पन्ना जिले में आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने महीनों से रुके मानदेय और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। गुरुवार, 26 फरवरी को म.प्र. आशा/ऊषा सहयोगी श्रमिक संघ के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के बाद, संघ ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली ये कार्यकर्ता आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। पूर्व में घोषित 1000 रुपये की वार्षिक वृद्धि और केंद्र सरकार द्वारा जारी 1500 रुपये की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें महीनों तक मानदेय नहीं मिलता, और जब मिलता है तो वह अधूरा होता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों पर भी उन्हें बकाया भुगतान नहीं मिला। इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से वंचित रखा गया है। आशा कार्यकर्ता करुणा गौतम ने कहा कि शासन-प्रशासन मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उनकी तारीफ तो करता है, लेकिन जब उनके हक के पैसे देने की बात आती है, तो फाइलें दबा ली जाती हैं। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है। यूनियन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय का नियमित भुगतान और अन्य अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।












































