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Toxic Relationship Signs; Girlfriend Boyfriend Trust Issue – Chats Screenshots

Toxic Relationship Signs; Girlfriend Boyfriend Trust Issue - Chats Screenshots
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3 घंटे पहले

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सवाल- मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मेरी हर बात का रिकॉर्ड रखता है, चैट के स्क्रीनशॉट रखता है। मैंने कब क्या कहा, कैसे कहा, सबकुछ।

फिर जब भी हमारे बीच झगड़ा होता है, वो पुराने चैट्स निकालकर दिखाने लगता है। जब पहली बार उसने चैट का स्क्रीनशॉट दिखाया तो मुझे बहुत शॉक लगा था। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है, क्या ये ट्रस्ट की कमी है या मैं जरूरत से ज्यादा सेंसिटिव हूं? मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को शब्दों में इतने अच्छे से व्यक्त किया। कॉलेज लाइफ में रिश्ते की इतनी गहरी समझ होना और ये सवाल पूछना आसान नहीं होता। ज्यादातर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देती रहती हैं, लेकिन आपने सवाल किया यानी आप सजग हैं। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं। रिश्ते में अगर हर बात पर सबूत मांगे जाएं, तो अविश्वास पैदा हो सकता है। चलिए, इस समस्या को स्टेप-बाई-स्टेप समझते हैं और देखते हैं कि आप क्या कर सकती हैं।

हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी नहीं है

अगर कोई पार्टनर बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है और झगड़े के समय उन्हें दिखाता है, तो यह हेल्दी पैटर्न नहीं है। रिकॉर्ड्स कोर्टरूम में जरूरी होते हैं क्योंकि वहां जज को सच और झूठ तय करने के लिए सबूत चाहिए। लेकिन ये समझना चाहिए कि रिश्ता कोर्टरूम नहीं है। इसलिए इसमें सबूत नहीं, समझ, भरोसा और भावनाओं की जरूरत होती है। इस तरह का बिहेवियर टॉक्सिक हो सकता है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

रिकॉर्ड रखने का पार्टनर पर क्या असर पड़ता है?

ऐसे रिश्ते में इंसान पर अक्सर ये तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं।

  • डर- कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोचना।
  • असुरक्षा- डर कि कहीं मेरी लिखी बात बाद में मेरे खिलाफ ही न इस्तेमाल हो।
  • खुद पर शक- मन में खुद के लिए ही शक पैदा होना।

यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का संकेत हो सकता है, अगर आपको लग रहा है कि-

  • आप खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं।
  • हर शब्द तौलकर बोलना पड़ रहा है।
  • आपको हर वक्त जजमेंट का डर लगता है।

ऐसे मामलों में अक्सर लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं। उन्हें ऐसा लगता है, जैसे हर बात एक टेस्ट है, जहां फेल होने पर पुराने पेपर निकालकर दिखाए जाते हैं। ये न सिर्फ गुस्सा बढ़ाता है, बल्कि रिश्ते की खुशी को भी छीन सकता है। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए-

क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है?

अक्सर लोग ऐसी सिचुएशन को सीधे ट्रस्ट इश्यू कह देते हैं, जबकि यह इससे ज्यादा गहरी बात है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे उसका कोई ट्रॉमा, पास्ट रिलेशनशिप या परवरिश हो सकती है।

  • ऐसा हो सकता है कि उसके ऊपर पिछले रिश्तों में झूठे आरोप लगे हों।
  • हो सकता है कि उसे बार-बार गलत ठहराया गया हो।
  • हो सकता है कि उसकी परवरिश ऐसी रही हो, जहां हर बात का हिसाब रखा जाता हो।
  • उसे यह सिखाया गया हो कि बिना सबूत के बात पर भरोसा नहीं किया जाता।

ऐसे लोग अक्सर खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

आपको क्या करना चाहिए?

भले ही पार्टनर की ऐसी आदतों के पीछे उसकी जिंदगी के पुराने अनुभव हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको ऐसे व्यवहार को सहन करना चाहिए। किसी की इनसिक्योरिटी को समझना इंसानियत है, लेकिन उसी इनसिक्योरिटी की कीमत पर अपनी मानसिक शांति गंवाना समझदारी नहीं है।

आप दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, आपकी जिंदगी में पढ़ाई, दोस्त, करियर भी महत्वपूर्ण हैं। रिश्ता ऐसा होना चाहिए, जो आपको सपोर्ट करे, न कि बोझ बन जाए।

पार्टनर को काउंसलिंग की जरूरत

अगर कोई इंसान रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो यह संकेत है कि उसके अंदर डर और अविश्वास जैसी भावनाएं बहुत गहरे बैठी हैं। इसके लिए उसे प्रोफेशनल हेल्प और काउंसलिंग की जरूरत है।

