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Russia-Ukraine War Impact | Black Sea Grain Export Crisis & Price Surge

Russia-Ukraine War Impact | Black Sea Grain Export Crisis & Price Surge

कीव15 मिनट पहले

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रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है।

इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं।लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।

जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। इसका असर दुनिया की खाद्य सप्लाई पर पड़ने का खतरा है।

गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।

रूस का अनाज निर्यात 71% घटा

अगस्त में रूस का कुल अनाज निर्यात पिछले साल के 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया। यानी करीब 71% की गिरावट आई।

रूस का गेहूं निर्यात भी 50 लाख टन से घटकर 13 लाख टन रह गया। रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है।

वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया।

पिछले साल के मुकाबले गेहूं 30% महंगा हुआ

बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ने से अनाज का समुद्री कारोबार प्रभावित हुआ है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है।

इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं।

यूक्रेन ने सड़क-रेल से निर्यात बढ़ाया, लेकिन सप्लाई कम

ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज दूसरे देशों तक भेज रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है।

डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प समुद्री रास्ते की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है।

मक्का की ग्लोबल सप्लाई पर भी असर का खतरा

ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ गेहूं पर नहीं, मक्का की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था।

यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

ब्लैक सी क्यों है इतना अहम?

ब्लैक सी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचता है।

दोनों देश मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात का करीब 30% हिस्सा रखते हैं। इसलिए ब्लैक सी में सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार पर पड़ सकता है।

2022 में भी बढ़ी थीं खाद्य कीमतें

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ब्लैक सी से अनाज निर्यात बाधित हुआ था। उस समय दुनिया भर में खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी।

बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता से ब्लैक सी ग्रेन डील लागू हुई। इससे लाखों टन अनाज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सका।

अब ब्लैक सी में फिर जहाजों और बंदरगाहों पर हमले बढ़ने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर समुद्री रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहा तो गेहूं, मक्का और खाद्य तेल की कीमतों में नई तेजी आ सकती है।

इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है जो रूस और यूक्रेन से होने वाले अनाज निर्यात पर निर्भर हैं।

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गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।

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वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया।

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इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं।

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ब्लैक सी क्यों है इतना अहम?

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2022 में भी बढ़ी थीं खाद्य कीमतें

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ब्लैक सी से अनाज निर्यात बाधित हुआ था। उस समय दुनिया भर में खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी।

बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता से ब्लैक सी ग्रेन डील लागू हुई। इससे लाखों टन अनाज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सका।

अब ब्लैक सी में फिर जहाजों और बंदरगाहों पर हमले बढ़ने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर समुद्री रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहा तो गेहूं, मक्का और खाद्य तेल की कीमतों में नई तेजी आ सकती है।

इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है जो रूस और यूक्रेन से होने वाले अनाज निर्यात पर निर्भर हैं।

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