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पाक आतंकी संगठन चैटजीपीटी, क्लाउड-जैमिनी के खिलाफ:जैश-लश्कर ने मदरसों में AI इस्तेमाल के विरुद्ध फतवा जारी किया; कहा- इस्लाम की उदारवादी व्याख्या पसंद नहीं, छात्र मौलवियों से ही सवाल पूछें

पाक आतंकी संगठन चैटजीपीटी, क्लाउड-जैमिनी के खिलाफ:जैश-लश्कर ने मदरसों में AI इस्तेमाल के विरुद्ध फतवा जारी किया; कहा- इस्लाम की उदारवादी व्याख्या पसंद नहीं, छात्र मौलवियों से ही सवाल पूछें

पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अपने लगभग 5 हजार मदरसों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स के खिलाफ फतवा जारी किया है। यहां पर लगभग 12 लाख छात्र पढ़ते हैं। दरअसल, ये एआई टूल्स जैसे चैटजीपीटी, क्लाउड, जैमिनी और ग्रोक इस्लाम धर्म से जुड़े सवालों के उदारवादी जवाब दे रहे थे। जबकि इन मदरसों में मौलवियों द्वारा धर्म की कट्‌टरपंथी व्याख्या छात्रों को बताई जाती है, जो कुरान अथवा हदीस के अनुरूप नहीं होती है। जबकि एआई टूल्स अपने डेटाबेस के इनपुट से सही व्याख्या कर छात्रों को बता रहा है। जैश और लश्कर ने अपने नए आदेश में छात्रों को कहा है कि वे मौलवियों से क्लास में धर्म से जुड़े सवाल व्यक्तिगत रूप से पूछें। मोबाइल पर एआई टूल्स का उपयोग नहीं किया जाए। कैसे काम करते हैं मदरसे पाक में एलीमेंटरी एजुकेशन काफी हद तक मदरसों पर आधारित हैं। देवबंदी सिलसिले से जुड़े जैश-लश्कर के ये मदरसे इससे जुड़ी मस्जिदों से मिलने वाले फंड से संचालित होते हैं। नियंत्रण की हकीकत क्या पाक में मदरसा बोर्ड और वक्फ बोर्ड भी है, पर इनकी असल कमान खुफिया एजेंसी आईएसआई के पास होती है। मदरसों में ब्रेनवॉश कुछ छात्र आईएसआई के लिए भारत के खिलाफ आतंकी करतूतों के लिए रंगरूट साबित होते हैं। पीओके के मुज्जफराबाद और नीलम घाटी से जैश इन छात्रों को भारत में लॉन्च करती है। खाड़ी के देश सऊदी अरब सहित खाड़ी के अन्य इस्लामी देशों में इस्लामी यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में धार्मिक तालीम के लिए अपने एआई टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये सॉफ्टवेयर इन देशों ने अपने स्तर पर विकसित किए हुए हैं। ऑपरेशन ​सिंदूर में तबाह बहावलपुर मदरसे में लौटा मसूद ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हमले में तबाह हुए जैश के बहावलपुर मुख्यालय के मदरसे में जनवरी में मरम्मत पूरी होने के बाद छात्र लौट आए हैं। यहां पर नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं। पाक सरकार और आर्मी ने फंड जारी किया था। सूत्रों के अनुसार जैश का सरगना मौलाना मसूद अजहर इन दिनों रावलपिंडी के आईएसआई सेफ हाउस से निकलकर बहावलपुर मदरसे में रह रहा है।

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पाक आतंकी संगठन चैटजीपीटी, क्लाउड-जैमिनी के खिलाफ:जैश-लश्कर ने मदरसों में AI इस्तेमाल के विरुद्ध फतवा जारी किया; कहा- इस्लाम की उदारवादी व्याख्या पसंद नहीं, छात्र मौलवियों से ही सवाल पूछें

पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अपने लगभग 5 हजार मदरसों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स के खिलाफ फतवा जारी किया है। यहां पर लगभग 12 लाख छात्र पढ़ते हैं। दरअसल, ये एआई टूल्स जैसे चैटजीपीटी, क्लाउड, जैमिनी और ग्रोक इस्लाम धर्म से जुड़े सवालों के उदारवादी जवाब दे रहे थे। जबकि इन मदरसों में मौलवियों द्वारा धर्म की कट्‌टरपंथी व्याख्या छात्रों को बताई जाती है, जो कुरान अथवा हदीस के अनुरूप नहीं होती है। जबकि एआई टूल्स अपने डेटाबेस के इनपुट से सही व्याख्या कर छात्रों को बता रहा है। जैश और लश्कर ने अपने नए आदेश में छात्रों को कहा है कि वे मौलवियों से क्लास में धर्म से जुड़े सवाल व्यक्तिगत रूप से पूछें। मोबाइल पर एआई टूल्स का उपयोग नहीं किया जाए। कैसे काम करते हैं मदरसे पाक में एलीमेंटरी एजुकेशन काफी हद तक मदरसों पर आधारित हैं। देवबंदी सिलसिले से जुड़े जैश-लश्कर के ये मदरसे इससे जुड़ी मस्जिदों से मिलने वाले फंड से संचालित होते हैं। नियंत्रण की हकीकत क्या पाक में मदरसा बोर्ड और वक्फ बोर्ड भी है, पर इनकी असल कमान खुफिया एजेंसी आईएसआई के पास होती है। मदरसों में ब्रेनवॉश कुछ छात्र आईएसआई के लिए भारत के खिलाफ आतंकी करतूतों के लिए रंगरूट साबित होते हैं। पीओके के मुज्जफराबाद और नीलम घाटी से जैश इन छात्रों को भारत में लॉन्च करती है। खाड़ी के देश सऊदी अरब सहित खाड़ी के अन्य इस्लामी देशों में इस्लामी यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में धार्मिक तालीम के लिए अपने एआई टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये सॉफ्टवेयर इन देशों ने अपने स्तर पर विकसित किए हुए हैं। ऑपरेशन ​सिंदूर में तबाह बहावलपुर मदरसे में लौटा मसूद ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हमले में तबाह हुए जैश के बहावलपुर मुख्यालय के मदरसे में जनवरी में मरम्मत पूरी होने के बाद छात्र लौट आए हैं। यहां पर नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं। पाक सरकार और आर्मी ने फंड जारी किया था। सूत्रों के अनुसार जैश का सरगना मौलाना मसूद अजहर इन दिनों रावलपिंडी के आईएसआई सेफ हाउस से निकलकर बहावलपुर मदरसे में रह रहा है।

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