Saturday, 24 Oct 2026 | 08:15 AM

Trending :

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार की तारीफ नहीं की, बल्कि अपनी निजी यादें भी साझा कीं। सवाल: नेपोटिज्म पर आपकी क्या राय है? जवाब: हर चीज के दो पहलू होते हैं। अगर मेरा बेटा अभिनेता बनना चाहेगा, तो मैं भी चाहूंगा कि उसे अच्छा लॉन्च मिले। इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन अगर किसी और का हक छीनकर अपने बच्चे को आगे बढ़ाया जाए, तो वह गलत है। आउटसाइडर के लिए शिकायत करने से ज्यादा जरूरी है कि वह अपने काम पर लगातार ध्यान दे। सवाल: सफलता को संभालना ज्यादा मुश्किल है या असफलता को? जवाब: मेरे हिसाब से सफलता ज्यादा मुश्किल है। असफलता इंसान को सिखाती है, लेकिन सफलता कई बार उसे बदल देती है। इसलिए हमेशा जमीन से जुड़े रहना जरूरी है। सवाल: आपके काम की सबसे यादगार तारीफ किसने की? जवाब: सबसे बड़ी तारीफ नसीरुद्दीन शाह सर से मिली। एक बार दुबई में नाना पाटेकर सर ने कहा, “वैभव, बहुत सुंदर काम करता है तू।” जिन कलाकारों को देखकर अभिनय सीखा हो, अगर वही आपकी तारीफ करें तो उससे बड़ा सम्मान नहीं हो सकता। भंसाली सर की तारीफ भी मेरी जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक है। सवाल: ‘टाइटन’ की सफलता ने आपको क्या दिया? जवाब: इस प्रोजेक्ट ने मुझे दर्शकों का ऐसा प्यार दिया, जो पहले कभी नहीं मिला। लोगों ने सिर्फ किरदार की तारीफ नहीं की, बल्कि उससे अपना रिश्ता जोड़ लिया। किसी ने अपनी पहली टाइटन घड़ी की कहानी सुनाई, तो किसी ने अपने पिता की यादें साझा कीं। तभी महसूस हुआ कि यह सिर्फ वेब सीरीज नहीं, लोगों की अपनी कहानी बन गई है। सवाल: डांस आपकी जिंदगी में कितनी अहमियत रखता है? जवाब: बचपन में मैं बहुत शरारती था, इसलिए मां ने मुझे डांस क्लास भेज दिया। धीरे-धीरे डांस मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया। आज भी तनाव होने पर पांच मिनट गाना लगाकर खुलकर डांस कर लेता हूं। मेरे लिए डांस ही मेडिटेशन है। सवाल: आपके माता-पिता का साथ कितना अहम रहा? जवाब: अगर परिवार का साथ नहीं मिलता, तो शायद मैं अभिनेता नहीं बन पाता। उन्होंने सिर्फ सपने देखने की आजादी नहीं दी, बल्कि उन्हें पूरा करने का समय और भरोसा दिया। इसी वजह से मैं ऐसे प्रोजेक्ट्स भी मना कर पाया, जो मुझे पसंद नहीं थे। मेरी हर सफलता में सबसे बड़ा योगदान मेरे माता-पिता का है। सवाल: क्या किसी फिल्म को छोड़ने का अफसोस है? जवाब: हां, एक फिल्म को लेकर अफसोस है। मैंने सुपर 30 में छोटा-सा रोल करने से मना कर दिया था। बाद में फिल्म बड़ी हिट हुई। मेरा किरदार बड़ा नहीं था, लेकिन लगता है कि वह अनुभव अच्छा होता। फिर भी मानता हूं कि हर फैसला कुछ न कुछ सिखा जाता है। सवाल: इंडस्ट्री में आने वाले युवाओं को क्या सलाह देंगे? जवाब: सबसे जरूरी है कि आपके पास मजबूत सपोर्ट सिस्टम हो। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होने से कुछ नहीं होता। जरूरत के समय अगर दो अपने लोग भी साथ न हों, तो इंसान अकेला पड़ जाता है। योग, किताबें, संगीत या यात्रा, जो भी मानसिक संतुलन दे, उसे जिंदगी का हिस्सा बनाइए। इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना सबसे जरूरी है। सवाल: क्या लंबे समय तक इंडस्ट्री में बने रहना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है? जवाब: बिल्कुल। यहां ब्रेक मिलना मुश्किल है, लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल खुद को बनाए रखना है। अगर कोई कलाकार 20-25 साल तक लगातार अच्छा काम कर रहा है, तो वह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सवाल: आगे किस तरह के किरदार करना चाहते हैं? जवाब: मैं हिंदी, मराठी और तेलुगु, तीनों भाषाओं में अच्छे किरदार निभाना चाहता हूं। मेरा कोई तय ड्रीम रोल नहीं है। कोशिश है कि ऐसा किरदार निभाऊं, जो आगे चलकर दूसरे कलाकारों का ड्रीम रोल बन जाए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
West Bengal SC Slams SIR Voter List Cut

April 13, 2026/
5:05 am

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट सोमवार को SIR पर सुनवाई करेगा।...

12 जून से इंग्लैंड में महिला टी20 वर्ल्ड कप:पहली बार मैदान में होंगी 5 गेमचेंजर खिलाड़ी; 12 टीमों में से मिलेगी भविष्य की सुपरस्टार

June 10, 2026/
12:45 pm

महिला टी20 वर्ल्ड कप हमेशा से उन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच रहा है, जो अपनी प्रतिभा को साबित...

Salim Khan Discharged From Lilavati Hospital

March 17, 2026/
11:48 am

25 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के पिता और स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान आज मुंबई के लीलावती...

