Sunday, 27 Sep 2026 | 07:17 AM

Trending :

रामायण इवेंट में मीडिया ने किया साढ़े चार घंटे इंतजार:मिस्टर बीस्ट के आने में हुई देरी; रणबीर-साई पल्लवी समेत टीम पहले से मौजूद थी रीति तिवारी को सलमान ने फटकारा:बोले- बिग बॉस से पहले कोई नहीं जानता था; एकम बावा ने खुद को बताया सौतेला पिता, रानी से शादी का दावा रीति तिवारी को सलमान ने फटकारा:बोले- बिग बॉस से पहले कोई नहीं जानता था; एकम बावा ने खुद को बताया सौतेला पिता, रानी से शादी का दावा जयपुर में ORRY की शादी!:होटल में दो दिन अलग-अलग इवेंट होंगे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और मॉडल आए ‘द वन’ ने पहले दिन ₹8 करोड़ कमाए:सिद्धार्थ की पिछली 10 फिल्मों में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग; ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन ₹3.35 करोड़ कमाए कृति सेन ने पितृसत्ता पर उठाए सवाल:कहा- कब तक पूछेंगे कि लड़की ने क्या पहना, आदमियों को क्यों नहीं सिखाते कि शोषण, जबरदस्ती न करें
EXCLUSIVE

जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Womens T20 World Cup 2026 Semifinal | England vs South Africa

July 2, 2026/
4:31 am

स्पोर्ट्स डेस्क11 मिनट पहले कॉपी लिंक विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल आज इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के...

Gus Atkinson celebrates taking the wicket of New Zealand's Will O'Rourke (Picture credit: AP)

June 6, 2026/
6:46 pm

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 18:46 IST रणदीप सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि रेड्डी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव...

US Senate Rejects Iran Military Action Resolution

July 31, 2026/
7:04 am

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सीनेट चेंबर। (फाइल फोटो।) अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य...

United States' Folarin Balogun (20) and Antonee Robinson (5) celebrate after scoring during the World Cup Group D soccer match between the United States and Australia in Seattle, Friday, June 19, 2026. (AP Photo/Ted S. Warren)

June 20, 2026/
4:27 am

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 04:27 IST राजनीतिक विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए शिंदे ने कहा कि जो लोग भारत को...

रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड बचपन के दोस्त से इनसिक्योर है:कहता है, दोस्ती तोड़ लो, मुझे दोस्ती और प्यार दोनों चाहिए, क्या करूं?

May 20, 2026/
4:30 am

सवाल- मेरी उम्र 23 साल है। मैं एक रिलेशनशिप में हूं। हमने साथ में अच्छा समय बिताया है, लेकिन पिछले...

राजनीति

जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.