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ई-रिक्शा को बीच सड़क रोकने वाला चीनी एप बैन:गलत इस्तेमाल के बाद सरकार ने हटाने का निर्देश दिया, पर अभी प्लेस्टोर में मौजूद

ई-रिक्शा को बीच सड़क रोकने वाला चीनी एप बैन:गलत इस्तेमाल के बाद सरकार ने हटाने का निर्देश दिया, पर अभी प्लेस्टोर में मौजूद

दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों को इन दिनों एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर चलते-चलते ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाते हैं और दोबारा स्टार्ट नहीं होते। जांच में सामने आया है कि इसकी वजह कोई मैकेनिकल खराबी या बैटरी डिस्चार्ज होना नहीं, बल्कि ‘BAT-BMS’ नाम का चीनी स्मार्टफोन एप है। शरारती तत्व और सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट बनाने वाले लोग इस एप की मदद से दूर बैठे ही ई-रिक्शा को बंद कर रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ‘BAT-BMS’ समेत दो मोबाइल एप्लिकेशन्स को एप स्टोर्स से हटाने का निर्देश दिए हैं। CII साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने शुक्रवार को इस कार्रवाई की पुष्टि की है। सवाल 1: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा BAT-BMS एप असल में क्या है? जवाब: ‘BAT-BMS’ रियल टाइम बैटरी मैनेजमेंट टूल है। इसे चीनी कंपनी ‘शेन्ज़ेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी’ ने डेवलप किया है। इस एप का मुख्य काम ब्लूटूथ-इनेबल्ड लिथियम बैटरी की निगरानी करना है। यह एप बैटरी के चार्ज लेवल, वोल्टेज, टेम्परेचर और सेल हेल्थ जैसी जरूरी जानकारियां डिस्प्ले करता है। इसे आप अपनी बैटरी का एक तरह का डिजिटल डैशबोर्ड मान सकते हैं। सवाल 2: यह एप कैसे काम करता है और लोग इससे चलते हुए ई-रिक्शा कैसे रोक पा रहे हैं? जवाब: यह कोई बहुत हाई-टेक हैकिंग नहीं है, बल्कि सुरक्षा की एक साधारण चूक का फायदा उठाना है। इस एप में एक ‘रिमोट कट-ऑफ’ फीचर होता है, जिसकी मदद से बैटरी के डिस्चार्ज (पावर सप्लाई) को चालू या बंद किया जा सकता है। जब कोई व्यक्ति ई-रिक्शा के 10 से 15 मीटर के दायरे (ब्लूटूथ की रेंज) में आकर इस एप के जरिए वाहन की बैटरी से कनेक्ट होता है, तो वह डिस्चार्ज फंक्शन को बंद कर देता है। इससे मोटर को मिलने वाली पावर तुरंत कट जाती है और ई-रिक्शा रुक जाता है। सवाल 3: क्या देश के सभी ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन इस एप के जरिए रोके जा सकते हैं? जवाब: नहीं। सोशल मीडिया पर फैल रहे डर के विपरीत सभी ई-रिक्शा इसके जोखिम में नहीं हैं। यह एप केवल उन्हीं वाहनों पर असर डाल सकता है जो कुछ खास शर्तों को पूरा करते हैं। सवाल 3: कौन से ई-रिक्शा इस एप के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब: भारत में अभी भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं। इन बैटरियों में कोई ब्लूटूथ या डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता, इसलिए ये इस एप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, जिन लिथियम बैटरियों के ब्लूटूथ सिस्टम में मैन्युफैक्चरर या डीलर द्वारा मजबूत पासवर्ड सेट किया गया है, उन्हें भी इस एप के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। सवाल 4: चीनी कंपनी ने इस एप को किस उद्देश्य से बनाया था? क्या ये ई-रिक्शा के लिए था? जवाब: नहीं, कंपनी ने इस एप को ई-रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए नहीं बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों और नावों या जहाजों की बैटरी में लगी लिथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखना था। इस एप का डिस्चार्ज ऑन/ऑफ फीचर सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी ओनर पावर कट कर सके। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरियों को रिमोटली बंद करने के लिए किया जाने लगा। सवाल 5: इससे ई-रिक्शा चालकों और सड़क सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है? जवाब: वायरल वीडियो में लोग इसे खराब ड्राइविंग का ‘बदला’ लेने या केवल मनोरंजन के लिए ई-रिक्शा बंद करते दिख रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। ट्रैफिक के बीच अचानक ई-रिक्शा के बंद होने से पीछे से आ रहे वाहनों से टक्कर होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, ई-रिक्शा चालकों का समय बर्बाद होता है और उनकी कमाई पर असर पड़ता है। सवाल 6: सुरक्षा की इस बड़ी चूक के लिए असल में जिम्मेदार कौन है? जवाब: इसके लिए मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर बैटरी असेंबल करने वाले, डीलर्स और कुछ लो-कॉस्ट वाले लिथियम बैटरी मेकर्स जिम्मेदार हैं। भारत में सस्ते ई-रिक्शा पार्ट्स के बाजार में कई ऐसी लिथियम बैटरियां बेची जा रही हैं, जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बिना किसी पासवर्ड या डिफॉल्ट पासवर्ड के खुला छोड़ दिया जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी ने अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया हो और कोई भी अंदर आ जाए। सवाल 7: इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का क्या उपाय है? जवाब: इसका समाधान बहुत सीधा और आसान है। वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहकों को वाहन बेचने से पहले बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में एक मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। यदि पासवर्ड सेट रहेगा, तो ब्लूटूथ रेंज में होने के बावजूद कोई बाहरी व्यक्ति एप से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। सवाल 8: क्या इस मामले में प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई की जा रही है? जवाब: हां, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने घोषणा की है कि ई-रिक्शा को रिमोटली (दूर से) बंद करने की चिंताओं के बाद दो संदिग्ध एप्लिकेशन्स को एप स्टोर्स से हटा दिया गया है। इनमें विवादों में रहा ‘BAT-BMS’ एप भी शामिल है। इससे पहले शिकायतें बढ़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने ‘BAT-BMS’ के साथ-साथ इसी तरह काम करने वाले एक अन्य एप्लीकेशन ‘इपोच ली-आयन’ (Epoch Li-ion) के खिलाफ जांच शुरू की थी। सवाल 9: परिवहन विभाग इस समस्या को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठा सकता है? जवाब: दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह और विभाग के सीनियर अधिकारी इस तकनीकी खामी और सुरक्षा के खतरे की गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कम्यूटर्स और ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए इन असुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम एप्स पर किस तरह के प्रतिबंध या नियम लागू किए जा सकते हैं, ताकि अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके। नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है BMS? BMS का पूरा नाम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम है। यह लिथियम बैटरी का ‘दिमाग’ होता है। इसका काम बैटरी को ओवरचार्जिंग, ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट से बचाना होता है। आधुनिक बैटरियों में ब्लूटूथ बीएमएस दिया जाता है ताकि स्मार्टफोन एप के जरिए चालक को पता चल सके कि बैटरी कितनी चार्ज है और उसका तापमान कितना है। ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी टिप्स:

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जवाब: इसका समाधान बहुत सीधा और आसान है। वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहकों को वाहन बेचने से पहले बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में एक मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। यदि पासवर्ड सेट रहेगा, तो ब्लूटूथ रेंज में होने के बावजूद कोई बाहरी व्यक्ति एप से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। सवाल 8: क्या इस मामले में प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई की जा रही है? जवाब: हां, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने घोषणा की है कि ई-रिक्शा को रिमोटली (दूर से) बंद करने की चिंताओं के बाद दो संदिग्ध एप्लिकेशन्स को एप स्टोर्स से हटा दिया गया है। इनमें विवादों में रहा ‘BAT-BMS’ एप भी शामिल है। इससे पहले शिकायतें बढ़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने ‘BAT-BMS’ के साथ-साथ इसी तरह काम करने वाले एक अन्य एप्लीकेशन ‘इपोच ली-आयन’ (Epoch Li-ion) के खिलाफ जांच शुरू की थी। सवाल 9: परिवहन विभाग इस समस्या को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठा सकता है? जवाब: दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह और विभाग के सीनियर अधिकारी इस तकनीकी खामी और सुरक्षा के खतरे की गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कम्यूटर्स और ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए इन असुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम एप्स पर किस तरह के प्रतिबंध या नियम लागू किए जा सकते हैं, ताकि अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके। नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है BMS? 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