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नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान में मौत:8 हजार मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ रहे थे, हिमस्खलन में गई जान

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान में मौत:8 हजार मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ रहे थे, हिमस्खलन में गई जान

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान में हिमस्खलन यानी एवलांच की चपेट में आने के बाद मौत हो गई। उनके निधन की पुष्टि उनकी ही पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेडिशन ने की है। निर्मल पुर्जा 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक की चोटी पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। इनमें छह नेपाली पर्वतारोही भी शामिल थे। मैप से समझिए हादसे की लोकेशन… 6 महीने में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं ब्रिटिश स्पेशल फोर्स जॉइन करने वाले पहले नेपाली निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के दाना गांव में हुआ था। उनके परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है। कई पीढ़ियों से परिवार के लोग गोरखा रेजिमेंट में सेवा करते रहे। उनके पिता और तीन बड़े भाई भी गोरखा सैनिक थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े निर्मल ने भी बचपन से ही सैनिक बनने का सपना देखा। बाद में उन्होंने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हो गए। करीब छह साल तक गोरखा सैनिक के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले नेपाली बने। SBS ब्रिटेन की नौसेना की सबसे खतरनाक और प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है। इसके सैनिक समुद्र, पहाड़, जंगल और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें चयन इतना मुश्किल है कि बहुत कम सैनिक इसे पूरा कर पाते हैं। करीब 16 साल तक सेना में रहते हुए निर्मल पुर्जा ने अत्यधिक ठंडे और मुश्किल इलाकों में कई स्पेशल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसी दौरान उनके मन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ख्याल आया। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सुरक्षित सैन्य करियर छोड़ने का बड़ा फैसला लिया। सेना से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण पर फोकस किया। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया, ताकि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना पूरा कर सकें।

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