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Government bars bulk users from buying petrol, diesel at retail pumps for up to 90 days

Government bars bulk users from buying petrol, diesel at retail pumps for up to 90 days
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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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सरकार ने इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यानी सभी बल्क यूजर्स के रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अब इन ग्राहकों को केवल थोक बिक्री केंद्रों (बल्क सेल पॉइंट्स) से ही ईंधन खरीदना होगा।

यह पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसे नया सरकारी आदेश जारी करके आगे बढ़ाया जा सकता है।

रिटेल और थोक कीमतों के अंतर के कारण लिया फैसला

मंत्रालय ने देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के जरिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी के बाद ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल ऑर्डर-2026’ जारी किया है।

आदेश में कहा गया है कि थोक और रिटेल कीमतों में बड़े अंतर के कारण कॉमर्शियल और संस्थागत यानी इंस्टीट्यूशनल कंज्यूमर्स रिटेल आउटलेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहे थे, जिससे यह बिक्री बढ़ी है।

दिल्ली में थोक और रिटेल कीमतों में ₹39.30 प्रति लीटर का अंतर

कीमतों के इस अंतर को दिल्ली के उदाहरण से समझा जा सकता है। दिल्ली में रिटेल पंपों पर डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है, जबकि थोक में इसकी कीमत ₹134.50 प्रति लीटर है।

सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट के बाद आम कंज्यूमर्स को बढ़ती लागत से बचाने के लिए रिटेल कीमतें कम रखी थीं, जबकि टेलीकॉम टावर और बिजली उत्पादन करने वाले थोक उपभोक्ताओं से मार्केट लिंक्ड (बाजार आधारित) कीमतें ली जाती हैं।

वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है असर

मंत्रालय के मुताबिक, दुनिया के कुछ हिस्सों में मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

इसी स्थिति के बीच थोक और रिटेल कीमतों के अंतर की वजह से देश के कुछ हिस्सों में रिटेल पंपों पर असामान्य बिक्री देखी गई है।

रोजाना केवल 200 लीटर डीजल खरीदने की लिमिट तय

नए आदेश के तहत कॉमर्शियल कंज्यूमर्स को अब अपने स्वयं के उपभोक्ता पंपों या थोक बिक्री चैनलों से ही अपनी जरूरत पूरी करनी होगी।

इसके अलावा रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री को केवल वाहनों के ईंधन टैंक या ‘पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन’ (PESO) के अप्रूव्ड कंटेनरों तक ही सीमित कर दिया गया है।

रिटेल डीजल खरीद को प्रति ग्राहक या वाहन के लिए अधिकतम 200 लीटर प्रति दिन पर कैप यानी सीमित किया गया है और इस डीजल को दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा।

आवश्यक सेवाओं में रुकावट रोकने के लिए उठाया कदम

सरकार का कहना है कि खुदरा स्टेशनों के जरिए थोक खरीद होने से आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाली सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर किल्लत और आवश्यक सेवाओं में रुकावट की स्थिति बन सकती है।

सार्वजनिक हित में पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता और वितरण को बनाए रखने के लिए इस सप्लाई को रेगुलेट करना जरूरी हो गया था।

जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर होगी सख्त कार्रवाई

इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अन्य अधिकृत ईंधन खुदरा विक्रेताओं को दी गई है।

इसके साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग, अनधिकृत खरीद और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा दी जाएगी।

विशेष परिस्थितियों में सरकार देगी छूट

इस आदेश में सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह किसी विशेष आदेश के माध्यम से किसी भी उपभोक्ता, उपभोक्ताओं के वर्ग, सेक्टर या ट्रांजैक्शन की कैटेगरी को इन प्रावधानों से छूट दे सकती है।

इससे पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीद) से बचने की सलाह दी थी।

किन्हें माना जाता है बल्क यूजर?

