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Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका5 मिनट पहले

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बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है।

ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है।

भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए

  • 70 हजार क्यूसेक या उससे कम: दोनों को 50-50% पानी
  • 70 से 75 हजार क्यूसेक: बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक, बाकी भारत को
  • 75 हजार क्यूसेक या ज्यादा: भारत को 40 हजार क्यूसेक, बाकी बांग्लादेश कोयह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है।

बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए

बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है।

गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा।

बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए।

बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है।

फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद

भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले।

गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था। समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी।

फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ।

फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ।

इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं-

  • सिंचाई के लिए पानी कम पड़ना
  • खेती प्रभावित होना
  • मछलियों और जलीय जीवन पर असर
  • नदी में गाद बढ़ना
  • खारे पानी का ऊपर की ओर आना
  • नदी और आसपास के पर्यावरण पर असर

1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता

फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा।

आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी।

1977 का समझौता सिर्फ 5 साल के लिए था और 1982 में खत्म हो गया। इसके बाद 1982 और 1985 के समझौता ज्ञापनों में भी गारंटी क्लॉज नहीं था। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ।

इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे।

असल दिक्कत यहीं से शुरू हुई कि 1996 के समझौते में ‘पानी कम पड़ने पर क्या करना है’ तो लिखा गया, लेकिन यह साफ नहीं लिखा गया कि उस स्थिति में बांग्लादेश को कम से कम कितना पानी मिलना ही चाहिए।

—————————

यह खबर पढ़ें…

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बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है।

ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है।

भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए

  • 70 हजार क्यूसेक या उससे कम: दोनों को 50-50% पानी
  • 70 से 75 हजार क्यूसेक: बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक, बाकी भारत को
  • 75 हजार क्यूसेक या ज्यादा: भारत को 40 हजार क्यूसेक, बाकी बांग्लादेश कोयह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है।

बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए

बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है।

गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा।

बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए।

बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है।

फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद

भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले।

गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था। समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी।

फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ।

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  • मछलियों और जलीय जीवन पर असर
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  • खारे पानी का ऊपर की ओर आना
  • नदी और आसपास के पर्यावरण पर असर

1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता

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1977 का समझौता सिर्फ 5 साल के लिए था और 1982 में खत्म हो गया। इसके बाद 1982 और 1985 के समझौता ज्ञापनों में भी गारंटी क्लॉज नहीं था। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ।

इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे।

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