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From Journalist to ‘King of the North’ and Labour Leadership Contender

From Journalist to ‘King of the North’ and Labour Leadership Contender
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लंदन19 मिनट पहले

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ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है।

बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी।

इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने…

टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम

बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे।

एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था।

उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था।

आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ

एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे।

पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी।

एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं।

बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने

एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने।

इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया।

गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी

2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई।

पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा।

आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला

दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की।

कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया।

अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए

स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं।

हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था।

पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे

मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था।

खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया।

इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली।

इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी।

आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं।

फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं।

प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं।

इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है।

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ये खबर भी पढ़ें

ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा:100 से ज्यादा सांसद विरोध में थे; 10 साल में ब्रिटेन के पांचवें प्रधानमंत्री ने पद छोड़ा

कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। पूरी खबर पढ़ें

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लंदन19 मिनट पहले

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बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी।

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टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम

बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे।

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उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था।

आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ

एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे।

पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी।

एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं।

बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने

एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने।

इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया।

गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी

2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई।

पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा।

आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला

दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की।

कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया।

अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए

स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं।

हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था।

पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे

मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था।

खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया।

इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली।

इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी।

आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं।

फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं।

प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं।

इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है।

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कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। पूरी खबर पढ़ें

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