काउंसलिंग के दौरान सपोर्ट करें, लेकिन दोस्त की तरह

यहां आपको एक अहम बात समझनी होगी कि आप पार्टनर को सपोर्ट कर सकती हैं। आप यह कह सकती हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझ रही हैं। आप उसे काउंसलिंग लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। लेकिन सपोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आप रिश्ते में रहकर खुद तकलीफ सहती रहेंगी। सपोर्ट करना है तो दोस्त बनकर किया जा सकता है। पार्टनर बनकर खुद की जिंदगी खराब करना, सपोर्ट नहीं कहलाता।

बाउंड्री तय करना जरूरी

आपको साफ-साफ यह कहना होगा कि झगड़े में पुरानी चैट्स निकालना आपको असहज करता है। यह तरीका आपको सुरक्षित महसूस नहीं कराता और आप रिश्ते में इस पैटर्न को नहीं सहन करेंगी। बाउंड्री रखने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अपनी सेफ्टी तय कर रही हैं।

अगर पैटर्न न बदले तो क्या करें?

अगर पार्टनर आपकी फीलिंग्स को बार-बार नजरअंदाज करे, आपको ही ओवर-सेंसिटिव कहे, हर बार सबूत से चुप कराने की कोशिश करे तो आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा- क्या मैं इस रिश्ते में खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हूं? रिलेशनशिप के मजबूत और स्थाई होने के लिए जरूरी है कि कोई इंसान खुद को कमतर न महसूस करे। दोनों एक-दूसरे को बराबरी पर आकें।

रेड फ्लैग कैसे पहचानें?

अगर पार्टनर बदलने को तैयार नहीं है, तो यह रेड फ्लैग है। यह रिश्ते को री-इवैल्यूएट करने का समय है। रेड फ्लैग की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखें-

रिश्ते में भरोसा जरूरी

रिश्ते भरोसे से चलते हैं, डॉक्यूमेंटेशन से नहीं। जहां हर बात का रिकॉर्ड रखना पड़े, वहां लोग दिल खोलकर नहीं बोल पाते हैं। आपका असहज महसूस करना जायज है। आपकी भावनाएं वैलिड हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि किसी को ठीक करने की कोशिश में खुद को परेशानी में डालना प्यार नहीं है।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- शादी-बच्चे की जिम्मेदारियों में फंस गई हूं: मुझे पर्सनल स्पेस चाहिए, लेकिन हसबैंड समझते नहीं, क्या मैं गलत हूं?

हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आगे पढ़िए…

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सवाल- मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मेरी हर बात का रिकॉर्ड रखता है, चैट के स्क्रीनशॉट रखता है। मैंने कब क्या कहा, कैसे कहा, सबकुछ।

फिर जब भी हमारे बीच झगड़ा होता है, वो पुराने चैट्स निकालकर दिखाने लगता है। जब पहली बार उसने चैट का स्क्रीनशॉट दिखाया तो मुझे बहुत शॉक लगा था। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है, क्या ये ट्रस्ट की कमी है या मैं जरूरत से ज्यादा सेंसिटिव हूं? मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को शब्दों में इतने अच्छे से व्यक्त किया। कॉलेज लाइफ में रिश्ते की इतनी गहरी समझ होना और ये सवाल पूछना आसान नहीं होता। ज्यादातर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देती रहती हैं, लेकिन आपने सवाल किया यानी आप सजग हैं। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं। रिश्ते में अगर हर बात पर सबूत मांगे जाएं, तो अविश्वास पैदा हो सकता है। चलिए, इस समस्या को स्टेप-बाई-स्टेप समझते हैं और देखते हैं कि आप क्या कर सकती हैं।

हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी नहीं है

अगर कोई पार्टनर बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है और झगड़े के समय उन्हें दिखाता है, तो यह हेल्दी पैटर्न नहीं है। रिकॉर्ड्स कोर्टरूम में जरूरी होते हैं क्योंकि वहां जज को सच और झूठ तय करने के लिए सबूत चाहिए। लेकिन ये समझना चाहिए कि रिश्ता कोर्टरूम नहीं है। इसलिए इसमें सबूत नहीं, समझ, भरोसा और भावनाओं की जरूरत होती है। इस तरह का बिहेवियर टॉक्सिक हो सकता है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

रिकॉर्ड रखने का पार्टनर पर क्या असर पड़ता है?

