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परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का गुरुमंत्र:एआई के दौर में आइडिया खोने के डर को फ्यूल बनाएं, शीर्ष पर बने रहेंगे

परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का गुरुमंत्र:एआई के दौर में आइडिया खोने के डर को फ्यूल बनाएं, शीर्ष पर बने रहेंगे

‘बिलियन डॉलर की कंपनी बनाना मुश्किल है, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती है दूसरों को अपना आइडिया चुराने से रोकना और उससे बेहतर बनाने से बचाना’… एआई सर्च इंजन ‘परप्लेक्सिटी’ के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने हाल में एक पॉडकॉस्ट में टेक दिग्गजों से मिली सीख साझा की, पढ़िए… बढ़ती चुनौतियों पर – ‘अगर आपका आइडिया बड़ा है और वह करोड़ों डॉलर कमा सकता है, तो मानकर चलिए कि बड़ी कंपनियां आपकी नकल जरूर करेंगी। आपको इस डर के साथ जीना और इसे गले लगाना सीखना होगा। उस डर के साथ सोना, उसी के साथ उठना, और हर दिन यह उत्साह रखना कि आप क्या बना रहे हैं- यही आगे बढ़ाता है। स्टार्टअप की यात्रा लंबी होती है। थकान आती है। अनिश्चितता रहती है। ऐसे में वही लोग टिकते हैं जो दबाव को ऊर्जा में बदलते हैं। मैं इसे ‘फ्यूल’ की तरह देखता हूं। यानी डर आपको तेज बनाता है। सतर्क रखता है। सुधार के लिए मजबूर करता है। यह बात एआई जैसे क्षेत्र में अहम है, जहां बदलाव तेज है और प्रतिस्पर्धी हर तरफ हैं। इनोवेशन पर – बढ़त तेजी से मूव करने और पहचान बनाने से आती है। फीचर कॉपी हो सकते हैं, पर ब्रांड, भरोसा, आदतें व यूजर एक्सपीरियंस कॉपी करना मुश्किल है। अंत में फर्क यूजर को पड़ता है… कौन बेहतर सर्च अनुभव व उपयोगी जवाब दे रहा है और तेजी से सुधार कर रहा है। इसी सोच से परप्लेक्सिटी ने एआई-पावर्ड सर्च इंजन बनाया, जो गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई, एंथ्रोपिक जैसे प्लेयर्स की इनोवेशन रेस में चर्चा में रहा। भविष्य पर – एआई की यह जंग जितनी डरावनी है, उतनी ही रोमांचक भी। जीत उसी की होगी जो डरकर रुकने के बजाय लगातार दौड़ता रहेगा। सैम ऑल्टमैन और मार्क क्यूबन जैसी दिग्गज भविष्यवाणी कर रहे हैं कि एआई आने वाले समय में नए अरबपतियों और ट्रिलियनेयर्स की बाढ़ ला देगा, ऐसे में स्टार्टअप्स को बढ़ती प्रतियोगिता से डरने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाना चाहिए। वर्क-लाइफ बैलेंस पर – दुख की बात है कि मैं काम के अलावा और कुछ नहीं करता। जब भी समय मिलता है, पॉडकास्ट या ऑडियोबुक्स सुन लेता हूं। हालांकि वीकेंड पर परिवार के लिए वक्त निकालता हूं। हफ्ते में तीन दिन जिम भी जाता हूं… कड़ी मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हर सुबह इस रोमांच के साथ उठना जरूरी है कि आप कुछ नया बना रहे हैं दिग्गजों से सीख – शीर्ष पर होते हुए भी सहज कैसे रहा जा सकता है ये मैंने दो टेक दिग्गजों से सीखा। दुनिया की सबसे एडवांस एआई चिप्स बनाने वाले जेंसेन हुआंग हमेशा इस खौफ और मानसिकता के साथ काम करते हैं कि उनकी कंपनी दिवालिया होने से महज 30 दिन दूर है। यही डर उन्हें कभी सुस्त नहीं होने देता। दूसरी तरफ, इलॉन मस्क से सीखा कि काम सिर्फ पैसों के लिए नहीं होना चाहिए। मस्क की दौलत नहीं, बल्कि मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों को बसाने का उनका जुनून मुझे प्रेरित करता है।’

