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इंपैक्ट फीचर:करियर में AI की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए डब्लूपीयू गोवा ने उच्च शिक्षा में कई विषयों की जानकारी होने की वकालत की

इंपैक्ट फीचर:करियर में AI की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए डब्लूपीयू गोवा ने उच्च शिक्षा में कई विषयों की जानकारी होने की वकालत की

यूनिवर्सिटी नेतृत्व का कहना है कि तकनीक में तेजी से होती उथल-पुथल के इस दौर में, छात्रों के लिए परिस्थितियों के अनुकूल ढलना, जीवन भर सीखते रहना और ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा ग्रहण करना बेहद ज़रूरी हो गया है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य दुनियाभर के उद्योगों को नया आकार दे रहे हैं, विश्वविद्यालयों को छात्रों को सिर्फ उनकी पहली नौकरी के लिए तैयार करने से आगे सोचना होगा। इसके बजाय संस्थानों को छात्रों को इस तरह सक्षम बनाना चाहिए ताकि वे अपने जीवन में करियर के विभिन्न बदलावों और पड़ावों को सफलतापूर्वक संभाल सकें, ऐसा वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (डब्लूपीयू) गोवा में आयोजित ‘ओपन हाउस’ में वक्ताओं ने कहा। इस ओपन हाउस का आयोजन 20 जून को हुआ था। इस कार्यक्रम में भविष्य की उच्च शिक्षा और एक बेहद अप्रत्याशित होती दुनिया में विश्वविद्यालयों से बदलती अपेक्षाओं पर चर्चा के लिए भावी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साथ लाया गया। इस बातचीत के केंद्र में डब्लूपीयू गोवा का ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी’ शिक्षा मॉडल था। यह मॉडल किसी एक विषय की गहराई को विभिन्‍न क्षेत्रों में सोचने, बदलाव के अनुकूल ढलने और वास्तविक दुनिया की जटिल चुनौतियों का समाधान करने की क्षमता के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव वाइस चांसलर प्रोफेसर वाल्टर लील ने कहा, “डब्ल्यूपीयू गोवा की स्थापना एक ट्रांसडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण के साथ की जा रही है, जो फैकल्टी और छात्रों को किसी एक विषय की सीमाओं से परे सोचने और जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव, उद्योग से जुड़ाव, वैश्विक दृष्टि और खुद से सीखने पर पर जोर दिया जाता है। इसका मकसद छात्रों को इस तरह तैयार करना है कि वे जीवनभर सीखते रहें, हर परिस्थिति में ढल सकें और नेतृत्व कर सकें। इसके अलावा, यह शिक्षा छात्रों के लिए निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में अच्छे करियर के रास्ते भी खोलती है, ताकि वे अपनी सीख का सही उपयोग कर सकें।” डब्लूपीयू गोवा के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज ने कहा, “विश्वविद्यालय अब यह मानकर नहीं चल सकते कि छात्रों को उनकी पहली नौकरी के लिए तैयार कर देना ही काफी है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या हम छात्रों को उन कई बदलावों, संक्रमणों और अवसरों के लिए तैयार कर रहे हैं जिनका सामना वे अपने पूरे जीवन में करेंगे। भविष्य केवल विशेषज्ञों का नहीं है, बल्कि उन लोगों का है जो निरंतर सीख सकते हैं, विभिन्न क्षेत्रों के विचारों को आपस में जोड़ सकते हैं और ऐसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं जो पारंपरिक श्रेणियों में फिट नहीं बैठतीं।” नए पेशे उभर रहे हैं इस चर्चा में इस बात पर विचार किया गया कि जैसे-जैसे उद्योग पारंपरिक शैक्षणिक चक्रों की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो रहे हैं, उच्च शिक्षा के बारे में लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं को कैसे चुनौती मिल रही है। नए पेशे उभर रहे हैं, स्थापित भूमिकाएं बदल रही हैं, और अब प्रतिस्पर्धा उन व्यक्तियों से बढ़ रही है जो किसी एक विषय के दायरे में काम करने के बजाय कई क्षेत्रों की विशेषज्ञता को जोड़ सकते हैं। चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे सीखने, नई परिस्थितियों में ढलने और विभिन्न विषयों के बीच मिलकर काम करने की क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता जितनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है। इस बातचीत में भविष्य के करियर के लिए आवश्यक क्षमताओं के रूप में जिज्ञासा, लचीलेपन और जीवन भर सीखते रहने की प्रवृत्ति के बढ़ते महत्व पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को छात्रों को केवल मौजूदा व्यवसायों के लिए प्रशिक्षित करने के बजाय, निरंतर उन अवसरों के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनकी भविष्यवाणी अभी नहीं की जा सकती है। डब्लूपीयू गोवा वर्तमान में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) में बी.टेक., बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (ऑनर्स), इंटीग्रेटेड प्रोडक्ट डिजाइन में बी.डेस., कम्युनिकेशन डिजाइन में बी.डेस., और साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) में बी.एससी. (ऑनर्स) की डिग्री प्रदान करता है। ऐसे समय में जब छात्र और अभिभावक कार्यक्षेत्र के भविष्य को लेकर स्पष्टता की तलाश कर रहे हैं, इस चर्चा ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए न केवल रोजगार क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने, बल्कि शिक्षार्थियों को उनके पूरे व्यावसायिक जीवन में निरंतर होने वाले बदलावों को सफलतापूर्वक संभालने के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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