हमने इस सेक्टर में एंट्री की।

ये खबर भी पढ़ें…

देश की इकोनॉमी 2026-27 में 6.9% की दर से बढ़ेगी: RBI की सालाना रिपोर्ट में दावा, वैश्विक संकट के बावजूद भारत की रफ्तार मजबूत रहेगी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को अपनी साल 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद साल 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी। इस दौरान देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% रहने का अनुमान लगाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट पर हमला:विदेश मंत्रालय बोला- ईरान ने हद पार की; ईरान की धमकी- लारीजारी की हत्या का बदला लेंगे

March 19, 2026/
7:03 am

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 20वां दिन है। ईरान ने बुधवार रात को कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट...

50-50 Chance of War with Iran; To Decide on Strike Today

May 24, 2026/
7:08 am

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अपने टॉप सलाहकारों के साथ...

अशोक ने 150 की रफ्तार से IPL में गेंद फेंकी:गांव में सड़क नहीं, भाई बोले-किसी को घर बुलाने में शर्म आती है

April 22, 2026/
7:30 am

IPL में अपनी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बल्लेबाजों के पसीने छुड़ाने वाले अशोक शर्मा इन दिनों खूब...

इंग्लैंड विमेंस T20 वर्ल्डकप के फाइनल में:साउथ अफ्रीका को 40 रन से हराया; ब्रंट और नाइट के बीच 133 रन की साझेदारी

July 3, 2026/
9:13 am

इंग्लैंड ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। टीम ने गुरुवार रात को सेमीफाइनल मैच...

Kunal Shah WhatsApp Global Head

June 23, 2026/
7:18 am

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर सोने-चांदी से जुड़ी रही। सोमवार को एक किलो चांदी 5,828...

अमेरिका ने ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हमला किया:ट्रम्प बोले- ईरान ने सीजफायर तोड़ा; एक दिन पहले कार्गो शिप पर ड्रोन अटैक हुआ था

June 27, 2026/
5:19 am

अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर करीब एक घंटे तक हमले किए। अमेरिकी सेना ने मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार...

तस्वीर का विवरण

May 29, 2026/
2:58 pm

इस सामग्री चिली को बनाने के लिए आधा कप पीसा हुआ ओट्स या ओट्स का आटा, आधा कप चना सत्तू...

नीतीश ने MLC पद छोड़ा, अब आगे क्या-क्या होगा:पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री; JDU का डिप्टी CM, शपथ से लेकर इस्तीफे की डेट आई सामने

March 31, 2026/
5:29 am

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 मार्च को विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यह तय...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot in Operation Sindoor

Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot in Operation Sindoor
  • Hindi News
  • Business
  • Nagastra Drone Thwarts Enemy Plot In Operation Sindoor | Solar Industries

छत्रपति संभाजीनगर1 घंटे पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

  • कॉपी लिंक

सत्यनारायण नुवाल, स्वदेशी ड्रोन ‘नागास्त्र’ बनाने वाली कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के फॉउंडर और चेयरमैन हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस स्वदेशी वेपनाइज्ड ड्रोन ‘नागास्त्र’ ने दुश्मन की साजिश को नाकाम किया, उसे सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने बनाया है। अब यह कंपनी वेपनाइज्ड डॉग रोबोट और इंसानों जैसा दिखने वाला ‘ह्यूमनॉइड रोबोट’ भी बना रही है।

कंपनी के फॉउंडर और चेयरमैन पद्मश्री सत्यनारायण नुवाल ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि देश की सुरक्षा के लिए इन रोबोट्स को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी तैनात किया जा सकेगा। कंपनी माइक्रो मिसाइल पर आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: ऑपरेशन सिंदूर में आपके नागास्त्र और लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल हुआ, इस बारे में कुछ बताएंगे?

जवाब: 2020 में अजरबैजान और आर्मेनिया युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल ने पारंपरिक युद्ध का स्वरूप ही बदल दिया। दुनिया के सामने हथियारों का बिल्कुल नया रूप आया। हमने भी 2020 के बाद अनमैन्ड एरियल सिस्टम बनाने का फैसला किया। तीन साल की मेहनत के बाद हमने देश का पहला वेपनाइज्ड ड्रोन ‘नागास्त्र-1’ बनाया, जिसकी आपूर्ति हमारी सेना को की गई।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इसका सटीक इस्तेमाल होना मैं केवल दैवीय कृपा मानता हूं। नागास्त्र-1 की रेंज 15 किलोमीटर है। इसके बाद हमने नागास्त्र-1A, नागास्त्र-1B और नागास्त्र-2 सहित अन्य वेरिएंट्स तैयार किए हैं। इन्हें ‘कामिकेज ड्रोन’ या ‘सुसाइड ड्रोन’ भी कहा जाता है।

यह लक्ष्य के ऊपर काफी देर तक मंडरा सकता है, दुश्मनों का पता लगा सकता है और सटीक संकेत मिलते ही विस्फोटक वॉरहेड के साथ सीधे उससे टकराकर हमला कर सकता है। हमने सेना को इसकी सप्लाई भी शुरू कर दी है। इनकी रेंज 25 से 50 किलोमीटर है और इनमें 1 से 5 किलोग्राम तक का विस्फोटक लगाया जा सकता है।

सवाल: क्या इन ड्रोन्स में स्वार्म टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है?

