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Illegal transactions worth Rs 421 lakh crore in the global financial system

Illegal transactions worth Rs 421 lakh crore in the global financial system
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बिजनेस स्टैंडर्ड/ द इकोनॉमिस्ट.मुंबई17 मिनट पहले

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सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 48% पहला पेमेंट आने पर और 26% पैसा खाते से निकल जाने के बाद फ्रॉड ट्रैक कर पाते हैं।- प्रतीकात्मक इमेज

एआई साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। एआई एजेंट्स पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को आसानी से चकमा दे रहे हैं। साइबर सुरक्षा फर्म बायोकैच के ग्लोबल सर्वे में 88% बैंकिंग प्रोफेशनल्स ने माना कि एआई ने फ्रॉड और घोटालों को जटिल बना दिया है।

2025 में ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में करीब 421 लाख करोड़ के अवैध लेनदेन हुए। इसमें से 55 लाख करोड़ सीधे फ्रॉड का मामला था। अमेरिकी एजेंसी एफबीआई का अनुमान है कि फ्रॉड के 85% मामले दर्ज ही नहीं होते।

25 देशों के 1,440 फ्रॉड मैनेजमेंट और जोखिम विशेषज्ञों की राय

फ्रॉड के प्रयास 71%, नुकसान 59% बढ़े

81% विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी संस्था में फ्रॉड के प्रयास बढ़ रहे हैं। 2025 में यह वृद्धि 71% रही। 76% ने माना कि उनके बैंक को फ्रॉड से होने वाला नुकसान सिर्फ एक साल में 59% बढ़ गया है।

85% फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते। अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने ऐसा अनुमान लगाया है।

ग्लोबल फाइनेंशियल फ्रॉड बढ़ने के तीन सबसे बड़े कारण ये

59% बैंकर्स ने माना कि फौरन रकम ट्रांसफर करने वाले एप से फ्रॉड आसान है।

45% एक्सपर्ट्स ने कहा कि अपराधी लोगों को बहला-फुसलाकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। 45% ने एआई तकनीक के इस्तेमाल को कारण बनाया।

फ्रॉड में इन एआई टेक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल

डीपफेक, सोशल इंजीनियरिंग (50%) – आवाज, चेहरे की हूबहू नकल करके सगे-संबंधियों/अधिकारियों के नाम पर धोखा देना।

ऑटोमेटेड फिशिंग (48%) – बड़े पैमाने पर फर्जी ईमेल, मैसेज भेजना।

ऑटोमेटेड मनी लॉन्ड्रिंग (44%) – बिना मानवीय हस्तक्षेप के तेजी से पैसे को इधर-उधर ठिकाने लगाना।

सबसे बड़ा और नया खतरा एआई एजेंट्स, ज्यादातर बैंकिंग प्रोफेशनल्स के लिए इन्हें काबू करना मुश्किल

– 80% संस्थानों ने कहा है कि वे पहले ही एजेंटिक एआई इस्तेमाल करने वाले हमलों का सामना कर चुके हैं। 84% का मानना है कि अगले एक साल में ‘एआई एजेंट्स’ बैंकों की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो सकते हैं।

– 72% का मानना है कि भविष्य में जब एआई एजेंट्स लेनदेन शुरू करेंगे, तब वैध एआई-असिस्टेड लेनदेन और हैकर/अपराधी के दुर्भावनापूर्ण एआई लेनदेन के बीच फर्क कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

बैंक रियल-टाइम डेटा साझा करें

रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब अपराधी इतनी तेजी से काम कर रहे हैं, तो बैंकों को भी आपस में मिलकर रियल-टाइम में डेटा साझा करना होगा। 86% ने माना कि यदि पैसा प्राप्त करने वाले खाते की रियल-टाइम जानकारी मिल जाए, तो धोखाधड़ी को उसी वक्त रोकना संभव हो जाएगा।

म्यूल अकाउंट्स फ्रॉड इकोसिस्टम की ताकत

मनी म्यूल (पैसे की हेराफेरी के लिए आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फर्जी या किराए के बैंक खाते) फ्रॉड इकोसिस्टम की रीढ़ हैं। अकेले 2024 में बायोकैच के क्लाइंट्स ने 20 लाख मनी म्यूल खातों की पहचान की थी। दिक्कत यह है कि केवल 20% बैंक ही ऐसे खातों को पहली बार में ही पकड़ पाते हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 48% पहला पेमेंट आने पर और 26% पैसा खाते से निकल जाने के बाद फ्रॉड ट्रैक कर पाते हैं।

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फ्रॉड के प्रयास 71%, नुकसान 59% बढ़े

81% विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी संस्था में फ्रॉड के प्रयास बढ़ रहे हैं। 2025 में यह वृद्धि 71% रही। 76% ने माना कि उनके बैंक को फ्रॉड से होने वाला नुकसान सिर्फ एक साल में 59% बढ़ गया है।

85% फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते। अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने ऐसा अनुमान लगाया है।

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59% बैंकर्स ने माना कि फौरन रकम ट्रांसफर करने वाले एप से फ्रॉड आसान है।

45% एक्सपर्ट्स ने कहा कि अपराधी लोगों को बहला-फुसलाकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। 45% ने एआई तकनीक के इस्तेमाल को कारण बनाया।

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सबसे बड़ा और नया खतरा एआई एजेंट्स, ज्यादातर बैंकिंग प्रोफेशनल्स के लिए इन्हें काबू करना मुश्किल

– 80% संस्थानों ने कहा है कि वे पहले ही एजेंटिक एआई इस्तेमाल करने वाले हमलों का सामना कर चुके हैं। 84% का मानना है कि अगले एक साल में ‘एआई एजेंट्स’ बैंकों की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो सकते हैं।

– 72% का मानना है कि भविष्य में जब एआई एजेंट्स लेनदेन शुरू करेंगे, तब वैध एआई-असिस्टेड लेनदेन और हैकर/अपराधी के दुर्भावनापूर्ण एआई लेनदेन के बीच फर्क कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

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रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब अपराधी इतनी तेजी से काम कर रहे हैं, तो बैंकों को भी आपस में मिलकर रियल-टाइम में डेटा साझा करना होगा। 86% ने माना कि यदि पैसा प्राप्त करने वाले खाते की रियल-टाइम जानकारी मिल जाए, तो धोखाधड़ी को उसी वक्त रोकना संभव हो जाएगा।

म्यूल अकाउंट्स फ्रॉड इकोसिस्टम की ताकत

मनी म्यूल (पैसे की हेराफेरी के लिए आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फर्जी या किराए के बैंक खाते) फ्रॉड इकोसिस्टम की रीढ़ हैं। अकेले 2024 में बायोकैच के क्लाइंट्स ने 20 लाख मनी म्यूल खातों की पहचान की थी। दिक्कत यह है कि केवल 20% बैंक ही ऐसे खातों को पहली बार में ही पकड़ पाते हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 48% पहला पेमेंट आने पर और 26% पैसा खाते से निकल जाने के बाद फ्रॉड ट्रैक कर पाते हैं।

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