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FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players

FIFA World Cup 2026 becomes a major platform for overseas players
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चार्लोट हरपुर/ जोशुआ क्लोके. न्यूयॉर्क2 मिनट पहले

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अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है।- फाइल फोटो

फीफा वर्ल्ड कप 2026 मैदान के साथ-साथ खिलाड़ियों की नागरिकता और माइग्रेशन के दिलचस्प आंकड़ों के लिए भी चर्चा में है। 48 टीमों के 1,248 खिलाड़ियों में से 292 खिलाड़ी उस देश के लिए नहीं खेल रहे हैं जहां उनका जन्म हुआ था।

टूर्नामेंट में केवल 8 टीमें ऐसी हैं जिनमें कोई विदेशी मूल का खिलाड़ी शामिल नहीं है। माइग्रेशन, पुराने औपनिवेशिक संबंधों और फीफा के बदले नियमों ने वर्ल्ड कप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आंकड़ों के लिहाज से फ्रांस सबसे आगे है। इस वर्ल्ड कप में फ्रांस में जन्मे 98 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इनमें से 76 खिलाड़ी फ्रांस की बजाय अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

फुटबॉल में यह स्थिति नई नहीं है। 1930 के पहले वर्ल्ड कप में अमेरिकी टीम में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में जन्मे खिलाड़ी थे। समय के साथ फीफा ने दोहरी नागरिकता वाले नियमों में कई बदलाव किए। पहले यूथ लेवल पर एक देश के लिए खेलने के बाद टीम नहीं बदल सकते थे, लेकिन 2004 और 2009 में अल्जीरिया की मांग पर नियमों में ढील दी गई।

नए नियम के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी ने 21 साल से पहले अधिकतम 3 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं, तो आखिरी मैच के तीन साल बाद वह अपनी राष्ट्रीय टीम बदल सकता है। इसके अलावा जन्म, माता-पिता या दादा-दादी के जन्मस्थान या संबंधित देश में लगातार पांच साल रहने के आधार पर भी टीम चुनी जा सकती है। जमाल मुसियाला, फोलारिन बालोगन और डेक्लान राइस जैसे खिलाड़ी इसके बड़े उदाहरण हैं। डिएगो कोस्टा ने भी ब्राजील के लिए फ्रेंडली मैच खेलने के बाद स्पेन को चुना था। हालांकि, 2004 में ब्राजील के स्ट्राइकर एल्टन को बिना किसी पारिवारिक संबंध के भारी रकम देकर कतर की नागरिकता देने की बात भी सामने आई थी।

इन नियमों के चलते अब फुटबॉल फेडरेशन सही खिलाड़ियों की तलाश के लिए बेहद आधुनिक और अप्रत्याशित तरीके अपना रहे हैं। वे एजेंटों के अलावा लिंक्डइन, वॉट्सऐप और ‘फुटबॉल मैनेजर’ जैसे वीडियो गेम्स के डेटाबेस का सहारा ले रहे हैं। कनाडा के ल्यूक डी फौगरोल्स का चयन पिता द्वारा कोच को भेजे गए लिंक्डइन मैसेज से और अल्फी जोन्स का चयन सौना बाथ में हुई बातचीत से संभव हुआ। ‘फुटबॉल मैनेजर’ गेम से चिली को बेन ब्रेरेटन डियाज मिले। फेडरेशन सीधे परिवारों से भी जुड़ रहे हैं; पोलैंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने तो न्यूयॉर्क जाकर युवा खिलाड़ी जूलियन हॉल की मां से मुलाकात की और उन्हें पोलैंड की जर्सी भेंट की। विदेशी मूल के खिलाड़ियों की यह होड़ वर्ल्ड कप का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है।

अल्जीरिया की टीम में 50% विदेशी मूल के खिलाड़ी

अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है, जबकि हैती में 12 ऐसे खिलाड़ी हैं। पहली बार खेल रही कुराकाओ की टीम में एक को छोड़कर सभी खिलाड़ी डच मूल के हैं। कतर की टीम में 11 अलग-अलग देशों में जन्मे खिलाड़ी हैं। वहीं, मोरक्को ने तो ब्राजील के खिलाफ मैच के दूसरे हाफ में ऐसे सभी 11 खिलाड़ी उतारे जिनका जन्म मोरक्को के बाहर हुआ था।

