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पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

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पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

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