अफवाह फैलाने वालों पर होगा एक्शन:मैहर में होली-रमजान पर शांति समिति की बैठक; हुड़दंगियों पर प्रशासन सख्त

March 1, 2026/
6:47 pm

मैहर जिले के रामनगर थाने में रविवार शाम होली और रमजान माह को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य...

नीमच में 15 लाख की MD ड्रग्स पकड़ाई:तीन तस्कर गिरफ्तार, वाहन चेकिंग में इनके पास डोडाचूरा भी मिला

April 20, 2026/
4:27 pm

नीमच सिटी पुलिस ने तीन ड्रग तस्करों को पकड़ा है, जिनके पास से 15 लाख रुपए की एमडी ड्रग्स और...

राजनीति

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार की तारीफ नहीं की, बल्कि अपनी निजी यादें भी साझा कीं। सवाल: नेपोटिज्म पर आपकी क्या राय है? जवाब: हर चीज के दो पहलू होते हैं। अगर मेरा बेटा अभिनेता बनना चाहेगा, तो मैं भी चाहूंगा कि उसे अच्छा लॉन्च मिले। इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन अगर किसी और का हक छीनकर अपने बच्चे को आगे बढ़ाया जाए, तो वह गलत है। आउटसाइडर के लिए शिकायत करने से ज्यादा जरूरी है कि वह अपने काम पर लगातार ध्यान दे। सवाल: सफलता को संभालना ज्यादा मुश्किल है या असफलता को? जवाब: मेरे हिसाब से सफलता ज्यादा मुश्किल है। असफलता इंसान को सिखाती है, लेकिन सफलता कई बार उसे बदल देती है। इसलिए हमेशा जमीन से जुड़े रहना जरूरी है। सवाल: आपके काम की सबसे यादगार तारीफ किसने की? जवाब: सबसे बड़ी तारीफ नसीरुद्दीन शाह सर से मिली। एक बार दुबई में नाना पाटेकर सर ने कहा, “वैभव, बहुत सुंदर काम करता है तू।” जिन कलाकारों को देखकर अभिनय सीखा हो, अगर वही आपकी तारीफ करें तो उससे बड़ा सम्मान नहीं हो सकता। भंसाली सर की तारीफ भी मेरी जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक है। सवाल: ‘टाइटन’ की सफलता ने आपको क्या दिया? जवाब: इस प्रोजेक्ट ने मुझे दर्शकों का ऐसा प्यार दिया, जो पहले कभी नहीं मिला। लोगों ने सिर्फ किरदार की तारीफ नहीं की, बल्कि उससे अपना रिश्ता जोड़ लिया। किसी ने अपनी पहली टाइटन घड़ी की कहानी सुनाई, तो किसी ने अपने पिता की यादें साझा कीं। तभी महसूस हुआ कि यह सिर्फ वेब सीरीज नहीं, लोगों की अपनी कहानी बन गई है। सवाल: डांस आपकी जिंदगी में कितनी अहमियत रखता है? जवाब: बचपन में मैं बहुत शरारती था, इसलिए मां ने मुझे डांस क्लास भेज दिया। धीरे-धीरे डांस मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया। आज भी तनाव होने पर पांच मिनट गाना लगाकर खुलकर डांस कर लेता हूं। मेरे लिए डांस ही मेडिटेशन है। सवाल: आपके माता-पिता का साथ कितना अहम रहा? जवाब: अगर परिवार का साथ नहीं मिलता, तो शायद मैं अभिनेता नहीं बन पाता। उन्होंने सिर्फ सपने देखने की आजादी नहीं दी, बल्कि उन्हें पूरा करने का समय और भरोसा दिया। इसी वजह से मैं ऐसे प्रोजेक्ट्स भी मना कर पाया, जो मुझे पसंद नहीं थे। मेरी हर सफलता में सबसे बड़ा योगदान मेरे माता-पिता का है। सवाल: क्या किसी फिल्म को छोड़ने का अफसोस है? जवाब: हां, एक फिल्म को लेकर अफसोस है। मैंने सुपर 30 में छोटा-सा रोल करने से मना कर दिया था। बाद में फिल्म बड़ी हिट हुई। मेरा किरदार बड़ा नहीं था, लेकिन लगता है कि वह अनुभव अच्छा होता। फिर भी मानता हूं कि हर फैसला कुछ न कुछ सिखा जाता है। सवाल: इंडस्ट्री में आने वाले युवाओं को क्या सलाह देंगे? जवाब: सबसे जरूरी है कि आपके पास मजबूत सपोर्ट सिस्टम हो। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होने से कुछ नहीं होता। जरूरत के समय अगर दो अपने लोग भी साथ न हों, तो इंसान अकेला पड़ जाता है। योग, किताबें, संगीत या यात्रा, जो भी मानसिक संतुलन दे, उसे जिंदगी का हिस्सा बनाइए। इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना सबसे जरूरी है। सवाल: क्या लंबे समय तक इंडस्ट्री में बने रहना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है? जवाब: बिल्कुल। यहां ब्रेक मिलना मुश्किल है, लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल खुद को बनाए रखना है। अगर कोई कलाकार 20-25 साल तक लगातार अच्छा काम कर रहा है, तो वह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सवाल: आगे किस तरह के किरदार करना चाहते हैं? जवाब: मैं हिंदी, मराठी और तेलुगु, तीनों भाषाओं में अच्छे किरदार निभाना चाहता हूं। मेरा कोई तय ड्रीम रोल नहीं है। कोशिश है कि ऐसा किरदार निभाऊं, जो आगे चलकर दूसरे कलाकारों का ड्रीम रोल बन जाए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.