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चार्लोट हरपुर/ जोशुआ क्लोके. न्यूयॉर्क2 मिनट पहले

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अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है।- फाइल फोटो

फीफा वर्ल्ड कप 2026 मैदान के साथ-साथ खिलाड़ियों की नागरिकता और माइग्रेशन के दिलचस्प आंकड़ों के लिए भी चर्चा में है। 48 टीमों के 1,248 खिलाड़ियों में से 292 खिलाड़ी उस देश के लिए नहीं खेल रहे हैं जहां उनका जन्म हुआ था।

टूर्नामेंट में केवल 8 टीमें ऐसी हैं जिनमें कोई विदेशी मूल का खिलाड़ी शामिल नहीं है। माइग्रेशन, पुराने औपनिवेशिक संबंधों और फीफा के बदले नियमों ने वर्ल्ड कप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आंकड़ों के लिहाज से फ्रांस सबसे आगे है। इस वर्ल्ड कप में फ्रांस में जन्मे 98 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इनमें से 76 खिलाड़ी फ्रांस की बजाय अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

फुटबॉल में यह स्थिति नई नहीं है। 1930 के पहले वर्ल्ड कप में अमेरिकी टीम में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में जन्मे खिलाड़ी थे। समय के साथ फीफा ने दोहरी नागरिकता वाले नियमों में कई बदलाव किए। पहले यूथ लेवल पर एक देश के लिए खेलने के बाद टीम नहीं बदल सकते थे, लेकिन 2004 और 2009 में अल्जीरिया की मांग पर नियमों में ढील दी गई।

नए नियम के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी ने 21 साल से पहले अधिकतम 3 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं, तो आखिरी मैच के तीन साल बाद वह अपनी राष्ट्रीय टीम बदल सकता है। इसके अलावा जन्म, माता-पिता या दादा-दादी के जन्मस्थान या संबंधित देश में लगातार पांच साल रहने के आधार पर भी टीम चुनी जा सकती है। जमाल मुसियाला, फोलारिन बालोगन और डेक्लान राइस जैसे खिलाड़ी इसके बड़े उदाहरण हैं। डिएगो कोस्टा ने भी ब्राजील के लिए फ्रेंडली मैच खेलने के बाद स्पेन को चुना था। हालांकि, 2004 में ब्राजील के स्ट्राइकर एल्टन को बिना किसी पारिवारिक संबंध के भारी रकम देकर कतर की नागरिकता देने की बात भी सामने आई थी।

इन नियमों के चलते अब फुटबॉल फेडरेशन सही खिलाड़ियों की तलाश के लिए बेहद आधुनिक और अप्रत्याशित तरीके अपना रहे हैं। वे एजेंटों के अलावा लिंक्डइन, वॉट्सऐप और ‘फुटबॉल मैनेजर’ जैसे वीडियो गेम्स के डेटाबेस का सहारा ले रहे हैं। कनाडा के ल्यूक डी फौगरोल्स का चयन पिता द्वारा कोच को भेजे गए लिंक्डइन मैसेज से और अल्फी जोन्स का चयन सौना बाथ में हुई बातचीत से संभव हुआ। ‘फुटबॉल मैनेजर’ गेम से चिली को बेन ब्रेरेटन डियाज मिले। फेडरेशन सीधे परिवारों से भी जुड़ रहे हैं; पोलैंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने तो न्यूयॉर्क जाकर युवा खिलाड़ी जूलियन हॉल की मां से मुलाकात की और उन्हें पोलैंड की जर्सी भेंट की। विदेशी मूल के खिलाड़ियों की यह होड़ वर्ल्ड कप का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है।

अल्जीरिया की टीम में 50% विदेशी मूल के खिलाड़ी

अपनी टीम में सबसे ज्यादा विदेशी मूल के खिलाड़ी शामिल करने में अल्जीरिया (13) शीर्ष पर है, जबकि हैती में 12 ऐसे खिलाड़ी हैं। पहली बार खेल रही कुराकाओ की टीम में एक को छोड़कर सभी खिलाड़ी डच मूल के हैं। कतर की टीम में 11 अलग-अलग देशों में जन्मे खिलाड़ी हैं। वहीं, मोरक्को ने तो ब्राजील के खिलाफ मैच के दूसरे हाफ में ऐसे सभी 11 खिलाड़ी उतारे जिनका जन्म मोरक्को के बाहर हुआ था।

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