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RPSC Assistant Professor Recruitment 2026

RPSC Assistant Professor Recruitment 2026

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 को लेकर चल रहा कानूनी विवाद शुक्रवार को समाप्त हो गया, इसे लेकर अब पूरी तरह से रास्ता साफ हो गया है।

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जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ में धर्मवीर मीणा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है। इसके बाद 922 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया के आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।

आयोग की ओर से अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाबदावा पेश किया। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ शास्ति (जुर्माना) लगाए जाने की मांग की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रिट याचिका वापस ले ली।

आयोग के अनुसार, याचिका वापस लिए जाने के साथ ही कॉलेज शिक्षा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और भर्ती का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

भर्ती और इंटरव्यू प्रक्रिया नहीं रुकी

30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश के बावजूद आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। आयोग की ओर से इस भर्ती के तहत इंटरव्यू के लिए सफल अभ्यर्थियों के परिणाम लगातार जारी किए गए और भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया जारी रखी गई।

आयोग ने गलत तथ्य रखने का उठाया मुद्दा

मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। आयोग ने न्यायालय से आग्रह किया कि गलत तथ्य प्रस्तुत करने और बिना आधार के कोर्ट का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के कारण याचिकाकर्ता पर शास्ति(जुर्माना) लगाई जाए।

574 पदों के विज्ञापन के बाद बढ़कर 922 हुए पद

यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026, धर्मवीर मीणा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य से जुड़ा था। 30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद आयोग ने अंतरिम आदेश को निरस्त करवाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत स्टे वेकेशन एप्लीकेशन और जवाबदावा पेश किया।

आयोग ने न्यायालय को बताया कि याचिका और स्टे एप्लीकेशन में बताए गए तथ्य पूरी तरह भ्रामक हैं। आयोग के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 का विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि कार्मिक विभाग की अधिसूचना 21 जुलाई 2025 को जारी की जा चुकी थी।

कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के अनुसार, सेवा नियमों में संशोधन कर अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई थी। ऐसे में 574 पदों के मूल विज्ञापन के विरुद्ध 348 पदों की वृद्धि कर कुल 922 पद किए जाने के लिए 13 मई 2026 को जारी शुद्धि पत्र और भर्ती में की गई पदों की वृद्धि नियमानुसार थी।

तथ्य सामने आने के बाद याचिका वापस

आयोग के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष भर्ती से जुड़े तथ्यों और नियमों को विस्तार से रखा। आयोग के अनुसार, इसके बाद याचिकाकर्ता के पास याचिका जारी रखने का कोई वैधानिक आधार नहीं बचा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए तत्काल रिट याचिका वापस ले ली।

एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली भर्ती में पहले ही कैविएट

भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को कानूनी विवाद के कारण अचानक बाधित होने से बचाने के लिए आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर निर्णय लिया गया है कि एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों के मामलों में आयोग की ओर से संबंधित न्यायालय में पहले ही कैविएट दायर की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी स्तर पर बिना आयोग का पक्ष सुने भर्ती प्रक्रिया पर एकतरफा आदेश के कारण अनावश्यक रोक न लगे।

करीब 3000 न्यायिक मामलों की व्यक्तिगत निगरानी

आयोग के अनुसार, वर्तमान में उसके करीब 3000 न्यायिक प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। इनके तुरंत और समुचित निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह प्रत्येक मामले को आयोग की लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से डिस्कस कर रहे हैं। इससे न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ में धर्मवीर मीणा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है। इसके बाद 922 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया के आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।

आयोग की ओर से अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाबदावा पेश किया। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ शास्ति (जुर्माना) लगाए जाने की मांग की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रिट याचिका वापस ले ली।

आयोग के अनुसार, याचिका वापस लिए जाने के साथ ही कॉलेज शिक्षा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और भर्ती का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

भर्ती और इंटरव्यू प्रक्रिया नहीं रुकी

30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश के बावजूद आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। आयोग की ओर से इस भर्ती के तहत इंटरव्यू के लिए सफल अभ्यर्थियों के परिणाम लगातार जारी किए गए और भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया जारी रखी गई।

आयोग ने गलत तथ्य रखने का उठाया मुद्दा

मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। आयोग ने न्यायालय से आग्रह किया कि गलत तथ्य प्रस्तुत करने और बिना आधार के कोर्ट का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के कारण याचिकाकर्ता पर शास्ति(जुर्माना) लगाई जाए।

574 पदों के विज्ञापन के बाद बढ़कर 922 हुए पद

यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026, धर्मवीर मीणा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य से जुड़ा था। 30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद आयोग ने अंतरिम आदेश को निरस्त करवाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत स्टे वेकेशन एप्लीकेशन और जवाबदावा पेश किया।

आयोग ने न्यायालय को बताया कि याचिका और स्टे एप्लीकेशन में बताए गए तथ्य पूरी तरह भ्रामक हैं। आयोग के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 का विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि कार्मिक विभाग की अधिसूचना 21 जुलाई 2025 को जारी की जा चुकी थी।

कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के अनुसार, सेवा नियमों में संशोधन कर अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई थी। ऐसे में 574 पदों के मूल विज्ञापन के विरुद्ध 348 पदों की वृद्धि कर कुल 922 पद किए जाने के लिए 13 मई 2026 को जारी शुद्धि पत्र और भर्ती में की गई पदों की वृद्धि नियमानुसार थी।

तथ्य सामने आने के बाद याचिका वापस

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एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली भर्ती में पहले ही कैविएट

भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को कानूनी विवाद के कारण अचानक बाधित होने से बचाने के लिए आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर निर्णय लिया गया है कि एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों के मामलों में आयोग की ओर से संबंधित न्यायालय में पहले ही कैविएट दायर की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी स्तर पर बिना आयोग का पक्ष सुने भर्ती प्रक्रिया पर एकतरफा आदेश के कारण अनावश्यक रोक न लगे।

करीब 3000 न्यायिक मामलों की व्यक्तिगत निगरानी

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