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Trump Iran Nuclear Deal Ceasefire Plan

Trump Iran Nuclear Deal Ceasefire Plan

4 घंटे पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें।

इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है।

ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं।

ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है।

अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान?

1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’

अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने अंडरग्राउंड ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता।

2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास

हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।

3. हजारों ड्रोन का बेड़ा

ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया।

4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क

ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है।

होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है?

हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है।

शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी।

इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया।

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द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें।

इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है।

ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं।

ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है।

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2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास

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3. हजारों ड्रोन का बेड़ा

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होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है?

हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है।

शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी।

इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया।

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