ऐसे रिश्ते में इंसान पर अक्सर ये तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं।

  • डर- कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोचना।
  • असुरक्षा- डर कि कहीं मेरी लिखी बात बाद में मेरे खिलाफ ही न इस्तेमाल हो।
  • खुद पर शक- मन में खुद के लिए ही शक पैदा होना।

यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का संकेत हो सकता है, अगर आपको लग रहा है कि-

  • आप खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं।
  • हर शब्द तौलकर बोलना पड़ रहा है।
  • आपको हर वक्त जजमेंट का डर लगता है।

ऐसे मामलों में अक्सर लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं। उन्हें ऐसा लगता है, जैसे हर बात एक टेस्ट है, जहां फेल होने पर पुराने पेपर निकालकर दिखाए जाते हैं। ये न सिर्फ गुस्सा बढ़ाता है, बल्कि रिश्ते की खुशी को भी छीन सकता है। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए-

क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है?

अक्सर लोग ऐसी सिचुएशन को सीधे ट्रस्ट इश्यू कह देते हैं, जबकि यह इससे ज्यादा गहरी बात है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे उसका कोई ट्रॉमा, पास्ट रिलेशनशिप या परवरिश हो सकती है।

  • ऐसा हो सकता है कि उसके ऊपर पिछले रिश्तों में झूठे आरोप लगे हों।
  • हो सकता है कि उसे बार-बार गलत ठहराया गया हो।
  • हो सकता है कि उसकी परवरिश ऐसी रही हो, जहां हर बात का हिसाब रखा जाता हो।
  • उसे यह सिखाया गया हो कि बिना सबूत के बात पर भरोसा नहीं किया जाता।

ऐसे लोग अक्सर खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

आपको क्या करना चाहिए?

भले ही पार्टनर की ऐसी आदतों के पीछे उसकी जिंदगी के पुराने अनुभव हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको ऐसे व्यवहार को सहन करना चाहिए। किसी की इनसिक्योरिटी को समझना इंसानियत है, लेकिन उसी इनसिक्योरिटी की कीमत पर अपनी मानसिक शांति गंवाना समझदारी नहीं है।

आप दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, आपकी जिंदगी में पढ़ाई, दोस्त, करियर भी महत्वपूर्ण हैं। रिश्ता ऐसा होना चाहिए, जो आपको सपोर्ट करे, न कि बोझ बन जाए।

पार्टनर को काउंसलिंग की जरूरत

अगर कोई इंसान रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो यह संकेत है कि उसके अंदर डर और अविश्वास जैसी भावनाएं बहुत गहरे बैठी हैं। इसके लिए उसे प्रोफेशनल हेल्प और काउंसलिंग की जरूरत है।

काउंसलिंग के दौरान सपोर्ट करें, लेकिन दोस्त की तरह

यहां आपको एक अहम बात समझनी होगी कि आप पार्टनर को सपोर्ट कर सकती हैं। आप यह कह सकती हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझ रही हैं। आप उसे काउंसलिंग लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। लेकिन सपोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आप रिश्ते में रहकर खुद तकलीफ सहती रहेंगी। सपोर्ट करना है तो दोस्त बनकर किया जा सकता है। पार्टनर बनकर खुद की जिंदगी खराब करना, सपोर्ट नहीं कहलाता।

बाउंड्री तय करना जरूरी

आपको साफ-साफ यह कहना होगा कि झगड़े में पुरानी चैट्स निकालना आपको असहज करता है। यह तरीका आपको सुरक्षित महसूस नहीं कराता और आप रिश्ते में इस पैटर्न को नहीं सहन करेंगी। बाउंड्री रखने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अपनी सेफ्टी तय कर रही हैं।

अगर पैटर्न न बदले तो क्या करें?

अगर पार्टनर आपकी फीलिंग्स को बार-बार नजरअंदाज करे, आपको ही ओवर-सेंसिटिव कहे, हर बार सबूत से चुप कराने की कोशिश करे तो आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा- क्या मैं इस रिश्ते में खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हूं? रिलेशनशिप के मजबूत और स्थाई होने के लिए जरूरी है कि कोई इंसान खुद को कमतर न महसूस करे। दोनों एक-दूसरे को बराबरी पर आकें।

रेड फ्लैग कैसे पहचानें?

अगर पार्टनर बदलने को तैयार नहीं है, तो यह रेड फ्लैग है। यह रिश्ते को री-इवैल्यूएट करने का समय है। रेड फ्लैग की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखें-

रिश्ते में भरोसा जरूरी

रिश्ते भरोसे से चलते हैं, डॉक्यूमेंटेशन से नहीं। जहां हर बात का रिकॉर्ड रखना पड़े, वहां लोग दिल खोलकर नहीं बोल पाते हैं। आपका असहज महसूस करना जायज है। आपकी भावनाएं वैलिड हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि किसी को ठीक करने की कोशिश में खुद को परेशानी में डालना प्यार नहीं है।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- शादी-बच्चे की जिम्मेदारियों में फंस गई हूं: मुझे पर्सनल स्पेस चाहिए, लेकिन हसबैंड समझते नहीं, क्या मैं गलत हूं?

हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आगे पढ़िए…

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