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परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का गुरुमंत्र:एआई के दौर में आइडिया खोने के डर को फ्यूल बनाएं, शीर्ष पर बने रहेंगे

‘बिलियन डॉलर की कंपनी बनाना मुश्किल है, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती है दूसरों को अपना आइडिया चुराने से रोकना और उससे बेहतर बनाने से बचाना’… एआई सर्च इंजन ‘परप्लेक्सिटी’ के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने हाल में एक पॉडकॉस्ट में टेक दिग्गजों से मिली सीख साझा की, पढ़िए… बढ़ती चुनौतियों पर – ‘अगर आपका आइडिया बड़ा है और वह करोड़ों डॉलर कमा सकता है, तो मानकर चलिए कि बड़ी कंपनियां आपकी नकल जरूर करेंगी। आपको इस डर के साथ जीना और इसे गले लगाना सीखना होगा। उस डर के साथ सोना, उसी के साथ उठना, और हर दिन यह उत्साह रखना कि आप क्या बना रहे हैं- यही आगे बढ़ाता है। स्टार्टअप की यात्रा लंबी होती है। थकान आती है। अनिश्चितता रहती है। ऐसे में वही लोग टिकते हैं जो दबाव को ऊर्जा में बदलते हैं। मैं इसे ‘फ्यूल’ की तरह देखता हूं। यानी डर आपको तेज बनाता है। सतर्क रखता है। सुधार के लिए मजबूर करता है। यह बात एआई जैसे क्षेत्र में अहम है, जहां बदलाव तेज है और प्रतिस्पर्धी हर तरफ हैं। इनोवेशन पर – बढ़त तेजी से मूव करने और पहचान बनाने से आती है। फीचर कॉपी हो सकते हैं, पर ब्रांड, भरोसा, आदतें व यूजर एक्सपीरियंस कॉपी करना मुश्किल है। अंत में फर्क यूजर को पड़ता है… कौन बेहतर सर्च अनुभव व उपयोगी जवाब दे रहा है और तेजी से सुधार कर रहा है। इसी सोच से परप्लेक्सिटी ने एआई-पावर्ड सर्च इंजन बनाया, जो गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई, एंथ्रोपिक जैसे प्लेयर्स की इनोवेशन रेस में चर्चा में रहा। भविष्य पर – एआई की यह जंग जितनी डरावनी है, उतनी ही रोमांचक भी। जीत उसी की होगी जो डरकर रुकने के बजाय लगातार दौड़ता रहेगा। सैम ऑल्टमैन और मार्क क्यूबन जैसी दिग्गज भविष्यवाणी कर रहे हैं कि एआई आने वाले समय में नए अरबपतियों और ट्रिलियनेयर्स की बाढ़ ला देगा, ऐसे में स्टार्टअप्स को बढ़ती प्रतियोगिता से डरने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाना चाहिए। वर्क-लाइफ बैलेंस पर – दुख की बात है कि मैं काम के अलावा और कुछ नहीं करता। जब भी समय मिलता है, पॉडकास्ट या ऑडियोबुक्स सुन लेता हूं। हालांकि वीकेंड पर परिवार के लिए वक्त निकालता हूं। हफ्ते में तीन दिन जिम भी जाता हूं… कड़ी मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हर सुबह इस रोमांच के साथ उठना जरूरी है कि आप कुछ नया बना रहे हैं दिग्गजों से सीख – शीर्ष पर होते हुए भी सहज कैसे रहा जा सकता है ये मैंने दो टेक दिग्गजों से सीखा। दुनिया की सबसे एडवांस एआई चिप्स बनाने वाले जेंसेन हुआंग हमेशा इस खौफ और मानसिकता के साथ काम करते हैं कि उनकी कंपनी दिवालिया होने से महज 30 दिन दूर है। यही डर उन्हें कभी सुस्त नहीं होने देता। दूसरी तरफ, इलॉन मस्क से सीखा कि काम सिर्फ पैसों के लिए नहीं होना चाहिए। मस्क की दौलत नहीं, बल्कि मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों को बसाने का उनका जुनून मुझे प्रेरित करता है।’

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