Monday, 14 Sep 2026 | 01:31 PM

Trending :

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली22 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी।

3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी

1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर

फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा।

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी।

2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग

जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है।

3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं।

घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया

फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी।

इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा।

साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई

भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है।

फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है।

ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई

  • महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था।
  • लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है।
  • बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था।

डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं

करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है।

चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है।

ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा

तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है।

फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है।

1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं

फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है।

वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी

फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी।

क्या होती है रेटिंग एजेंसी?

रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं।

इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।

ये खबर भी पढ़ें…

इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ

देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
असम के असम में बेहद ही शानदार तस्वीर, एक साथ गोगोई-गोस्वामी ने चाय पर की चर्चा

April 9, 2026/
8:25 pm

असम विधानसभा चुनाव 2026: मंगलवार के बीच जोरहाट विधानसभा चुनाव का एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसमें राजनीतिक मोरचा में...

Kerala Election Winners List 2026: INC leader VD Satheesan and CM Pinarayi Vijayan. (Photos via X)

May 5, 2026/
9:55 am

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 09:55 IST सितारों से एक सितारे तक – विजय के नीलांकरई घर में दो अविस्मरणीय मेहमान...

UP Govt Jobs 295 Recruitment

April 16, 2026/
8:00 pm

37 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी बिहार में इंस्ट्रक्टर के 726 पदों पर भर्ती की,...

आमिर खान ने की 'धुरंधर 2' की तारीफ:फिल्म देखे बिना बोले- हर तरफ तारफें ही सुन रहा हूं; पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं

March 26, 2026/
6:13 pm

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर 2’ की तारीफ की है। सोशल मीडिया...

CUET-UG Exam Delayed | Technical Glitch Halts Nationwide Exams

May 30, 2026/
12:09 pm

जयपुर13 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG 2026) की शनिवार सुबह आयोजित परीक्षा तकनीकी खामी के कारण...

Ranveer Singhs Dhurandhar Uncut Version Released

May 21, 2026/
3:48 pm

17 मिनट पहले कॉपी लिंक रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ का अनकट वर्जन ‘धुरंधर रॉ एंड अनदेखा’ कल यानी 22...

Afghanistan Cricket Fan Grabs Gurbazs Cap

July 4, 2026/
1:39 pm

अफगानिस्तान की शपगीजा क्रिकेट लीग में एक फैन मैदान में घुसकर रहमनुल्लाह गुरबाज के सिर से टोपी लेकर भाग गया।...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली22 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी।

3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी

1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर

फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा।

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी।

2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग

जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है।

3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं।

घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया

फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी।

इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा।

साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई

भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है।

फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है।

ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई

  • महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था।
  • लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है।
  • बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था।

डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं

करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है।

चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है।

ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा

तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है।

फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है।

1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं

फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है।

वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी

फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी।

क्या होती है रेटिंग एजेंसी?

रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं।

इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।

ये खबर भी पढ़ें…

इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ

देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.