थोक डीजल उपयोगकर्ताओं में मुख्य रूप से परिवहन बेड़े (ट्रांसपोर्ट फ्लीट्स), टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स (मोबाइल टावर), बड़े उद्योग, कंस्ट्रक्शन कंपनियां और बिजली उत्पादन (कैप्टिव पावर जनरेशन) के लिए जनरेटर का उपयोग करने वाले संस्थान शामिल होते हैं। तेल कंपनियां इनके लिए मार्केट-लिंक्ड प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं।

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सरकार ने इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यानी सभी बल्क यूजर्स के रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अब इन ग्राहकों को केवल थोक बिक्री केंद्रों (बल्क सेल पॉइंट्स) से ही ईंधन खरीदना होगा।

यह पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसे नया सरकारी आदेश जारी करके आगे बढ़ाया जा सकता है।

रिटेल और थोक कीमतों के अंतर के कारण लिया फैसला

मंत्रालय ने देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के जरिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी के बाद ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल ऑर्डर-2026’ जारी किया है।

आदेश में कहा गया है कि थोक और रिटेल कीमतों में बड़े अंतर के कारण कॉमर्शियल और संस्थागत यानी इंस्टीट्यूशनल कंज्यूमर्स रिटेल आउटलेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहे थे, जिससे यह बिक्री बढ़ी है।

दिल्ली में थोक और रिटेल कीमतों में ₹39.30 प्रति लीटर का अंतर

कीमतों के इस अंतर को दिल्ली के उदाहरण से समझा जा सकता है। दिल्ली में रिटेल पंपों पर डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है, जबकि थोक में इसकी कीमत ₹134.50 प्रति लीटर है।

सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट के बाद आम कंज्यूमर्स को बढ़ती लागत से बचाने के लिए रिटेल कीमतें कम रखी थीं, जबकि टेलीकॉम टावर और बिजली उत्पादन करने वाले थोक उपभोक्ताओं से मार्केट लिंक्ड (बाजार आधारित) कीमतें ली जाती हैं।

वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है असर

मंत्रालय के मुताबिक, दुनिया के कुछ हिस्सों में मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

इसी स्थिति के बीच थोक और रिटेल कीमतों के अंतर की वजह से देश के कुछ हिस्सों में रिटेल पंपों पर असामान्य बिक्री देखी गई है।

रोजाना केवल 200 लीटर डीजल खरीदने की लिमिट तय

नए आदेश के तहत कॉमर्शियल कंज्यूमर्स को अब अपने स्वयं के उपभोक्ता पंपों या थोक बिक्री चैनलों से ही अपनी जरूरत पूरी करनी होगी।

इसके अलावा रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री को केवल वाहनों के ईंधन टैंक या ‘पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन’ (PESO) के अप्रूव्ड कंटेनरों तक ही सीमित कर दिया गया है।

रिटेल डीजल खरीद को प्रति ग्राहक या वाहन के लिए अधिकतम 200 लीटर प्रति दिन पर कैप यानी सीमित किया गया है और इस डीजल को दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा।

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सरकार का कहना है कि खुदरा स्टेशनों के जरिए थोक खरीद होने से आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाली सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर किल्लत और आवश्यक सेवाओं में रुकावट की स्थिति बन सकती है।

सार्वजनिक हित में पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता और वितरण को बनाए रखने के लिए इस सप्लाई को रेगुलेट करना जरूरी हो गया था।

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इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अन्य अधिकृत ईंधन खुदरा विक्रेताओं को दी गई है।

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इससे पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीद) से बचने की सलाह दी थी।

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थोक डीजल उपयोगकर्ताओं में मुख्य रूप से परिवहन बेड़े (ट्रांसपोर्ट फ्लीट्स), टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स (मोबाइल टावर), बड़े उद्योग, कंस्ट्रक्शन कंपनियां और बिजली उत्पादन (कैप्टिव पावर जनरेशन) के लिए जनरेटर का उपयोग करने वाले संस्थान शामिल होते हैं। तेल कंपनियां इनके लिए मार्केट-लिंक्ड प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं।

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केंद्र सरकार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लेगी। अभी ज्यादातर जगहों पर 20% एथनॉल मिला पेट्रोल मिलता है जिसपर कोई राहत नहीं दी गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल का इम्पोर्ट कम होगा और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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