एक समय था जब इंग्लैंड के मैदानों पर मैच शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा नजरें आसमान पर होती थीं। बादल घिरते ही खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक की चिंता बढ़ जाती थी कि कहीं बारिश खेल न रोक दे। लेकिन अब आसमान साफ है, सूरज तेज है और खेल फिर भी मुश्किल में है। खिलाड़ी पसीने से भीगते हुए मैदान पर दौड़ रहे हैं, दर्शक छाते और पंखों के सहारे स्टैंड में टिके हैं, बच्चे मैच छोड़कर ‘कूल रूम’ में राहत तलाश रहे हैं और आयोजक हर कुछ कदम पर पानी और छांव का इंतजाम कर रहे हैं। वजह बारिश नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती गर्मी है। जलवायु परिवर्तन ने खेलों की दुनिया में भी नया दौर शुरू कर दिया है। मैदानों पर अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रह गया कि बारिश कब होगी, बल्कि यह है कि गर्मी कितनी बढ़ेगी। कभी स्कोरबोर्ड पर ‘रेन स्टॉप्ड प्ले’ लिखा जाता था। अब कई जगह ‘हीट स्टॉप्ड प्ले’ जैसी स्थिति बन रही है। ब्रिटेन में इस हफ्ते रिकॉर्ड गर्मी के बीच टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल के मुकाबले हुए। ईस्टबोर्न टेनिस और विम्बलडन क्वालिफायर में खिलाड़ी हर बदलाव के दौरान पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहे। दर्शक तौलिया गर्दन पर रखकर, छाते खोलकर और पंखे झलते हुए मुकाबले देखते रहे। पिछले साल विम्बलडन में एक दर्शक गर्मी से बेहोश हो गया था। उस समय कार्लोस अल्कारेज ने मैच रोककर उसे पानी पहुंचाया था। उसी घटना के बाद इस बार आयोजकों ने अतिरिक्त वाटर स्टेशन, छायादार ‘गेस्ट विलेज’ और आराम के लिए विशेष जगह बनाई है। ब्रिस्टल में महिला टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी तस्वीर अलग नहीं थी। बच्चों के लिए ‘कूल रूम’ बनाया गया, स्प्रिंकलर लगाए गए और मेडिकल टीम पूरे दिन तैनात रही। गर्मी के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए, जिससे करीब दो हजार बच्चे मैच देखने नहीं पहुंच सके। फिर भी हजारों दर्शक मैदान में डटे रहे। गर्मी अब केवल खिलाड़ियों और दर्शकों की परीक्षा नहीं ले रही, बल्कि खेल की टेक्नोलॉजी भी इसकी चपेट में आ रही है। विम्बलडन क्वालिफायर में ब्रिटिश खिलाड़ी डैन इवांस का मुकाबला एक घंटे से ज्यादा समय के लिए रोकना पड़ा, क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण इलेक्ट्रॉनिक लाइन कॉलिंग सिस्टम की बिजली बाधित हो गई। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने इस हफ्ते दुर्लभ ‘रेड एक्सट्रीम हीट वार्निंग’ जारी की। खेल संगठनों ने भी मान लिया है कि यह कुछ दिनों की समस्या नहीं है। इसलिए अब हर बड़े आयोजन में अतिरिक्त पानी, कूलिंग जोन, छायादार क्षेत्र और मेडिकल सहायता को स्थायी व्यवस्था बनाया जा रहा है। विम्बलडन के संचालन से जुड़े अधिकारी भी साफ कह चुके हैं कि अत्यधिक गर्मी से निपटना अब ‘न्यू नॉर्मल’ बन चुका है।
















