जवाब: स्वार्म ड्रोन अभी अंडर-डेवलपमेंट है। ऑपरेशन सिंदूर के समय उधर से आए छोटे-छोटे ड्रोन्स का जवाब देने के लिए हमारे बड़े ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद हमने काउंटर ड्रोन सिस्टम के रूप में माइक्रो मिसाइल पर आधारित ‘भार्गवास्त्र’ डेवलप किया है।

यह 10 किलोमीटर तक देख सकता है और 2.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले किसी भी बाहरी ड्रोन या यूएवी को मार गिराने की क्षमता रखता है। अलग-अलग रेंज में इसका ट्रायल टेस्टिंग हो चुका है। स्वार्म ड्रोन छोटे और ऑटोनोमस (स्वायत्त) ड्रोन्स का नेटवर्क होता है, जो एआई और एडवांस सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम की मदद से एक साथ मिलकर काम करते हैं।

झुंड में होने के कारण, ये एक ही समय में सैकड़ों की संख्या में दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, राडार या ठिकानों को निशाना बनाते हैं। इस झुंड के अलग-अलग ड्रोन्स को अलग-अलग काम सौंपे जा सकते हैं; जैसे कि कुछ जासूसी करते हैं, कुछ इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग करते हैं, तो कुछ सीधे हमला करते हैं।

सवाल: क्या आप अब ‘ब्रह्मोस’ भी देश में ही बना रहे, इसमें क्या डेवलपमेंट हुआ है?

जवाब: एक साल पहले तक ब्रह्मोस का बूस्टर और रॉकेट सिस्टम रूस से इम्पोर्ट किया जा रहा था। हमने डीआरडीओ के सहयोग से इसे अपने यहां डेवलप किया है। रूस के वैज्ञानिक भी यहाँ आए थे।

उन्हें पांच दिन यहां रहकर व्यवस्था देखनी थी। लेकिन, पहले ही दिन शाम को उन्होंने हमारे सिस्टम को मंजूरी दी है। अब हमने 100 रॉकेट्स तैयार किए हैं; इसके अलावा इसका वॉरहेड भी बनाया है। फिलहाल उनकी टेस्टिंग चल रही है।

सवाल: दुनिया भर में एआई और रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ा, क्या हम तैयार हैं?

जवाब: अजरबैजान और आर्मेनिया के 2020 के युद्ध के बाद रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल युद्ध में अनमैन्ड एरियल सिस्टम और लॉन्ग रेंज मिसाइलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। आने वाले समय में एआई और रोबोट्स का महत्व और बढ़ेगा।

इसमें एक्युरेसी और किफायती कीमत सबसे महत्वपूर्ण है। रक्षा खरीद नीति 2026 में इस दिशा में काफी कदम उठाए गए हैं। मैं इतना ही कह सकता हूं कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सवाल: एआई और रोबोट्स को लेकर आपके यहां क्या काम हो रहा है?

जवाब: हमने काफी कुछ काम किया है और कर भी रहे हैं। नागपुर के मिहान सेज में हमें पजेशन लेटर मिल गया है। हमें कुछ मंजूरियों का इंतजार है, जो दो-तीन महीनों में मिल जाएंगी। तीन-चार महीनों में हम अपना काम शुरू कर देंगे। आज हमारे जवानों को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस (−40∘C) तापमान में तैनात रहना पड़ता है।

सर्विलांस और सिक्योरिटी को और बेहतर बनाने के लिए हम एक साल के भीतर देश का पहला वेपनाइज्ड रोबोट बनाएंगे। हम डॉग रोबोट का प्रोटोटाइप बना रहे हैं। इसके बाद दो-तीन महीनों में हम ह्यूमनॉइड (इंसानों जैसा दिखने वाला रोबोट) तैयार कर लेंगे।

सवाल: क्या आप पिनाका के अलावा भी रॉकेट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं?

