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वाराणसी में जसपाल राणा का अंतिम संस्कार आज:चार्टर्ड प्लेन से पहुंच रही पार्थिव देह; खुद चुना था मणिकर्णिका घाट

वाराणसी में जसपाल राणा का अंतिम संस्कार आज:चार्टर्ड प्लेन से पहुंच रही पार्थिव देह; खुद चुना था मणिकर्णिका घाट

उत्तराखंड में जन्मे दिग्गज शूटर, पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्डी जसपाल राणा (49) का अंतिम संस्कार आज वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। आज दोपहर उनका पार्थिव शरीर देहरादून के जोलीग्रांट एयरपोर्ट से चार्टर्ड प्लेन के जरिए वाराणसी के लिए रवाना हो गया। सूत्रों के अनुसार खेल और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी। वाराणसी पहुंचने के बाद मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी है। पार्थिव शरीर के साथ राणा के पिता नारायण सिंह राणा, पत्नी आरुषि, बेटा युवराज, बेटी देवांशी, बहन सुषमा और छोटा भाई सुभाष राणा भी वाराणसी के लिए रवाना हुए हैं। शुक्रवार रात उनके पैतृक गांव में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कई राष्ट्रीय खिलाड़ी, राजनीतिक हस्तियां और बड़ी संख्या में शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 11 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे राणा जसपाल राणा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया था। वह पिछले 11 दिनों से दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती थे। परिवार के अनुसार जर्मनी से भारत लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से खेल जगत, राजनीतिक गलियारों और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। टिहरी के रहने वाले, फिर वाराणसी में क्यों होगा अंतिम संस्कार जसपाल राणा का परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के टिहरी जिले से जुड़ा है, लेकिन उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जा रहा है। इसके पीछे उनकी अपनी अंतिम इच्छा बताई जा रही है। राणा के चाचा राजेंद्र राणा के अनुसार, जसपाल राणा ने कई बार परिवार के सामने इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर किया जाए। इसी वजह से परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए वाराणसी में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। मणिकर्णिका घाट को हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति से जुड़ा सबसे पवित्र श्मशान घाटों में माना जाता है। गुरु को अंतिम विदाई देते वक्त रो पड़ीं मनु भाकर ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर बीते कल ही अपने कोच जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने शुक्रवार शाम देहरादून पहुंच गईं थी। कोच के पार्थिव शरीर को देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा से लिपटकर रो पड़ीं। मनु भाकर के करियर में जसपाल राणा की भूमिका बेहद अहम रही है। जूनियर स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में उन्होंने मनु को लगातार मार्गदर्शन दिया। पेरिस ओलिंपिक में मनु के दो पदकों के पीछे भी जसपाल राणा के प्रशिक्षण और अनुभव को बड़ी वजह माना जाता है। 600 से ज्यादा मेडल, 2006 एशियाड में रचा इतिहास जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम 600 से अधिक पदक दर्ज हैं। 1994 में मिलान में हुई जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उसी साल हिरोशिमा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। 2006 दोहा एशियन गेम्स उनके करियर का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। वहां उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 अंक का वर्ल्ड-इक्वलिंग स्कोर बनाया और तीन गोल्ड तथा एक सिल्वर मेडल जीता। राहुल गांधी से शूटिंग रेंज में शुरू हुई दोस्ती जसपाल राणा का रिश्ता सिर्फ खेल जगत तक सीमित नहीं था। उनकी राहुल गांधी के साथ साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ ही व्यक्तिगत रिश्ते थे। कुछ परिवारिक सूत्रों की मानें तो राणा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पहली मुलाकात भी शूटिंग रेंज में हुई थी। निशानेबाजी के साझा शौक ने दोनों को करीब लाया और बाद में राजनीति में आने के बाद भी यह रिश्ता बना रहा। 2012 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद जसपाल राणा पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे। राहुल गांधी के साथ उनकी कई मुलाकातें और सार्वजनिक कार्यक्रम चर्चा में रहे। उनके निधन पर राहुल गांधी ने भी शोक व्यक्त करते हुए भारतीय शूटिंग में उनके योगदान को याद किया। बीजेपी से कांग्रेस तक, पिता अलग दल में रहे खेल के बाद जसपाल राणा राजनीति में भी सक्रिय हुए। 2009 में वे बीजेपी के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे, हालांकि जीत नहीं सके। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा बीजेपी में सक्रिय थे, जबकि जसपाल कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे। पिता-पुत्र की अलग-अलग राजनीतिक राह उस दौर में उत्तराखंड की चर्चित राजनीतिक कहानियों में शामिल रही। राजनाथ सिंह परिवार से भी जुड़ा था रिश्ता जसपाल राणा की बहन सुषमा सिंह की शादी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा विधायक पंकज सिंह से हुई है। इस रिश्ते के चलते उनका परिवार देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों से भी जुड़ा रहा। खेल, राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने वाले जसपाल राणा अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसमें मेडल, रिकॉर्ड, शिष्य और प्रेरणा की लंबी श्रृंखला शामिल है। ———————— ये खबर पढ़ें… उत्तराखंड के शूटर जसपाल राणा को अंतिम विदाई:कोच के पार्थिव शरीर को देख रो पड़ीं मनु भाकर, कल वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार उत्तराखंड के दिग्गज शूटर और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 49 वर्षीय राणा पिछले 11 दिनों से दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती थे। जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। शुक्रवार शाम उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंदा स्थित मझोन गांव में उनके आवास पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जुटी हुई है। (पढ़ें पूरी खबर)

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