जवाब: यह बताना संभव नहीं है। हमारे पास जो पिनाका रॉकेट बन रहा है, वह फिलहाल 75 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है। हमने सेना को इसकी रेंज बढ़ाकर 300 किलोमीटर करने का एक प्रस्ताव दिया है। हमें पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इसमें भी सफलता हासिल करेंगे। हमारी भारतीय सेना और केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।

सवाल: गोला-बारूद के मामले में हमारी आत्मनिर्भरता का स्तर अभी क्या है?

जवाब: हाई एनर्जी मटेरियल और प्रोपेलेंट के मामले में हम ग्लोबल लेवल के बराबर हैं। जो मटेरियल पहले हमारे यहाँ 100% इम्पोर्ट होता था, आज हम उसका 70% से ज्यादा मटेरियल यूएस, इजरायल, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को एक्सपोर्ट कर रहे हैं।

सवाल: महाराष्ट्र में अहिल्यानगर-संभाजीनगर डिफेंस कॉरिडोर पर तेजी से काम हो रहा, इस पर आपकी क्या राय है?

जवाब: डिफेंस कॉरिडोर को लेकर अगर कोई सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल और एग्रेसिव है, तो वह महाराष्ट्र सरकार ही है। जिस तरह से सिस्टेमैटिक ढंग से डिफेंस कॉरिडोर का काम चल रहा है, उससे मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यहां का डिफेंस कॉरिडोर सबसे ज्यादा सफल होगा। महाराष्ट्र को अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा मिलता है, जो डिफेंस सेक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

दूसरी बात, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विजनरी पॉलिसी इसे तेजी से आगे ले जा रही है। निश्चित रूप से मुझे ऐसा लगता है कि जितने भी डिफेंस कॉरिडोर पांच-सात साल पहले आए या जो अब आ रहे हैं, उन सबमें महाराष्ट्र का डिफेंस कॉरिडोर बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा।

सवाल: क्या भारत में ‘स्वदेशी बनाम इम्पोर्टेड’ की मानसिकता में बदलाव आया है?

जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के कारण पिछले कुछ वर्षों में सरकार की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पॉलिसी बहुत अच्छी बनाई गई है। लेकिन, पॉलिसी को लागू करने वाले सिस्टम में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। सिर्फ नीतियां अच्छी होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अकाउंटेबिलिटी और मॉनिटरिंग सिस्टम का मजबूत होना आवश्यक है।

टेक्नोलॉजी के मामले में पोलैंड, स्वीडन, डेनमार्क और फ्रांस जैसे छोटे देश हमसे आगे हैं। वहाँ काम करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय ही हैं। हमारे यहाँ जो अवसर मिलने चाहिए थे, वे कुछ कारणों से नहीं मिल पाए।

सवाल: चंद्रपुर में एक्सप्लोसिव लाइसेंस लेने से लेकर पद्मश्री तक का सफर कैसा रहा?

जवाब: मैंने 17 साल की उम्र से ही अपना बिजनेस शुरू कर दिया था। राजस्थान के भीलवाड़ा में मेरा जन्म हुआ, वहां से मैं बल्लारशाह आया। वहां भी दो साल संघर्ष किया। जब कुछ बात नहीं बनी, तो मैं चंद्रपुर आ गया। चंद्रपुर में अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई नाम के एक सज्जन थे, जिनके पास एक्सप्लोसिव की मैगजीन (लाइसेंस) थी। मैंने उनसे वह मैगजीन किराए पर लेकर अपने करियर की शुरुआत की।

1984 में दुनिया की सबसे बड़ी ‘आईसीआई’ कंपनी ने हमें डिस्ट्रीब्यूटर बनाया और 1994 तक आते-आते हम देश के सबसे बड़े ट्रेडिंग हाउस बन गए। 1995-96 में हमने स्मॉल स्केल पर एक्सप्लोसिव मैन्युफैक्चरिंग शुरू किया और 2004 तक हम देश के सबसे बड़े प्रोड्यूसर और एक्सपोर्टर बन गए।

2010 में हमने तय किया कि हमें डिफेंस सेक्टर में आना चाहिए। 2014 में बीजेपी सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में कम्प्लीट एमुनिशन का लाइसेंस देने का प्रावधान किया। 2015 में हमें यह लाइसेंस मिला। हमारे देश में 100 साल से सिर्फ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां थीं या फिर हम इम्पोर्ट करते थे, इसमें आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसी सोच के साथ हमने इस सेक्टर में एंट्री की।

ये खबर भी पढ़ें…

देश की इकोनॉमी 2026-27 में 6.9% की दर से बढ़ेगी: RBI की सालाना रिपोर्ट में दावा, वैश्विक संकट के बावजूद भारत की रफ्तार मजबूत रहेगी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को अपनी साल 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद साल 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी। इस दौरान देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% रहने का अनुमान लगाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.